उ0प्र0 पुलिस और फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना के विधेयक का आलेख अनुमोदित

लखनऊ: 25/02/2020,  उ0प्र0 पुलिस और फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना के विधेयक का आलेख अनुमोदित जनपद लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस और फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विधानमण्डल के दोनों सदनों में लाये जान  वाले उत्तर प्रदेश पुलिस और फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 के आलेख को स्वीकृति प्रदान की गई। ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश एक बड़े भू-भाग में स्थापित है, जिसमें वर्तमान में 75 जनपद हैं। पुलिस प्रणाली के अनुसार इन 75 जनपदों को 8 जोन एवं 18 परिक्षेत्रों में विभक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में जी0आर0पी0 व प्रशिक्षण जोन, पुलिस प्रशिक्षण संस्थान, 05 फोरंेसिक साइंस प्रयोगशालाएं - जनपद लखनऊ, आगरा, वाराणसी, गाजियाबाद व मुरादाबाद में स्थापित हैं तथा 06 फोरंेसिक साइंस प्रयोगशालाएं-जनपद प्रयागराज, गोरखपुर, कन्नौज, अलीगढ़, गोण्डा व झांसी में स्थापित किये जाने की कार्यवाही प्रचलित है।
वर्तमान में स्थापित फोरंेसिक साइंस प्रयोगशालाओं मंे उपलब्ध जनशक्ति के सापेक्ष परीक्षण हेतु अधिक प्रदर्शों के प्राप्त होने क  कारण प्रदेश में लम्बित मामलों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। पुलिस और फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना हो जाने से राष्ट्रीय एव  अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों में समन्वय के साथ-साथ फोरंेसिक साइंस में डिग्री प्रदान किया जाना सम्भव हो सकेगा। संस्थान में फोरेंसिक साइंस के वैज्ञानिक तैयार होंगे, जिससे प्रदेश में प्रदर्शाें का शीघ्रता से परीक्षण सम्भव हो सकेगा। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त भारत के राज्यों एवं पड़ोसी देश नेपाल, भूटान,मालद्वीप, श्रीलंका इत्यादि के छात्र फोरेंसिक साइंस के विभिन्न विषयों में ज्ञान अर्जित कर सकेंगे। इन सभी विषयों के लिए राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, न्याय पालिका, पुलिस, वैज्ञानिक, समाजशास्त्री इत्यादि के व्यक्ति भी इस संस्थान से प्रशिक्षण व विशेष अधिनियमों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। विश्वविद्यालय की स्थापना से गुणवत्ता एवं शोधपरक शिक्षा के साथ
स्किल डेवलपमेन्ट का अवसर प्राप्त होगा तथा शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर रोजगार
सृजित होगा।

लम्बित ब्याज/अर्थदण्ड माफी योजना
उ0प्र0 व्यापार कर अधिनियम-1948, केन्द्रीय बिक्री कर
अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979
(मनोरंजन कर), उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम-2007, उत्तर प्रदेश मूल्य
संवर्धित कर अधिनियम-2008 (वैट) एवं उत्तर प्रदेश केबिल टेलिविजन नेटवर्क
(प्रदर्शन) नियमावली-1997 में दिनांक 31 मार्च, 2019 तक निर्धारित समस्त
आदेशों से सृजित मांग पर लम्बित ब्याज/अर्थदण्ड माफी योजना लागू करने का
निर्णय लिया गया है।
मूल नियम 56 (ई) के परंतुक को विलोपित करने के सम्बन्ध में
मूल नियम 56 (ई) के परंतुक को विलोपित किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश
फन्डामेन्टल रूल 56 (संशोधन और विधिमान्यकरण), विधेयक 2020 को
विधान मण्डल के समक्ष पुरः स्थापित/पारित कराकर अधिनियमित करने का
निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि ‘उत्तर प्रदेश फण्डामेण्डटल रूल्स 56 (संशोधन)
अधिनियम, 1976 के माध्यम से वित्तीय हस्तपुस्तिका खण्ड-2 भाग-2 से 4
के मूल नियम-56 (ई) में परंतुक जोड़ते हुए यह प्राविधान किया गया कि
ऐसे सरकारी सेवक जो स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त होते हैं या जिन्हें स्वैच्छिक
रूप से सेवानिवृत्त होने के लिए अनुज्ञा प्रदान की जाती है, उन्हें पेंशन एवं
उपादान हेतु कुल 05 वर्ष अथवा उनकी अधिवर्षता आयु तक अवशेष सेवा
अवधि, दोनों में से जो कम हो, के बराबर अतिरिक्त सेवा का लाभ नियुक्त
