*अब्दुल जब्बार एड्वोकेट व् सतींद्र शास्त्री की रिपोर्ट* *भजन बिना नर सोहै कैसे।लवण बिना बहु ब्यनजन जैसे* *श्रीमद भागवत कथा के 6 वे दिवस कथा ब्यास जी ने ईश्वर भक्ति,भजन की महत्ता पर बल दिया* भेलसर(अयोध्या)मोहल्ला काजीपुरा रुदौली में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 6 वे दिवस श्री मता कसौधन द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास रोहित जी महाराज ने कहा जिस प्रकार बिना भजन नर अच्छा नहीं लगता है वैसे लवण बिना कितना भी सुंदर भोजन बना हो वह व्यर्थ लगता है।मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए जब हम अपना ध्यान परमात्मा में लगाये तो जीवन सार्थक हो गायेगा।आवागमन के बंधन से मुक्ति होकर परमात्मा का सानिध्य प्राप्त करेंगे।कथा व्यास ने कहा कि पूरे संसार का भरण पोषण परमात्मा करते हैं वही जगत के भरता है।गोविंद जी जिनको सारा जग समरण करता है वह जगत के भरतार हैं।मनुष्य को सांसारिक चीजों से मोह नहीं करना चाहिए।मोह सकल व्याधि कर मूला।आसक्ति से तमाम प्रकार के व्याधि यानि की बीमारी पैदा होती है लेकिन सांसारिक चीज जो नश्वर है उसमें अनासक्ति रखने से ईश्वर की प्राप्ति होती है।ईश्वर के प्रति आसक्ति आस्था ही सभी प्रकार के मोछ का साधन है।इसलिए मानव मात्र को ईश्वर की भक्ति में अपना अमूल्य समय लगाना चाहिए जीवन अनमोल है और यह भी एक यात्रा है यात्रा का पड़ाव सद्गति ईश्वर की भक्ति से ही होता है इसलिए अच्छे कर्म करना चाहिए बुरे काम को जितनी जल्दी हो त्याग क्या कर देना चाहिए।कार्यक्रम में राधेश्याम,राज किशोर कसौधन,अजय कुमार व मिथुन कसौधन आदि का सराहनीय योगदान रहा है।

     भजन बिना नर सोहै कैसे।लवण बिना बहु ब्यनजन जैसे,श्रीमद भागवत कथा के 6 वे दिवस कथा ब्यास जी ने ईश्वर भक्ति,भजन की महत्ता पर बल दिया.                                                                                          भेलसर(अयोध्या)मोहल्ला काजीपुरा रुदौली में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 6 वे दिवस श्री मता कसौधन द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत  कथा में कथा व्यास रोहित जी महाराज ने कहा जिस प्रकार बिना भजन नर अच्छा नहीं लगता है वैसे लवण बिना कितना भी सुंदर भोजन बना हो वह व्यर्थ लगता है।मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए जब हम अपना ध्यान परमात्मा में लगाये तो जीवन सार्थक हो गायेगा।आवागमन के बंधन से मुक्ति होकर परमात्मा का सानिध्य प्राप्त करेंगे।कथा व्यास ने कहा कि पूरे संसार का भरण पोषण परमात्मा करते हैं वही जगत के भरता है।गोविंद जी जिनको सारा जग समरण करता है वह जगत के भरतार हैं।मनुष्य को सांसारिक चीजों से मोह नहीं करना चाहिए।मोह सकल व्याधि कर मूला।आसक्ति से तमाम प्रकार के व्याधि यानि की बीमारी पैदा होती है लेकिन सांसारिक चीज जो नश्वर है उसमें अनासक्ति रखने से ईश्वर की प्राप्ति होती है।ईश्वर के प्रति आसक्ति आस्था ही सभी प्रकार के मोछ का साधन है।इसलिए मानव मात्र को ईश्वर की भक्ति में अपना अमूल्य समय लगाना चाहिए जीवन अनमोल है और यह भी एक यात्रा है यात्रा का पड़ाव सद्गति ईश्वर की भक्ति से ही होता है इसलिए अच्छे कर्म करना चाहिए बुरे काम को जितनी जल्दी हो त्याग क्या कर देना चाहिए।कार्यक्रम में राधेश्याम,राज किशोर कसौधन,अजय कुमार व मिथुन कसौधन आदि का सराहनीय योगदान रहा है।