कोरोना और राजनीतिक दल


देश की पार्टियों, बैंक एकाउंट में है अरबों का फंड,कोई भी राजनीतिक दल पार्टी फंड क्यों नहीं कर रहा दान.


      कोरोना वायरस से जंग में प्रधानमंत्री का साथ देने के लिए पीएम केयर फंड में दान देने की होड़ लगी है। सितारों से लेकर आम आदमी तक हर कोई इसमें दान दे रहा है। यह अच्छी बात है। लेकिन, अभी तक कहीं से यह सूचना नहीं है, इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए देश के राजनीतिक दल क्या कर रहे हैं? किसी भी राजनीतिक दल ने अपने कोष यानी पार्टी फंड से कोरोना से लडऩे के लिए कितना दान दिया या फिर कितना सदुपयोग किया यह भी नहीं पता। जबकि, सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय पार्टियों के फंड में अकूत राशि है। यह धन पार्टियों ने जनता से चंदे के रूप में ही वसूला है। 
चुनाव लडऩे के लिए अमीर होना एक बड़ा पैमाना है। जिस राजनीतिक दल के पास ज्यादा पैसा होता है, वह अच्छे से चुनाव लड़ पाता है। यह एक सचाई है। इसीलिए हर चुनाव से पहले राजनीतिक चंदे के लिए पार्टियों में होड़ मचती है। 2004 से 2018 के बीच राष्ट्रीय दलों की कुल आय 8721.14 करोड़ रु. से अधिक थी। 2017-18 में भाजपा ने 553.38 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तरह गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और यूपी में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान राष्ट्रीय दलों ने 1,314.29 करोड़ रुपए का फंड जुटाया था। सबसे ज्यादा चंदा बीजेपी को 1,214.46 करोड़ रुपए मिला, जो पूरे फंड का 92.4 फीसद था। बसपा के कुल आठ बैंक खाते हैं। इनमें 669 करोड़ रुपए जमा हैं। समाजवादी पार्टी के खाते में 471 करोड़ रुपए हैं। इसी तरह कांग्रेस के बैंक खाते में 196 करोड़ रुपए, टीडीपी के पास 107 करोड़, शिवसेना के खाते में 116 करोड़ और आम आदमी पार्टी के खाते में 37.35 करोड़ रुपए जमा थे। पार्टियों ने 87 फीसदी यह पैसा चंदे से इक_ा किया है। यह आंकड़े सालभर पुराने हैं। इस साल इनकम टैक्स रिटर्न भरने के बाद वास्तविक राशि का पता चलेगा। हो सकता है यह राशि कम हो ज्यादा। लेकिन, इतना तो तय है कि कोई भी पार्टी कंगाल नहीं है। लेकिन, किसी भी दल ने जनता और अस्पताल के लिए कोई दान नहीं दिया है। 
     बहरहाल, पैसे देने से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि पैसे किस भावना के साथ दिए जा रहे हैं। जनता से लेकर जनता को ही देना मदद नहीं है। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के उप्र के 1.63 लाख बूथ अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों को कोरोना से लडऩे का मंत्र दिया है। उनका निर्देश है कि पार्टी के बूथ अध्यक्ष रोज 10 गरीबों को भोजन कराएं। आदेश मिलते ही भाजपा कोरोना सहयोग समिति गठित हो गयी है। मदद जारी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समाजवादी राहत पैकेज बांटने का अनुरोध कर रहे हैं। कार्यकर्ता अपने स्तर से प्रयासरत हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। कांग्रेस कार्यकर्ता इसके जरिए गरीबों को खाने-पीने में मदद कर रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपील जारी की है। उन्होंने पार्टी के सभी सामथ्र्यवान लोगों से लॉकडाउन में अति-जरूरतमन्दों की भरसक मदद का आहवान किया है। लब्बोलुआब यही है, पार्टियों ने अपने कार्यकर्ताओं से अपना दिल बड़ा करने की गुजारिश की है। सवाल है पार्टियोंं का दिल कब बड़ा होगा? बैंकों में जमा भारी-भरकम पार्टी फंड का इस्तेमाल इस संकट की घड़ी में नहीं तब कब? भूखों को भोजन तो सामाजिक संगठन भी करा रहे हैं। आज सबसे बड़ी जरूरत अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने की है। मास्क, साबुन और सैनेटाइजर की है। कोरोना से जंग से लंबी चली तो अर्थव्यवस्था को संभालने की है। इसके लिए कोष की जरूरत होगी। दान इन कामों के लिएचाहिए।
       पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाए जाने की बात कही थी। लेकिन, सभी पार्टियों ने इसे नकार दिया था। उन्हें मालूम था, चंदे में पारदर्शिता नहीं चलेगी। क्योंकि, पारदर्शी चंदा, मुसीबत का धंधा होगा। जब हर नेता यह कहता है कि चुनाव छोटा हो बड़ा बिना चंदे के नहीं लड़ा जाता। तब फिर जनता की मुसीबत छोटी हो बड़ी, यह आह्वान क्यों नहीं, कि वक्त का तकाजा है, जनता का चंदा जनता को एकमुश्त लौटाएं राजनीतिक दल।



 क्या आप जानते हैं ? देश मे ,545 साँसद,245 राज्यसभा सांसद ,4120 विधायक हैं।कुल मिलाकर 4910 जनप्रतिनिधि। 


    अगर यह सारे जनप्रतिनिधि मिलकर अपने व्यक्तिगत खातों मे से 5-5 लाख ₹ भारत सरकार को दे,जो इतनी बड़ी रकम भी नहीं है इन जनप्रतिनिधियों के लिए।तो भारत देश को कोरोना महामारी से लड़ने के लिए 2,455,000,000 लाख ( 2 अरब 45 करोड़ 50 लाख ) रुपये इकट्ठे हो सकते हैं।क्यों हर बार देश का मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों से ही देश की मदद की अपील की जाती है? क्या इन राजनेताओं की कोई जिम्मेदारी और जवाबदेही नहीं है भारत देश के जनता के प्रति? आखिर क्यों यह माननीय साँसद और विधायक अपनी अपनी साँसद और विधायक निधि के पैसों को ही खर्च कर ही देश के सच्चे जनप्रतिनिधि होने का प्रमाण प्रस्तुत कर अपने कर्तव्य से पल्ला झाड़ लेते है? जबकि वो पैसा जनता द्वारा ही सरकार को टैक्स के रूप मे देश को चलाने और विकास के लिए दिया जाता है। इसलिए हमारी अपने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से प्रार्थना है कि वो भारत देश के इन माननीय जनप्रतिनिधियों से यह अपील करें की वो अपने व्यक्तिगत खातों से 5-5 लाख रुपये देश की सेवा के लिए दान करें। जिससे देश की जनता को इस बिपत्ति के समय में आर्थिक व स्वास्थ्य कार्यों के लिये पैसों का इंतजाम हो सके।