प्राधिकारी द्वारा अनुमन्य किया जा सकता है। 
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वेतन समिति उत्तर प्रदेश, 2008 की संस्तुतियों को स्वीकार किये जाने
के फलस्वरूप वित्त (सामान्य) अनुभाग-3 से निर्गत शासनादेश दिनांक 08
सितम्बर, 2008 (यथा संशोधित) के प्रस्तर-6 द्वारा पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा
की गणना व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में अतिरिक्त सेवा को पेंशन हेतु अर्हकारी
सेवा में गणना की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। उक्त शासनादेश में ही
यह प्राविधान किया गया कि संबंधित नियम तद्नुसार संशोधित समझा जाएगा।
यह औचित्यपूर्ण पाया गया है कि शासनादेश दिनांक 08 दिसम्बर,
2008 के प्राविधानों को देखते हुए इससे संबंधित मूल नियम-56 में अपेक्षित
संशोधन भी कर दिया जाए। चंूकि मूल नियम 56 (ई) का परन्तुक उ0प्र0
फण्डामेण्टल रूल्स, 56 (संशोधन) अधिनियम 1976 (उ0प्र0 अधिनियम
संख्या-33, 1976) द्वारा जोड़ा गया है, अतः मूल नियम 56 (ई) के परंतुक
को विलोपित किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश फन्डामेन्टल रूल 56 (संशोधन और
विधिमान्यकरण), विधेयक 2020 को विधान मण्डल के समक्ष पुरः
स्थापित/पारिक कराकर अधिनियमित कराने का निर्णय लिया गया है।
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नई दिल्ली स्थित उ0प्र0 सरकार क  कार्यालयों हेत  लीज पर लिये गये
एक अनावासीय (कार्यालय) भवन के सम्बन्ध मे 
नई दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यालयों हेतु लीज पर लिये
गये सम्मिलित रूप से एक अनावासीय (कार्यालय) भवन की आन्तरिक
साज-सज्जा का कार्य कराये जाने हेतु स्थानिक आयुक्त, उ0प्र0 शासन, नई
दिल्ली को अधिकृत करते हुए उ0प्र0 राजकीय निर्माण निगम लि0 को
कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
इस कार्य हेतु 636.60 लाख रुपये $ जी0एस0टी0 (नियमानुसार देय)
की लागत आंकलित की गयी है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में उक्त
कार्यालय भवन की आन्तरिक साज-सज्जा का कार्य प्रारम्भ कर आगामी
वित्तीय वर्ष 2020-21 में पूर्ण कर लिया जाएगा।
इस कार्य के पूर्ण होने पर नई दिल्ली स्थित प्रदेश सरकार के सभी
कार्यालय एक ही स्थान पर स्थापित हो जाने से वर्तमान में प्रतिमाह किराये 
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के रूप म  प्रदेश सरकार द्वारा भुगतान की जा रही धनराशि 31,59,263
रुपये (रुपये इक्तीस लाख उन्सठ हजार दो सौ तिरसठ मात्र) की बचत होगी।
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बबेरू जनपद बांदा में बस स्टेशन के निर्माण हेतु भूमि के सम्बन्ध में
जनपद बांदा की विधान सभा बबेरू में मुख्यमंत्री जी की घोषणा स 
आच्छादित बस स्टेशन के निर्माण हेतु ग्राम बबेरू देहात (नॉन जेड0ए0 एरिया)
जनपद बांदा की कुल 0.748 हेक्टेयर भूमि को परिवहन विभाग के पक्ष में
निःशुल्क हस्तांतरित/आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।
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राज्य आयुष विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश विध यक 2020 का  राज्य विधान
मण्डल म  पुरःस्थापित/पारित कराकर अधिनियमित किये जान  का निर्णय
राज्य आयुष विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश विधेयक 2020 को राज्य विधान
मण्डल के वर्तमान सत्र में पुरःस्थापित/पारित कराकर अधिनियमित किये जाने
का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में आयुष विभाग के अन्तर्गत
आयुर्वेद निदेशालय में 08 राजकीय, 59 निजी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं
चिकित्सालय, यूनानी निदेशालय में 02 राजकीय एव  13 निजी यूनानी
महाविद्यालय एव  चिकित्सालय तथा होम्योपैथ निदेशालय में 09 राजकीय एवं
03 निजी होम्योपैथिक महाविद्यालय एव  चिकित्सालय, संचालित हैं, जो राज्य
के अधिकारिता प्राप्त क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से सम्बद्ध है।
उच्च शिक्षा के सामान्य विश्वविद्यालयों की चिकित्सा क्षेत्र में र्कोइ 
