सिलेंडर बहुत महंगा है, पेट पालें या सिलेंडर ...?

      शाहजहांपुर कलान खजूरी प्रधानमंत्री उज्जवल योजना के तहत जो गरीबों को सिलेंडर वितरित किए गए अब काफी घरों में सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।क्योंकि 'सिलेंडर बहुत महंगा है, हम गरीब लोग कहां से भरा पाएंगे।' इतना कहते हुए औरतें चूल्हे पर खाना पका रही है।


 वहीं सरकार प्रदूषण की बात करती है फिर इस धुएं से क्या ऑक्सीजन निकलती है उन्‍हें उज्ज्वला योजना के तहत 8 महीने पहले ही गैस सिलेंडर मिला था, जोकि घर के एक कोने में खाली पड़ा है।


     उत्‍तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के खजुरी गांव की रहने वाली शकुंतला रानी बिटिया घर संभालती हैं और उनके पति मजदूर हैं, जिनकी कमाई दिन के 200 से 250 रुपए तक होती है, वो भी तब जब काम मिल जाए। रानी बिटिया शकुंतला बताती हैं, 'एक आदमी की कमाई पर 6 लोगों का परिवार पल रहा है। अब इस कमाई में या तो पेट पाल लें या सिलेंडर ही भरवा लें।'


      यह कहानी केवल शकुंतला रानी बिटिया की नहीं है। रानी बिटिया जैसी बहुत सी गृहण‍ियां जिन्‍हें 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना  के तहत सिलेंडर मिले हैं, वो फिर से लकड़ी से चूल्‍हा जला रही हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक,pm के तहत जिन लोगों को एलपीजी गैस कनेक्शन मिले हैं, वे अपने सिलेंडर को नियमित रूप से भरवा नहीं रहे हैं।