देशविरोधी तत्वों का खात्मा जरूरी


   


     - श्याम कुमार 


      उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उपद्रवी तत्वों के विरुद्ध कड़ा कानून बनाकर बहुत सराहनीय कार्य किया है। ये उपद्रवी तत्व देषविरोधी तत्व हैं, जो हमारे देश को दंगों की आग में झोंककर उसे तबाह कर देना चाहते हैं। ऐसे तत्वों का कठोरतापूर्वक उन्मूलन किया जाना चाहिए। योगी सरकार ने प्रदेश में ऐसे लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हेतु जो अध्यादेष लागू किया है, वैसा कानून बहुत पहले बन जाना चाहिए था।देशहित को क्षति पहुंचाने या देशहित का विरोध करने वालों के उन्मूलन के लिए योगी सरकार को अभी और भी कारगर कदम उठाने की आवष्यकता है। देशभक्ति एवं देशद्रोह की यह बहुत सीधी-सी परिभाशा है कि देशहित का पक्ष लेना देषभक्ति है और देषहित के विरुद्ध कार्य करना देषद्रोह। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता का अधिकार एवं सेकुलरवाद के नाम पर देष के हित को क्षति पहुंचाने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। अब तक दी गई वैसी छूट का   नतीजा है कि हमारे यहां ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ व ‘अवार्ड वापसी गैंग’ पनप गए तथा ‘हमें आजादी चाहिए’, ‘जिन्ना वाली आजादी चाहिए’ आदि नारे लगाए जाने लगे। कांग्रेस पार्टी का एक बड़ा नेता पाकिस्तान जाकर मोदी सरकार को गिराने के लिए सहयोग मांगने लगा तो दूसरा बड़ा कांग्रेसी नेता पाकिस्तान जाकर वहां के सेनाध्यक्ष बजवा को गले लगाने लगा। 
      मैं अनेक  वर्शाें से चेतावनी देते हुए बार-बार लिख रहा हूं कि आजादी के बाद नेहरू वंश ने अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए फर्जी सेकुलरवाद के नाम पर देश में देशद्रोही तत्वों का जो पालनपोशण किया और उन्हें तरह-तरह से संरक्षण देकर बेहद मजबूत बना दिया, उसी का नतीजा है कि आज हमारा देश जैसे ज्वालामुखी के मुहाने पर पहुंच गया है। देशद्रोही तत्व देश के कोने-कोने में फैल गए हैं तथा ‘सेकुलरवाद’, निजता के अधिकार एवं ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के नाम पर देशभर में उत्पात मचा रहे हैं। तरह-तरह के झूठ बोलकर और अफवाहें फैलाकर वे तत्व कितना भयंकर उपद्रव कर सकते हैं, इसका नमूना देश के विभिन्न हिस्सों में ‘साहीनबाग’ के रूप में सामने आ चुका है। ‘साहीनबाग’ उस कैंसर का लक्षण है, जो हमारे देश  के षरीर में प्राणघातक रूप ले चुका है। केंद्र की मोदी सरकार एवं उत्तर प्रदेष की योगी सरकार को अब समझ में आ जाना चाहिए कि फर्जी सेकुलरवाद एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में हमारे देश में देशद्रोही ताकतें कितनी हावी हैं और कितनी गहराई तक उनकी पैठ हो चुकी हैं। 
        इस विनाषपूर्ण स्थिति के लिए वस्तुतः प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं, जिन्होंने इस कैंसर को जन्म दिया। नेहरू अपने समय के ‘राहुल गांधी’ थे और उनकी मूर्खता व अदूरदर्षिता का विनाषकारी परिणाम देश भुगत रहा है। नेहरू ने सबसे बड़ा गुनाह यह किया कि उन्होंने जिन्ना की इस मजहबी मांग को स्वीकार कर लिया कि हिंदू व मुसलमान दो अलग कौमें हैं, जो एकसाथ नहीं रह सकतीं तथा उस मांग के अनुसार मजहब के नाम पर देश का बंटवारा कर दिया गया। किन्तु जब ऐसा किया गया तो उस समय दोनों देश के बीच हिंदू-मुसलिम आबादी की पूर्णरूपेण अदलाबदली कर दी जानी चाहिए थी। लेकिन नेहरू ने यह करने के बजाय साम्प्रदायिक बंटवारे की मांग तो स्वीकार कर ली, पर अपनी अनुचित उदारता एवं सेकुलरवाद के फितूर के कारण उन्होंने मुसलिम आबादी के अनुपात में देष की जमीन पाकिस्तान को सौंप देने के बावजूद आग्रह कर बड़ी संख्या में मुसलमानों को भारत में ही रोक लिया। नेहरू में यदि तनिक भी बुद्धि एवं दूरदर्षिता होती और इतिहास से सबक लेने की क्षमता होती तो वह इस तथ्य को समझ लेते कि उत्तर प्रदेष, बिहार एवं बंगाल के लगभग समस्त मुसलमानों ने पाकिस्तान के निर्माण का भरपूर समर्थन किया था, इसलिए उन्हें भारत में रोक लेना देश के भविश्य के लिए कितना अधिक खतरनाक सिद्ध होगा। नेहरू की उसी मूर्खता का परिणाम  आज कैंसर बन गया है।   
