ख़िरके की ज़ियारत के साथ उर्स सम्पन्न


  -अब्दुल जब्बार 


       भेलसर(अयोध्या)603 वें उर्स शेख उल आलम में रात भर चली महफ़िल ए समह मे देश की बड़ी दरगाहों के सज्जादा नशीन उपस्थित थे लोगो की भीड़ शाम से इकठ्ठा होना शुरू हुई तो दूसरे दिन ग़ुस्ल तक डटी रही।सुबह चार बजे सज्जादा नशीन व मुतवल्ली शाह अम्मार अहमद अहमद नैय्यर मियाँ ने ख़ानक़ाह शेख उल आलम में गागर पर फातेहा कर के पहले कुल की रस्म अदा की उसके बाद शेरवानी की रस्म अदा की गई।इस रस्म का इतिहास है कि मख्दूम साहब के ऊपर एक कलाम सुन कर वज्द का आलम हो गया तब शैखुल आलम के पास जो कुछ भी था वह उतार के कलाम सुनाने वाले को दे दिया था।वही रस्म आज तक चली आ रही है सुबह छह बजे सज्जादा नशीन नैय्यर मियाँ ने दरगाह शरीफ में स्थित मख्दूम साहब की मजार का ग़ुस्ल इत्र पोषी किया।ग़ुस्ल के मौके पर ज़ायरीनों का सुबह इतनी ठंड होने के बावजूद लोगों का हुजूम था जो अपने हाथों में केवड़ा लिए आस्ताने के ऊपर छिड़क रहे थे।यह दृश्य देखने लायक था ऐसा प्रतीत हो रहा था कि बारिश हो रही है।दोपहर दो बजे ख़िरके शरीफ की महफ़िल ख़ानक़ाह में सज्जादा नशीन नैय्यर मियाँ की सदारत में हुई।दूसरे कुल का फातेहा हुआ उसके बाद मख्दूम साहब के ख़िरके शरीफ(पवित्र वस्त्र)की श्रद्धालुओं को नैय्यर मियाँ ने ज़ियारत कराई।ज़ियारत के वक़्त ख़ानक़ाह और दरगाह में हर तरफ नूर और रौनक का माहौल था लोग उमड़ पड़े ज़ियारत के लिए।उर्स में देश के कोने कोने से बड़ी संख्या में लोग हाज़री देने आते है।इस बार नैय्यर मियाँ के मुरीदीन काफी बड़ी संख्या में उर्स में शरीक हुए।ख़िरके की ज़ियारत के साथ उर्स सम्पन्न हो गया मेला अनवरत चलता रहेगा।