सिंधिया राजघराने के लिए अहम हुए लालजी टंडन 

     


      दशकों तक उत्तर प्रदेश के सियासत का चेहरा रहे और अब मध्य प्रदेश के गवर्नर लालजी टंडन पर सबकी नज़र है ! ये अलग बात है कि अपने संवैधानिक पद की गरिमा का ख़्याल रखते हुए लालजी टंडन इस समय कुछ नहीं बोल रहे। पर सच तो ये है कि सिंधिया परिवार के साथ जुड़ी एक घटना में पहले भी टंडन जी संकटमोचक की भूमिका निभा चुके हैं.


बात 1980 की है। रायबरेली से इंदिरा गांधी के सामने राजमाता विजयराजे सिंधिया को उतारा गया था ! राजमाता को नामांकन के दिन एम्बेसेडर कार से लखनऊ से रायबरेली जाना था।उनके साथ जा रहे थे लालजी टंडन। अचानक एम्बेसडर के रेडियो में इस बात का समाचार प्रसारित हुआ कि राजमाता के बेटे माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा व्यक्त कर दी है.राजमाता अत्यंत दुखी हो गयीं. यहाँ तक कि ये भी सोचने लगीं कि वो रायबरेली जाएँ या नहीं। उस समय युवा लालजी टंडन ने ही अपनी समझ और व्यवहार कुशलता से उनको समझाया और शांत किया.ये बात काफ़ी पहले टंडन जी ने मुझको बतायी थी.


इतिहास ख़ुद को दोहराता है. आज उसी सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी के ज्योतिरदित्य के क़दम से उठे सियासी बवंडर के समय लालजी टंडन जी मध्य प्रदेश के राज्यपाल हैं .मध्य प्रदेश में सियासी घमासान के बीच राज्यपाल लालजी टंडन पर सबकी नज़र है !!