        यह आम धारणा है कि मुसलमान के रग-रग में शुरू से ही मजहबी कट्टरता कूट-कूटकर भर दी जाती है। वह बचपन से अपने सामने बकरे को निर्ममतापूर्वक हलाल होते देखता है और हिंसा का अभ्यस्त हो जाता है। अतिमजहबी होने के कारण ही टीवी-चैनलों पर अनेक बड़े मुसलिम नेता कई बार स्पश्ट रूप से घोशित कर चुके हैं कि उनके लिए मजहब पहले है, देष बाद में। इसके बिलकुल विपरीत स्थिति हिंदू की है। हिंदुत्व का मूल आधार ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ एवं ‘सर्वधर्म समभाव’ है। उसका मूल तत्व यह धारणा है कि ईष्वर एक है, जिस तक पहुंचने के अनेक भिन्न-भिन्न रास्ते हैं। कुछ हिंदुओं में यदि कट्टरता का समावेष हुआ है तो वह मुसलिम कट्टरता के अत्याचारों की प्रतिक्रिया में हुआ है। इसीलिए माना जाता है कि उदार से उदार मुसलमान भी कट्टर से कट्टर हिंदू से अधिक कट्टर होता है। 
     जब मजहब के आधार पर देश का विभाजन किया गया था, उस समय डॉ. आम्बेडकर ने साफ-साफ कहा था कि यदि भविश्य में देश में शांतिपूर्ण वातावरण रखना है तो भारत और पाकिस्तान के बीच हिन्दू-मुसलिम आबादी की पूरी तरह अदलाबदली कर दी जानी चाहिए। डॉ. आम्बेडकर ने कहा कि मुसलमानों में आक्रामक मनोवृत्ति होती है। हिंदू जातिप्रथा के कारण परस्पर संगठित नहीं होता है और बंटा रहता है। मुसलमान इसका फायदा उठाकर गुंडागर्दी किया करता है। हिंदू समाज को मुसलमानों से सदैव सतर्क रहना चाहिए। गैर मुसलमानों से एकता के लिए इसलाम में कोई जगह नहीं है। उसमें भाईचारा केवल मुसलिम समाज तक सीमित होता है तथा अन्य लोगों के प्रति घृणा  का भाव रखता है।  
      मोदी सरकार जिस समय प्रचण्ड बहुमत से सत्ता में आई थी, उसे तुरंत उसी समय देशद्रोही तत्वों के सफाए के कठोर एवं कारगर अभियान शुरू कर देना चाहिए था। देश के वैसे तमाम तत्व खुलेआम जहर उगलकर वातावरण को खराब करते रहते हैं। फेसबुक पर भी ऐसे तत्वों की भरमार रहती है। इनमें कट्टर मुसलिम ही नहीं, हिंदू नामधारी हिंदूविरोधी तत्व भी षामिल हैं। उस जमात में कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दल सम्मिलित हैं, जो वोटबैंक के लालच में कट्टरतावादी मुसलमानों की सरपरस्ती किया करते हैं। इनके सभी कृत्यों का एकमात्र उद्देष्य हिंदू-विरोध होता है तथा यह हिंदू-विरोध देश -विरोध का रूप ले लेता है। देशहित का विरोध करने में कोई संकोच नहीं किया जाता है। उदारता एवं छूट का ही नतीजा है कि अनेक हिंदू नामधारी फर्जी सेकुलरिए सरकारी नौकरी में होते हुए भी सेकुलरवाद के नाम पर खुलकर हिंदू-विरोध करते हैं और वह हिंदू-विरोध देशहित के विरोध में परिणत हो जाता है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तक में इस प्रकार के तत्व भरे हुए हैं। उस मंत्रालय का काम सरकार की नीतियों एवं कार्याें का प्रचार-प्रसार करना है। अतएव समझा जा सकता है कि ऐसे सरकारी अफसर व कर्मचारी सरकार की छवि को भीतर ही भीतर कितनी घातक क्षति पहुंचाते होंगे। उत्तर प्रदेश  के सूचना विभाग में भी ऐसे तत्वों की भरमार रही है। उस विभाग के कतिपय मुसलिम उच्चाधिकारी अवकाषग्रहण करने के उपरांत जितने जहरीले साम्प्रदायिक बयान दे रहे हैं, उनसे यह स्पश्ट होता है कि सूचना विभाग में गलत लोगों को भरती कर लिया गया था। माना जाता है कि पत्रकारिता में भी ऐसे साम्प्रदायिक लोगों ने भारी घुसपैठ कर रखी है।