अयोध्या विश्व की पहली प्रधान नगरी


                              (डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या।)
            अयोध्या04 मार्च,  संस्कार भारती, डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली एवं अयोध्या शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में लोक में राम विषय पर दिनांक 04 मार्च से 06 मार्च, 2020 तक चलने वाले कान्क्लेव का आज 04 मार्च, 2020 को उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा, अध्यक्ष श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महंत नृत्य गोपाल दास, संस्कृतिक एवं पर्यटन विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश के नीलकंठ तिवारी, संरक्षक संस्कार भारती के बाबा योगेन्द्र , महामंत्री श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के चम्पत राय, रिसीवर एवं सदस्य, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र, सदस्य महंत दिनेन्द्रदास, सदस्य अनिल मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिन्तक नरेन्द्र कोहली, कार्यक्रम की संयोजिका मालनी अवस्थी एवं अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
        कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्ष श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि भगवान राम को समझने के साथ अयोध्या को समझना चाहिए। अयोध्या विश्व की सबसे पहली सबसे प्रधान नगरी है। मनु ने अयोध्या को बसाया, उत्तर की दिशा में सरयू बह रही है यह अयोध्या ही विश्व की पाप नाशिनी नगरी के रूप में अयोध्या को माना जाता है।
        गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कहा कि राम के बारे में विस्तार से जानना आवश्यक है। राम की कहानियां जो दादा दादी से सुनी गई है वे लोक के राम है। राम का कद इतना ऊॅचा है कि उन्हें भारत की सीमा में नहीं बांधा जाता है। विश्व का जनमानस राम को अंगीकृत किया है। बालक के जन्म पर भी राम का गायन किया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश के कण-कण में राम है। लोक केवल भारत ही नही है यह एक विस्तृत आयाम है लोक में राम हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दादी, नानी का स्थान रिक्त हो रहा है। फिर कहानियां कौन सुनायेंगा। भारत के बेटे, बेटियों में राम और सीता के अंश विद्यमान है। हमारे राम कही भी किसी से कम नही है।




      संस्कृतिक एवं पर्यटन विकास मंत्री, उत्तर प्रदेश के नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम की परिकल्पना अयोध्या में परिलक्षित है। राम राज्य की रूपरेखा वर्तमान संदर्भ में सबसे अधिक प्रासंगिक शासन प्रणाली के लिए जानी जाती है। ललित कला के सर्वाधिक प्रणेता श्रीकृष्ण रहे। इतने लम्बे कालखण्ड तक भारतीय संस्कृति जीवित रही। उसका मूलाधार जिस परम्परा एवं मूल में देखेंगे तो राम मिलेंगे।
      वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिन्तक नरेन्द्र कोहली ने कहा कि श्रीराम की परम्पराओं पर कई प्रसंग आते है इसमें तुलसी दास एवं वाल्मीकि रामायण में वर्णन मिलता है। राम प्रत्येक काल में प्रासंगिक रहे है। तुलसी के राम एवं अन्य विद्वानों के राम में कई विभिन्नताएं है सारा संकट वही आता है। जब हम राम को इतिहास माना जाता है। विवेकानन्द ने कहा था कि भारतीयों, हिन्दुओं ने अपना इतिहास कभी नही लिखा। विदेशियों ने भारत का इतिहास लिखा ताकि हम अपनी नजरों में गिर जाये। उन्होंने कहा कि अब आपकों अपना इतिहास स्वयं लिखे। अपने महापुरूषों तक जाओं और उनके मूल ग्रन्थों को अवश्य पढ़े। अपने आपको खोजना भगवान राम को खोजना है।
      महामंत्री श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के चम्पत राय ने कहा कि 1528 के बाद से रामजन्मभूमि का सघर्ष अनवरत चला। लोक कलाओं और लेखन से आज राम हमारे बीच विद्यमान है। महत्व मंदिर का है कि एक विदेशी ने हमारे आराध्य का मंदिर तोड़ दिया। गांधी की पीड़ा भी यही रही। उन्होंने कहा कि पॉच सौ वर्षों से लगातार सघर्ष के बाद हमारा सम्मान वापस मिला। देश की मिट्टी से प्यार करना होगा। गुलामी के प्रतीकों को हराना होगा इससे हमारी पीढ़ी एक सबक लेगी।
      अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में श्रीराम शोध-पीठ में राम के विभिन्न चित्रों का चित्रण राष्ट्रीय ललित कला के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। प्रभु श्रीराम मूल स्वरूप में साकार हो, सभी संभावनाओं को साकार करना होगा। 
     कार्यक्रम के पूर्व कर्नाटक के कलाकारों द्वारा यक्षगान की प्रस्तुति एवं राजस्थान के मेवाती के युसूफ खांन के समूह द्वारा राम के भजन की लोक संस्कृति के तहत वाद्ययत्रों की प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम की संयोजिका मालनी अवस्थी एवं अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेटकर किया गया। इस अवसर पर विभिन्न प्रांतों से आये प्रतिनिधिगण एवं विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो0 एसएन शुक्ल, परीक्षा नियंत्रक उमानाथ, उपकुलसचिव विनय सिंह, मुख्य नियंता प्रो0 आरएन राय, प्रो0 अशोक शुक्ल, कार्यपरिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह, श्री के0के0 मिश्र, प्रो0 के0 के0 वर्मा, प्रो0 हिमांशु शेखर सिंह, प्रो0 एसएस मिश्र, प्रो0 राजीव गौड़, डॉ0 आर0के0 सिंह, प्रो0 जसवंत सिंह, प्रो0 सिद्धार्थ शुक्ल, प्रो0 विनोद श्रीवास्तव, प्रो0 नीलम पाठक, डॉ0 गीतिका श्रीवास्तव, डॉ0 नरेश चौधरी, डॉ0 विनोद चौधरी, डॉ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी, डॉ0 विनय मिश्र, डॉ0 राजेश सिंह कुशवाहा, डॉ0 आर0एन0 पाण्डेय, श्रीश अस्थाना, डॉ0 अनिल विश्वा, इं0 अवधेश यादव, इं0 पारितोष त्रिपाठी, इं0 परिमल त्रिपाठी, इं0 रमेश मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।