कोटेदारों द्वारा वितरण में भ्रष्टाचार

खाद एवं आपूर्ति मथुरा के महावन तहसील के अंतर्गत ब्लॉक हराया ग्राम पंचायत कारब के कोटेदारों द्वारा हो रहे अन्य वितरण में भ्रष्टाचार का मामला.


मथुरा,5 जनवरी, जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उत्तर प्रदेश को भ्रष्ट प्रदेश से मुक्त करने के लिए प्रत्येक विभागों में बायोमेट्रिक इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी लेकर आ रही है वही विभागों के शातिर कर्मचारी और वेंडर उस टेक्नोलॉजी को ध्वस्त करने में और भ्रष्टाचार को बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं मामला है खाद्य एवं  आपूर्ति  विभाग मथुरा जिले का जहां महावन तहसील के अंतर्गत ब्लॉक राया ग्राम पंचायत कारब का जहां ग्राम पंचायत कारक में खाद्य एवं आपूर्ति मथुरा विभाग द्वारा आवंटित खाद वितरण कोटेदार रामकिशन , राजकुमार दिगंबर सिंह द्वारा लगातार प्रत्येक राशन कार्ड धारक के अंकित सदस्यों के अनुपात में एक यूनिट (एक सदस्य) कम राशन वितरण कर रहे हैं.



( जैसे कि यदि राशन कार्ड में कुल सदस्यों की संख्या साथ है तो राशन वह मात्र 6 सदस्यों का दे रहे हैं ) ऐसा जब पता चला तो हमने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से मामले की हकीकत को विभाग की ओर से जानना चाहा तो शिकायतकर्ता को किसी विभागीय कर्मचारी का फोन ना आकर सीधे भ्रष्टाचार में आरोपी कोटेदार का फोन आता है और कहता है कि आपने मेरी शिकायत की है बताइए क्या समस्या है जब हमारे द्वारा यह पूछने पर कि गोपनीय विभागीय शिकायत की जानकारी आपको कैसे मिली और मेरा नंबर किसने दिया तो आरोपी कोटेदार बताता है कि सप्लाई स्पेक्टर महावन तहसील प्रीति सिंह चौहान ने आपसे बात करने के लिए कहा है शिकायत के बाद भी लगातार अनाज वितरण में घटतौली को लगातार होते पाने पर शिकायतकर्ता ने सप्लाई स्पेक्टर प्रीति सिंह चौहान से इस प्रकरण में बात करने की कोशिश की तो सप्लाई स्पेक्टर भड़क उठी और उल्टा हमें भला बुरा कहते हुए कुछ भी कर लो कह कर धमकी दे डाली सप्लाई स्पेक्टर केस गैर जिम्मेदारी भरी बातों से यही प्रतीत होता है कि इस भ्रष्टाचार में कहीं ना कहीं उनकी भी संगलिप्तता ज़ाहिर होती हैं सप्लाई स्पेक्टर प्रीति चौहान की इस बदजुबानी की शिकायत बी. सारस्वत ने खाद्य एवं आपूर्ति अपार आयुक्त अनिल दुबे से की तो अपार आयुक्त ने प्रीति सिंह चौहान पर कारवाही करने की बात कही है अब यह देखना दिलचस्प होगा की उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारियों के संरक्षण में कोटेदारों पर कोई दंडात्मक कार्यवाही करती है या यूं ही नाक के नीचे हो रहे भ्रष्टाचार पर आंखें मूंद कर प्रशासन बैठता है.