राजस्व विभाग के प्राप्त होने वाले सन्दर्भो के प्रकार

अयोध्या 16 मार्च , अवगत कराया गया कि दिनांक: 14.03.2020 को कुल प्राप्त सन्दर्भ-81845, निस्तारित सन्दर्भ-80454 लंबित-1281 डिफाल्टर-110, आनलाइन प्रथम स्तर कुल प्राप्त-49740, निस्तारित-48569 लंबित-1075, डिफाल्टर-96 सी0एम0हेल्पलाइन प्रथम स्तर कुल प्राप्त सन्दर्भ-48004, कुल निस्तारित-45970      कुल लंबित-1951, डिफाल्टर-83, हेल्पलाइन द्वितीय स्तर कुल प्राप्त सन्दर्भ 13397, निस्तारित-13011, लंबित-379, डिफाल्टर-07, तृतीय स्तर कुल प्राप्त-4775, निस्तारित-4631, लंबित-126, डिफाल्टर-18, सी0एम0हेल्पलाइन चतुर्थ स्तर कुल प्राप्त सन्दर्भ-03, निस्तारित-0, लंबित-03, डिफाल्टर-0 हंै।
    मुख्य सचिव महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लोक शिकायत अनुभाग-5, लखनऊ के विस्तृत निर्देश संख्या 1/2020/129/चैतींस-लो0शि0-लो0शि0-05/2020-05-लो0शि0/2019 दिनांक: 17 फरवरी, 2020 के सम्बन्ध में अवगत कराया गया कि उक्त शासनादेश डिस्ट्रिक्ट एडमिन गु्रप के माध्यम से तथा इस कार्यालय के पच संख्या 1349/एसटी/गोप0कक्ष/आईजीआरएस-विस्तृत शासनादेश/2020 दिनांक:  20 फरवरी, 2020 भेजा जा चुका है किन्तु जानकारी करने पर अधिकांश अधिकारी द्वारा इस बात को स्वीकार किया गया कि  शासनादेश का अवलोकन नहीं किया गया है। मेरे द्वारा उक्त बैठक में शासनादेश के सम्बन्ध में प्राप्त निर्देशों को उपस्थित समस्त अधिकारियों को पढ़कर बताया गया।


राजस्व विभाग के प्राप्त होने वाले सन्दर्भो के प्रकार-

1. अपनी निजी भूमि की पैमाइश,
2. ग्राम समाज, बंजर, पशुचर, चकरोड, नाली,  तालाब आदि की भूमि पर अतिक्रमण/अवैध कब्जा
3. न्यायालय में विचाराधीन वाद।
     आवेदक द्वारा अपने निजी भूमि की पैमाइश में यह लिखा जाना कि अमुक प्रकरण की जांच अमुक दिनांक  को की गयी आवेदक अपने निजी भूमि की पैमाइश कराना चाहता है। मौके पर समझोैते के आधार पर पैमाइश कराने का प्रयास किया गया किन्तु पक्ष सहमत नहीं हुए ग्राम में उपस्थित 02 व्यक्तियों के हस्ताक्षर करा लिया गया है। मौके पर उपस्थित आवेदक को अवगत करा दिया गया कि उ0 प्र0 राजस्व संहिता 2006 की धारा-24 के अन्तर्गत उप जिलाधिकारी के न्यायालय में वाद योजित कर अनुमोष प्राप्त करें। अतः अनुरोध है कि कृपया इसे निक्षेपित करने का कष्ट करें। इसी प्रकार ग्राम समाज आदि की भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, प्रथम प्रयास करें कि अतिक्रमण हटवा दिया जाय। यदि किसी कारण वश अतिक्रमण नहीं हटवा पाते हंै, तो उ0 प्र0 राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अन्तर्गत बेदखली का वाद योजित कराकर उसका वाद संख्या, नियत तिथि सहित आख्या दी जायेगी। अतिक्रमण वाले प्रकरणों की प्रत्येक आख्या के साथ नजरी नक्शा, स्पाट मेमो तथा जांच के समय उपस्थित 02 गवाहान के हस्ताक्षर अवश्य कराये जाय। इसके पश्चात् आख्या में यह लिखा जाय कि नवीनतम शासनादेश दिनांक 17.02.2020 में न्यायालय में विचाराधीन वाद को फीडबैक से पृथक् किया गया है। चूॅकि प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है। उच्चाधिकारी सन्दर्भो के आनलाइन कमेंट पर विशेष ध्यान देते है और लखनऊ में आईजीआरएस सेल में कार्य रहे व्यक्तियों को यह बताना आवश्यक है कि कौन सा प्रकरण किस प्रवृत्ति का है और नवीनतम शासनादेश में कौन से सन्दर्भ पर फीडबैक लिया जाना है अथवा किस पर नहीं? कभी-कभी उप जिलाधिकारी स्तर से प्राप्त हो रही आख्या में यह लिख दिया जाता है कि विकास खण्ड, थाना आदि से सम्बन्धित है, इस पर नाराजगी व्यक्त की गयी। सभी उप जिलाधिकारी इस बात से अवगत है कि उनके तहसील क्षेत्रान्तर्गत ब्लाॅक, थाना, चकबन्दी, पूर्ति आदि विभाग रहते है। यदि आवश्यक लगे तो संयुक्त कार्यवाही कराकर प्रकरण का नियमानुसार निराकरण कराया जाय। इस प्रकार की प्राप्त हो रही आख्या से स्पष्ट हो रहा है कि ब्लाॅक, थाना व राजस्व में समन्वय का अभाव है। आधी-अधूरी आख्या प्राप्त होने पर उसे वापस किया जाता है, जिससे डिफाल्टर सन्दर्भो की संख्या में वृद्धि प्रत्येक दिन देखी जाती हैं। जो निस्तारण माह के अन्त में किया जाता है क्या उसे हम 27, 28 तारीख का महीना मानकर नहीं कर सकते है? भूमि विवाद के मामलों में यथा आवश्यकता राजस्व व पुलिस की संयुक्त कार्यवाही कराकर निस्तारण कराया जाय।

