उ0प्र0 उपखनिज (परिहार) (उन्चासवां संशोधन) नियमावली, 2020 प्रख्यापित
मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 उपखनिज (परिहार) (उन्चासवां संशोधन) नियमावली, 2020 के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-1957 की धारा 15 में प्रदत्त शक्ति के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा उपखनिजों के खनन प्रशासन हेतु उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 1963 (यथासंशोधित) प्रख्यापित की गयी है। वर्तमान में इस नियमावली में प्रदेश में भवनों के निर्माण तथा विकास परियोजनाओं के स्थापना के अवसर पर खुदाई के दौरान निकलने वाले उपखनिजों के निस्तारण हेतु प्राविधान नहीं है। 

प्रदेश में भवनों (गैर वाणिज्यिक, निजी आवासीय भवनों को छोड़कर) तथा विकास परियोजनाओं के निर्माण के दौरान खुदाई से निकलने वाले उपखनिजों के निस्तारण की प्रक्रिया निर्धारण हेतु उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 1963 में नियम-52(ख) जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इस नियम के अनुसार उत्खनित उपखनिजों का निस्तारण जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नियमावली में निर्धारित रायल्टी दर पर निर्गत अनुज्ञा पत्र के आधार पर उसकी शर्ताें के अनुसार किया जाएगा।

आवेदन पत्र प्राप्त होने पर खान अधिकारी/खान निरीक्षक द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर उत्खनित, उपखनिज की मूल्यांकित मात्रा का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। जिलाधिकारी द्वारा आवेदन पर प्राप्त होने के एक माह के अन्दर अनुज्ञा पत्र निर्गत किया जा सकेगा। किन्तु एक माह में आवेदन पत्र निस्तारित न किये जाने पर मूल्यांकित मात्रा के आधार पर रायल्टी भुगतान किये जाने की दशा में अनुज्ञा पत्र निर्गत किया हुआ समझा जाएगा। 

इस प्राविधान से गैर वाणिज्यिक तथा निजी आवासीय भवन आच्छादित नहीं होंगे। उद्योगांे के प्रोत्साहन, भवन निर्माण व विकास परियोजनाओं को गति प्रदान तथा जनसामान्य में उपखनिजों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व प्राप्ति के दृष्टिगत जनहित में उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 1963 में नया नियम-52‘ख’ बढ़ाया गया है।