हांटावायरस : नाहक अकुलाहट और भय से बचिए।

   चीन से कुछ ख़बरें एक दूसरे विषाणु हांटावायरस-संक्रमण की आ रही हैं। एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है और तीस से अधिक संक्रमण से ग्रस्त पाये गये हैं। सोशल मीडिया पर इस ख़बर से , ज़ाहिर है परेशान लोगों के अकुलाहट और बेचैनी बढ़नी ही थी। 


हांटावायरस कोई एक विषाणु नहीं है , अनेक विषाणुओं का एक समूह है। चूहों को ये विषाणु संक्रमित करते हैं , पर उनमें रोग उत्पन्न नहीं करते। ऐसा विज्ञान का मानना है कि ये विषाणु चूहों की प्रजातियों के साथ ही लाखों सालों से विकसित होते रहे हैं : यह एक क़िस्म का कोइवॉल्यूशन है। एक ऐसा साहचर्य जिसमें दोनों एक-साथ बिना किसी को हानि पहुँचाए रहा करते हैं। 


किन्तु इन संक्रमित चूहों के मल-मूत्र या लार से सम्पर्क में आने से मनुष्य में ये हांटावायरस पहुँच सकते हैं। शरीर के उनके भीतरी अंगों में इनके कारण दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं। फेफड़ों व गुर्दों को ये विषाणु अधिक प्रभावित करते हैं : हांटावायरस हेमरेजिक फ़ीवर विथ रीनल सिंड्रोम एवं हांटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम इन विषाणुओं के दो प्रमुख रोग-प्रारूप हैं। ये बीमारियाँ विरली हैं , किन्तु इनके कारण मरीज़ों की मृत्यु भी होती गयी है। 


हांटावायरस-रोगों का संक्रमण एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में होना बहुत विरल है। ऐसा न के बराबर देखा गया है। ऐसे में इन विषाणुओं का संक्रमण तभी सम्भव है , जब कोई मनुष्य किसी संक्रमित चूहे के मल , मूत्र या लार को सूँघ कर फेफड़ों में प्रविष्ट करा ले। चूहों के काटने से भी इन विषाणु-रोगों का होना पाया गया है। 


बुख़ार , बदनदर्द , खाँसी , साँस फूलना जैसे लक्षणों वाले इन रोगों के कारण मरीज़ों में ब्लड प्रेशर का गिरना , शॉक और गुर्दों का फ़ेल होना पाया जा सकता है। हांटावायरस हेमरेजिक बुख़ारों की मृत्यु दर तीस प्रतिशत से भी ऊपर पायी जा सकती है। 


हांटावायरस-सम्बन्धित संक्रमणों की मनुष्य-से-मनुष्य में पहुँचने की आशंका न के बराबर है। इसलिए वर्तमान कठिन समय में चीन में पुष्ट हुए कुछ मामलों के आधार पर यहाँ जनता को घबराये बिना कोरोना-विषाणु-सम्बन्धित पैंडेमिक के लिए अपने रोकथाम के उपायों पर पूरा अमल करते रहना चाहिए।