पौराणिक तमसा नदी के जीर्णोद्धार के कार्यो का जिलाधिकारी लिया जायजा


       अयोध्या 13 मार्च , जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने पौराणिक तमसा नदी का उद्गम जिले के अन्तिम छोर पर स्थित विकास खण्ड मवई के लखनीपुर गाॅव, ग्राम पंचायत बसौढ़ी पहुॅचकर नदी की पौराणिकता एवं जल संरक्षण को ध्यान में रखकर नदी के जीर्णोद्धार हेतु कराये गये कार्यो का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि यहाॅ पर एक सरोवर से नदी का अभ्युदय हुआ है, तमसा नदी विकास खण्ड मवई, रूदौली, अमानीगंज, सोहावल, मिल्कीपुर, मसौधा, बीकापुर तारून, पूरा बाजार और मया बाजार से होते हुए जनपद अयोध्या से जनपद अम्बेडकरनगर की तरफ प्रवाहित होती है। तमसा नदी, गोमती नदी एवं सरयू के बीच के क्षेत्र के जल निकासी का महत्वपूर्ण अंग है। जनपद अयोध्या में तमसा नदी की कुल लम्बाई 151 कि0मी0 है। जिसमें लगभग 25 कि0मी0 के क्षेत्र में नदी विलुप्त थी एवं खेती हो रही थी जिसका जीर्णोद्धार किया गया है।
‘‘उन्होंने कहा कि कल्याणी नदी से तमसा नदी में मिलाने हेतु जहाॅ पर भी कार्य नही हुआ है वहाॅ भी किसानो की सहमति से उनके जमीन के बदले किसी अन्य जगह जमीन देकर कार्य कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि नदी की नियमित साफ-सफाई भी कराई जायेगीे।’’
   तमसा नदी अयोध्या के कुल 10 विकास खण्ड की 77 ग्राम पंचायतो को अभिसंचित करते हुए गुजरती है। तमसा नदी के जीर्णोद्धार कार्य पर योजनान्तर्गत कुल 07.15 करोड़ रूपये श्रम पर व्यय हुआ है। जिसमें मनरेगा योजना के माध्यम से लगभग 4.00 लाख मानव दिवस सृजित हो चुका है। वर्तमान में 149.11 कि0मी0 की खुदाई कार्य पूर्ण कर लिया गया है। योजनान्तर्गत इससे एक ओर श्रमिको को रोजगार उपलब्ध कराया गया है वही एक स्थाई परिसम्पत्ति का सृजन भी किया गया है। तमसा नदी जीर्णोद्धार से सिंचन क्षमता में भी वृद्धि हुई है। तमसा नदी के जीर्णेद्धार से जल संचयन एवं पुर्नभरण हो रहा है।नदीे के किनारे कराये जाने वाले वृक्षारोपण से परिस्थितकीय संतुलन हो रहा है व पर्यटन को बढ़ावा भी मिल रहा है। स्थानीय किसानो को जल भराव से निजात भी रही है। वन विभाग के द्वारा तमसा नदी के किनारे लगभग 10 सार्वजनिक स्थलो पर लगभग 70,000 पौधो के रोपण कराया गया है। साथ ही योजनान्तर्गत ग्राम पंचायत स्त्र से लगभग 1,23,043 पौधे का रोपड़ तमसा नदी के तटबन्धों पर कराया गया है।