पुलिस विभाग से प्राप्त हो रही आख्याओं में आनलाइन कमेन्ट नहीं आ रहा है। आख्या में राजस्व विभाग से पैमाइश कराने अथवा 107/116 की कार्यवाही करने का उल्लेख कर आख्या सतही तौर पर भेजवा दी जाती है। जनसुनवाई वाले प्रकरणों में पृष्ठांकित स्पष्ट निर्देश का अनुपालन कराने हेतु भेजा निर्देशित किया गया।अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण/नगर)/समस्त क्षेत्राधिकारी को निर्देशित किया गया कि थाने से प्राप्त हो रही आख्याओं का पर्यवेक्षण करा लिया करें। यदि आख्या अपूर्ण हो, तो उसे अपने स्तर से वापस कर कार्यवाही पूर्ण कराकर अवगत करायेंगें।

सभी अधिकारी प्रकरणों का निस्तारण करते समय यदि इस बात का ध्यान रखे कि यदि अमुक आख्या में मुझे क्लोज करना हो, तो मै करूॅगा अथवा नही? तो निश्चित तौर पर अधोहस्ताक्षरी अथवा वरिष्ठ अधिकारी को फीडबैक के माध्यम से प्राप्त हो रहे सन्दर्भो में स्पेशल क्लोज का अधिकार प्रयोग करने में कोई बाधा नहीं होगी।शासनादेश के पृष्ठ संख्या 12 (घ) स्पेशल क्लोज किये गये न्यूनतम 40 सन्दर्भो का भौतिक सत्यापन भी क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान विशेष कर सम्पूर्ण समाधान दिवस के उपरान्त कराया जायेगा। पेज नं-13 भौतिक सत्यापन का माडयूल उपलब्ध है।

