भू-गर्भ जल विभाग भू-जल निकास की मात्रा के निर्धारण का प्रस्ताव केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के साथ समन्वय कर 06 माह के अन्दर प्रस्तुत करें: मुख्य सचिव


    उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन एवं नियमन) नियमावली, 2020 के तहत अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों का क्रियान्वयन शीघ्र कराया जाये।
भू-जल निकासी का आकलन करने हेतु मीटर की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाये,
ताकि मीटर में किसी भी प्रकार के टेम्परिंग की संभावना न हो।
भू-गर्भ जल विभाग भू-जल निकास की मात्रा के निर्धारण का प्रस्ताव केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के साथ समन्वय कर 06 माह के अन्दर प्रस्तुत करें,अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों का पारदर्शितापूर्ण क्रियान्यन सुनिश्चित कराने हेतु विकसित वेब-पोर्टल को आम-जन के उपयोग के दृष्टिगत और अधिक सरल किया जाए।
राज्य भू-गर्भ जल प्रबन्धन और नियामक प्राधिकरण की बैठक संपन्न।


      लखनऊ 05 मार्च,  मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि मा0 मंत्रिपरिषद से उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन एवं नियमन) नियमावली, 2020 के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान हो जाने के फलस्वरूप अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों का क्रियान्वयन शीघ्र सुनिश्चित कराया जाये, ताकि नियमावली के अन्तर्गत भू-गर्भ जल दोहन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने तथा आवेदनों के निस्तारण की कार्यवाही सुनिश्चित करायी जा सके। उन्होंने कहा कि भू-जल निकासी का आकलन करने हेतु मीटर की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाये, ताकि मीटर में किसी भी प्रकार के टेम्परिंग की संभावना न हो।
      मुख्य सचिव ने यह निर्देश आज लोक भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में राज्य भू-गर्भ जल प्रबन्धन और नियामक प्राधिकरण की बैठक में दिये। उन्होंने भू-गर्भ जल विभाग को निर्देश दिये कि भू-जल के प्रबंधन एवं नियमन हेतु भूजल के संकटग्रस्त क्षेत्रों को अधिसूचित करने की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कराये। उन्होंने यह भी कहा कि भू-गर्भ जल विभाग भू-जल के वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक तथा सामूहिक उपभोक्ता द्वारा किये जाने वाले भू-जल निकास की मात्रा के निर्धारण का प्रस्ताव केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ के साथ समन्वय कर 06 माह के अन्दर प्रस्तुत करें। अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों का पारदर्शितापूर्ण क्रियान्यन सुनिश्चित कराने हेतु किसी उपभोक्ता को नियमानुसार अधिनियम के प्राविधानों से छूट दिए जाने की प्रक्रिया को भी वेबपोर्टल पर डाला जाये।
     जिला विकास अधिकारी के स्थान पर मुख्य विकास अधिकारी को जनपदीय भू-जल प्रबंधन परिषद के सदस्य सचिव के रूप में नामित करने तथा विभागीय सदस्यों को पदनाम के साथ जनपदीय परिषद के गठन के आलेख में शामिल किये जाने के निर्देष दिए गये। यह भी निर्देश दिये गये कि जनपदीय भू-गर्भ जल प्रबंधन परिषद ही कम्पाउण्डिंग के रूप में कार्य करेगी।
      प्रमुख सचिव नमामि गंगे श्री अनुराग श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक, उ0प्र0 जल निगम श्री विकास गोठवाल, निदेशक भूगर्भ जल विभाग वी0के0उपाध्याय सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।