विशेषज्ञता नहीं होती है। इस कारण वह इन संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं
रख पाते हैं। आयुर्व द/यूनानी/होम्योपैथ महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों एव  इनकी
परीक्षा के स्तर में एकरूपता नहीं हो पाती है। अतः उपरोक्त समस्या के
निराकरण एव  प्रदेश के आयुर्वेद/यूनानी/होम्योपैथ महाविद्यालयों में एक समान
पाठ्यक्रम व शैक्षणिक कैलेण्डर लागू किये जाने, पारदर्शिता बनाये रखने तथा
उच्च कोटि की चिकित्सा शिक्षा एव  शोध कार्य सुविधा सुनिश्चित किये जाने हेत  
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राज्य आयुष विश्वविद्यालय उ0प्र0 की स्थापना किये जाने का निर्णय लिया
गया है। इससे प्रदेश में भारतीय चिकित्सा शिक्षा पद्धतियों का समुचित विकास
हो सकेगा तथा चिकित्सा जगत में उपचार एव  अनुसंधान हेतु एक सकारात्मक
वातावरण का निर्माण किया जा सकेगा। इस प्रकार सभी महाविद्यालयों को एक
ही विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किये जाने के उपरान्त उक्त महाविद्यालयों म 
संचालित पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं निर्धारित समयावधि में पारदर्शी तरीके से
कराई जा सकेगी।
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प्रदेश के ब न्देलखण्ड क्ष त्र, विन्ध्य क्षेत्र तथा गुणता प रभावित ग रामों मे 
पेयजल योजना के क्रियान्वयन क  सम्बन्ध मे 
बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र की समस्त आबादी तथा आर्सेनिक/फ्लोराइड
एव  जापानी इन्सेफ्लाइटिस (जे0ई0)/एक्यूट इन्सेफ्लाइटिस सिंड्रोम (ए0ई0एस0)
से ग्रस्त समस्त आबादी को प्रथमतः चरणबद्ध रूप से शुद्ध पाइप पेयजल
परियोजना से आच्छादित किया जाना है।
योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु बुन्देलखण्ड के 07 एवं विन्ध्य क्षेत्र के 02
अर्थात् कुल 09 जनपदों की कुल 545 डी0पी0आर0 तैयार करा ली गयी हैं,
जिनकी कुल लागत 15722.89 करोड़ रुपये आंकलित है। बुन्देलखण्ड/विन्ध्य
क्षेत्र के विभिन्न जनपदों के ग्रामों में पेयजल आपूर्ति हेतु परियोजना के निर्माण
के निमित्त कार्यदायी फर्माें के माध्यम से कुल विरचित 545 आगणनों को
अवलोकन हेतु प्रस्तुत किया गया है। विरचित आगणनों में से 200 करोड़
रुपये से अधिक लागत की कुल 37 परियोजनाओं में स  व्यय वित्त समिति
द्वारा अब तक अनुमोदित कुल 13 परियोजनाओं की मूल्यांकित लागत पर
अनुमोदन प्रदान किया गया है।
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ना एडा भवन विनियमावली, 2010 मे  प्रस्तावित संशा धन के सम्बन्ध मे 
नोएडा में वर्तमान में यातायात घनत्व एवं भौतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की
स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए क्रय योग्य एफ0ए0आर0 को अपेक्षाकृत अधिक
दरों पर अनुमन्य किये जाने हेतु नवीन ओखला औद्योगिक विकास क्षेत्र भवन 
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(सातवां संशोधन) नियमावली, 2020 की अधिसूचना निर्गत किये जाने का
निर्णय लिया गया है। नोएडा क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता एवं इस पर
होने वाले व्यय के दृष्टिगत क्रय योग्य एफ0ए0आर0 के फैक्टर को एक
समान करते हुए 0.60 किया गया है।
क्रय योग्य एफ0ए0आर0 के फैक्टर को 0.60 किये जाने से प्राधिकरण
को अधिक राजस्व प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ  करने म 
सहायता मिलेगी।
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व्यवसाय संघ (उ0प्र0 संशा धन) विधेयक-2020 के सम्बन्ध म 
श्रमिकों के कल्याण हेतु श्रम कानूनों में उद्योगों की आवश्यकताओं,
बदलते परिवेश को देखते हुए श्रम कानूनों में व्यापक परिवर्तन की प्रक्रिया के
अन्तर्गत व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 में आवश्यक संशोधन किये जा रह 
हैं, जिसके अन्तर्गत ट्रेड यूनियन (उ0प्र0 संशोधन) विधेयक, 2017 राज्य
विधान मण्डल से पारित कराने के पश्चात मा0 राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित
कर भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा गया था। उक्त विधेयक व्यवसाय
