राज्यसभा में भी अड़ंगा लगाया......


         प्रदेश अध्यक्ष ना बनाए जाने से सिंधिया खार खाए तो बैठे ही थे और माना जाता है कि दिग्विजिय सिंह ने उनके राज्यसभा जाने में भी अड़ंगा लगा दिया। इसने सिंधिया के भीतर भड़की हुई आग ने घी डालने का काम किया। अब तक उनके लिए अजेय माने जाने वाले गुना में अपनी हार से वो पहले ही आहत थे और अगर अब राज्यसभा ना जा पाते तो उनका सरकारी बंगला छिनने का भी खतरा था। दिग्विजिय मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट खुद के लिए और कमलनाथ एक सीट अपने विश्वस्त दीपक सक्सेना के लिए तय कर चुके थे। दीपक सक्सेना छिंदवाड़ा से कांग्रेस विधायक रहे हैं और उन्होंने कमलनाथ के सीएम बनने के बाद ये सीट खाली कर दी थी। केवल अपने लोगों की बंदरबांट ने सिंधिया को इस हद तक नाराज कर दिया कि उन्होंने भाजपा तक में जाने का फैसला कर लिया जिसको वो जीभर कर कोसा करते थे। गुना में हुई अप्रत्याशित हार से वो पहले से सदमे में थे, क्योंकि विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही हुए उनके संसदीय क्षेत्र के एक विधानसभा उपचुनाव में तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा वहां जीतने में कामयाब नहीं हो सकी थी, जबकि शिवराज सिंह चौहान की पूरी कैबिनेट ने उधर डेरा डाला हुआ था। कहा जाता है कि गुना से सिंधिया को हराने में विरोधी गुटों ने भी अहम भूमिका निभाई।