जिला पंचायत राज अधिकारी की शिकायतें: ग्राम प्रधान की शिकायत, शौचालय की धनराशि दिलाये जाने, परिवार रजिस्टर की नकल दिलाने, ग्राम की सफाई, सिकरेटरी द्वारा चकरोड नहीं पटाये जाने आदि से सम्बन्धित शिकायत प्राप्त होती है। ग्राम प्रधान के विरूद्ध शिकायतों में पंचायती राज नियमावली 1997 में दी गयी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए आख्या देना अनिवार्य है। यदि किसी प्रकरण में शपथ पत्र के साथ प्रार्थना पत्र दिया गया हंै, तो ग्राम प्रधान की जांच करने वाले अधिकारी को समय से जांच आख्या भेजे का निर्देश निर्गत करायें यदि नियत समय से जांच आख्या प्राप्त नहीं हो पाती है, तो आख्या में सम्बन्धित अधिकारी को पृथक् से अनुस्मारक पत्र भेजते हुए उसकी प्रति के साथ आख्या अपलोड करायी जायेगी तथा आवेदक को भी अवगत कराया जायेगा जिससे वह असंतुष्ट होने का फीडबैक कम दे सके। खास तौर सीएम हेल्पलाइन में ग्राम प्रधान की शिकायतों पर कतिपय एडीओ द्वारा ग्राम प्रधान को किलीन चिट दे दिया जा रहा है, जो उचित नहीं है। शौचालय के प्रकरणों में जिसमें धनराशि दे दी गयी तो आवेदक से हस्ताक्षर कराते हुए आख्या दिया जाय तथा जिनमें धनराशि नहीं दिलायी जा सकी उसके सार्थक कारण अवश्य लिखे जाय। सीएम हेल्पलाइन प्रथम स्तर के अधिकारी एडीओ है वे अधिक से अधिक शिकायतकर्ता को निस्तारण आख्या से अवगत कराने का उल्लेख करते हुए आख्या देगें। जिन प्रकरणों मे पटाई करायी जा सकती तो कराकर अवगत करायेगें। विकास खण्ड पर आवास की मांग अथवा चकरोड की पटाई आदि की शिकायते आती है। जिनका आवास दिलाया जा सकता है, उन्हें लाभान्वित कराया जाय अथवा अपात्र है तो अपात्र होने का सार्थक कारण (यदि पक्का मकान कहते है तो मकान का फोटोग्राफ आख्या के साथ आख्या) दिया जाय।
 समाज कल्याण की छात्रवृत्ति, उप निदेशक कृषि पी एम किसान सम्मान निधि, पीओ डूडा, शहरी आवास योजना की मांग आदि के प्रकरणों में जनपद स्तर से आवेदक का डाटा बेरीफाई करा दिया गया, धनराशि प्रेषण की कार्यवाही राज्य मुख्यालय भेजने का उल्लेख रहता है। या रिजेक्ट होने का कारण सहित उल्लेख होता है। इस आख्या में यह लिखा जाना कि अमुक प्रकरण में जनपद स्तर से समस्त अपेक्षित करायी जा चुकी है, धनराशि प्रेषण राज्य मुख्यालय समाज कल्याण लखनऊ द्वारा होना है। प्रकरण मांग श्रेणी है। नवीनतम शासनादेश दिनांक 17.02.2020 में में मांग श्रेणी प्रकरणों को फीडबैक से अवमुक्त रखा गया है। यदि आनलाइन उल्लेख करेगें तो संभव है कि फीडबैक सी श्रेणी कम प्राप्त होगा। उप निदेशक कृषि की आख्या में जिन प्रकरणों में जनपद स्तर से अपेक्षित कार्यवाही करा दी गयी है। शेष कार्यवाही शासन/भारत सरकार की निर्देश पर निर्भर है, उसमें भी उक्तानुसार आख्या दी जायेगी। जिन प्रकरणांें में आधार मंगाने, लेखपाल के पास सही कराने का उल्लेख होता है, उसे नियमानुसार निराकरण कराने हेतु वापस करना पड़ रहा है। यदि आख्या सही है तो टांसफर न कर स्पेशल क्लोज किया जा सकता है। डूडा विभाग से आख्या में यह लिखा जाना कि अमुक आवेदक के प्रकरण की जांच की गयी। आवेदक का का नाम पात्रता सूची अंकित है। यदि जि0ओ0पी0एफ0एफ0एस0 पोर्टल पर अपलोड करा दिया गया है। धनराशि सीधे आवेदक के खाते में स्वतः पहुंच जायेगी। जनपद स्तर से आवेदक के प्रकरण में अपेक्षित कार्यवाही करा दी गयी है। उसमें भी उक्तानुसार आख्या दी जायेगी। जिन प्रकरणों में प्रथम किश्त दिला दी गयी है, उसका विस्तृत उल्लेख होना चाहिए यदि द्वितीय/तृतीय किश्त की धनराशि मांगी जा रही है, तो उसमें भी जनपद स्तर से अपेक्षित कार्यवाही पूर्ण होने का उल्लेख करते हुए उक्तानुसार आख्या लिखी जानी चाहिए।
 नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत/जिला पंचायत राज अधिकारी नाली नाले की सफाई वाले प्रकरणों में भी सफाई हेतु निर्देशित कर दिया गया है। टोली बनाकर सफाई करा दी जायेगी, आश्वासन वाली आख्या नहीं आनी आयेगी। स्पष्ट उल्लेख होना है कि अमुक स्थान की सफाई करा दी गयी है तथा अमुक दिनांक को शिकायतकर्ता को अवगत करा दिया गया है। नगर निगम की शिकायतों में नाली/नाले/सड़क का निर्माण आदि का प्रकरण आता है, जिसमें नगर आयुक्त की तरफ से यह उल्लेख किया जाता है कि अमुक धनराशि का आगणन तैयार करा लिया गया है। कृपया निक्षेपित करने का कष्ट करें। मेरे विचार से उसमें भी यह उल्लेख करना उचित है कि अमुक प्रकरण में इतनी धनराशि का आगणन प्राप्त हुआ है। नियमानुसार वित्तीय स्वीकृति होने/धनराशि की उपलब्धता पर उक्त कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करा दिया जायेगा। आवेदक को अमुक दिनांक को अवगत करा दिया गया है। जिन प्रकरणों में त्वरित कार्य हो सकता है, उसमें कार्य पूर्ण कराकर आख्या प्राप्त होना है।
विद्युत विभाग की शिकायते यथा:- बिजली का कनेक्शन, तार लटकने, टांसफार्मर जलने, ग्राम में विद्युतीकरण कराने, टूटे पोल को बदलने, बिजली का बिल सही कराने आदि होती है। विद्युत प्रथम/द्वितीय से तो यथा प्रयास निराकरण कराकर आख्या आती है किन्तु अधि0अभि0विद्युत मिल्कीपुर व रूदौली से आश्वासन तरीके की आख्या प्राप्त होती है जिसे वापस करने पर डिफाल्टर सन्दर्भो की संख्या में वृद्धि होती है। शायद ही कोई दिन ऐसा होगा जिसमें अधिशाषी अभियन्ता विद्युत के पोर्टल पर जिले के सबसे अधिक डिफाल्टर सन्दर्भ न हो। विद्युत विभाग के चारों खण्ड, चारो वरिष्ठ अधिकारी उसके बाद भी इतना डिफाल्टर यह प्रदर्शित करता है कि लंबित सन्दर्भो की सूची से समीक्षा/मानीटरिंग नहीं की जा रही है।
सभी अधिकारी ध्यान दे नवीनतम शासनादेश के अनुसार सभी संस्करणों के आगामी 03 दिवस में डिफाल्टर प्रदर्शित होने वाले सन्दर्भो को देखा पोर्टल पर देखा जा सकता है, उसे देखकर नियत समयसीमा के भीतर निस्तारित करायेगें। जिन अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध शिकायत होगी, उन्हें जांच हेतु नहीं भेजा जायेगा। इस बात का सभी अधिकारी विशेष ध्यान दें। गलत आख्या पाये जाने पर दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
 भौतिक सत्यापन का माडयूल मौजूद है। उसमें टीम गठन होना है। उक्त साइड पर सभी तहसीलों के साथ-साथ समस्त ग्राम का नाम अंकित है। टीम गठन में क्र0 टीम आईडी, ग्राम का नाम, काउंट, टीम लीडर का नाम, मोबाइल नंबर, टीम मेंबर का नाम, भ्रमण की तिथि अंकित होना है, जो स्पेशल क्लोज वाले प्रकरणों का भौतिक सत्यापन करेगें तथा भौतिक सत्यापन विशेष कर सम्पूर्ण समाधान दिवस के बाद होने का निर्देश है।

