त्वरित ,सुलभ न्याय को बनी समिति ,बृजेश पाठक अध्यक्ष

      प्रदेश में वादों की संख्या बढ़ने और निस्तारण में देरी से आए दिन वाद कार्यों को हो रही परेशानी पर सरकार गंभीर है. वर्तमान समय प्रदेश में 40 लाख के करीब मुकदमें लंबित चल रहे हैं. प्रायः देखा जाता है कि सिविल मामलों में जब तक दोनों पक्ष नहीं आते सुनवाई नहीं हो पाती है. कई मामलों में कुछ पक्ष तारीख पर तारीख लेकर मामले को लंबित रखने की कोशिश करते हैं और कोई जल्द निपटाना चाहता है कोर्ट एक पक्ष के ना आने पर एक पक्षी फैसला सुनाती है तो दूसरा पक्ष अपील पर चला जाता है. वही न्यायालय न्याय हित में दूसरे पक्ष को भी सुनकर निर्णय का आदेश करती है इससे न्याय में देरी होती है. मुख्यमंत्री से परामर्श के बाद न्याय विभाग ने आम लोगों को सस्ता सुलभ व त्वरित न्याय दिलाने के लिए क्या-क्या कदम अपेक्षित है. मुख्यमंत्री ने इन समस्याओं का अध्ययन कर सलाह देने के लिए न्याय मंत्री की अध्यक्षता में एक परामर्श समिति का गठन किया है यह समिति उपाय सुझाए की कि किस-किस स्तर पर क्या क्या कदम उठाने की जरूरत है.


न्याय मंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति में प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे, प्रमुख सचिव विधान परिषद राजेश सिंह प्रमुख सचिव न्याय जेपी सिंह द्वितीय, उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता अभिनव त्रिवेदी शामिल हैं प्रमुख सचिव न्याय समिति के सदस्य सचिव बनाए गए हैं.