संघ (उ0प्र0 स शोधन) विधेयक, 2017 में यह व्यवस्था की गयी थी कि
‘रजिस्ट्रीकरण हेतु सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन पत्र प्रस्तुत किये जाने पर
रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी आवेदन पत्र प्राप्त किये जाने के दिनांक से 90 दिन की
अवधि के भीतर व्यवसाय संघ को रजिस्ट्रीकृत करेगा या रजिस्ट्रीकृत करने से
इन्कार करेगा या रजिस्ट्रीकृत करने से आपतित्त करेगा।’ परन्तु भारत सरकार
ने सुझाव दिया है कि उक्त सीमा को 90 दिन के बजाय 45 दिन किया
जाय। भारत सरकार की अपेक्षानुसार व्यवसाय संघ (उ0प्र0 संशोधन) विधेयक,
2017 को भारत सरकार से वापस लिया जाना है तथा उसके स्थान पर
भारत सरकार के सुझाव के अनुसार रजिस्ट्रीकरण हेतु समय-सीमा 45 दिन
किये जाने हेतु व्यवसाय संघ (उ0प्र0 स शोधन) विधेयक, 2020 उ0प्र0 राज्य
विधान मण्डल से पारित कराकर राष्ट्रपति महोदय की अनुमति हेतु संदर्भित
किये जाने का निर्णय लिया गया है।
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विधान परिषद के सभा मण्डप क  बाहर गैलरी, पा र्टिको तथा तीनो  तलों की
गैलरी आदि के सा न्दर्यीकरण/जीर्णाेद्धार के लिए निर्माण कार्याें के आगणन में
प्रस्तावित उच्च विशिष्टिया  क  कार्या  पर अनुमा दन के सम्बन्ध में
विधान भवन की गरिमा, भव्यता एव  विशिष्टता को दृष्टिगत रखते हुए
विधान परिषद सचिवालय द्वारा विधान भवन एवं विधान परिषद के पोर्टिका ,
प्रवेश दीर्घा, अन्य दीर्घा, गलियारों के नवीनीकरण/सौन्दर्यीकरण कार्य हेतु प्रस्तुत
434.17 लाख रुपये के आगणन जिसकी लागत प्रायोजना रचना एवं
मूल्यांकन प्रभाग द्वारा 377.38 लाख रुपये $ जी0एस0टी0 आगणित की
गयी है, में सम्मिलित उच्च विशिष्टियों यथा-डेकोरेटिव वूडन फाल्स सीलिंग,
आर्मस्ट्रांग फाल्स सीलिंग, वाल पैनलिंग टफेण्ड ग्लास, आटोमेटिक डोर यूनिट
कैमरा सहित 50 एम0एम0 मोटा स्टोन जाली, मार्बल स्टोन फ्लोरिंग तथा
ऑयल पेंटिंग सम्बन्धी कार्याें को अनुमोदित किया गया।
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उ0प्र0 राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 में स शोधन के सम्बन्ध मे 
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, लखनऊ के
नाम में आंशिक रूप से परिवर्तन कर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा
विश्वविद्यालय, लखनऊ किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए उत्तर
प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 संशोधित कराया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में उर्दू, अरबी एव  फारसी भाषाओं क 
अतिरिक्त अन्य भाषाओं यथा-हिन्दी, संस्कृत, पाली, प्राकृत एव  अन्य भारतीय
भाषाओं का प्रचलन साहित्यिक एव  सांस्कृतिक अध्ययन-अध्यापन एवं शोध में
सम्मिलित है।
भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त विदेशी भाषाओं में प्रमुख अंग्रेजी भाषा के
अतिरिक्त फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी अन्य विदेशी भाषाओं का भी
अध्ययन-अध्यापन, रोजगार एव  ज्ञान-विज्ञान के विकास हेतु वर्तमान वैश्विक
आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा कोई भाषा विश्वविद्यालय स्थापित नहीं
है। ‘ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, लखनऊ’ 
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विभिन्न भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन तथा शोध के उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति
हेतु एक उपयोगी केन्द्र के रूप में स्थापित किये जाने पर प्राच्य भारतीय एवं
विदेशी भाषाओं से सम्बन्धित ज्ञान एवं विज्ञान में अभिवृद्धि के साथ-साथ इन
विधाओं में शिक्षा प्राप्त प्रदेश के युवाओं को प्राच्य भारतीय एवं विदेशी भाषाओं
पर आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित कर ख्वाजा
मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ करते हुए विश्वविद्यालय को
भाषा विश्वविद्यालय के रूप में एक वैश्विक पहचान प्रदान किये जाने क 
दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है।