डिफाल्टर सन्दर्भो की स्थिति:-
      जिला गन्ना अधिकारी-50,उप जिलाधिकारी बीकापुर-43, डीपीआरओ-42, अधिशाषी अभियन्ता विद्युत कामन-34, उप जिलाधिकारी सदर-10, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर-09, उप जिलाधिकारी सोहावल-09 , उप जिलाधिकारी रूदौली-05, उप जिलाधिकारी मिल्कीपुर-05, जिला आबकारी अधिकारी-05, मुख्य विकास अधिकारी सर 05, नगर आयुक्त सर 05, मुख्य राजस्व अधिकारी- 04, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी-03 पी0ओ0डूडा-03 पीएचसीध्सीएचसी तारून-03 बीडीओ रूदौली-03 बीडीओ मसौधा- 02 जिला समाज कल्याण अधिकारी-02 एलडीएम बीओबी-02 ई0ओ0बीकापुर-02 उप निदेशक मण्डी 02 एआरएम रोडबेज-02 उप निदेशक कृषि-02 क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी-02


इसी प्रकार दिनांकरू 14, 15 व 16.03.2020 को प्रदर्शित होने वाले लंबित सन्दर्भो की स्थिति निम्नवत हैउप जिलाधिकारी मिल्कीपुर-29,  जिला पंचायत राज अधिकारी-18 उप जिलाधिकारी सदर-40 वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरध्एचओगण-46 उप जिलाधिकारी बीकापुर-26, पीओ डूडा-09 बीडीओ मसौधा-08 एलडीएम बीओबी-05 डिप्टी आरएमओ-04 बीडीओ मया-04 उप जिलाधिकारी सोहावल-04 प्रभारी अधिकारी नजूल-04,उपस्थित समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आईजीआरएस की समीक्षा नवीनतम शासनादेश का अवलोकन कर लें तथा अपने-अपने अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी के साथ विधिवत् समीक्षा कर लें तथा सन्दर्भो का गुणवत्तापरक निस्तारण नियत समयसीमा के अन्दर करायें। सभी अधिकारी प्रयास करें कि लंबित सन्दर्भो को प्रत्येक महीनें की 28 तारीख तक गुणवत्तापरक निस्तारित करा दिया जाय।