आंखों में नमी के साथ कोविड-19 की मीटिंग,योगी ने निभाया ‘राजधर्म’

        लखनऊ, वक्त करीब सुबह के 10.30 बजे का था...लोकभवन की जगह आज टीम 11 की मीटिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सरकारी आवास (5 केडी) पर होनी थी। लेकिन मन में ये सवाल बार बार उठ रहा था कि क्या मुख्यमंत्री मीटिंग करेंगे। क्योंकि बीती रात से ही अफवाहों का सिलसिला सोशल मीडिया पर आंधी की तरह उड़ रहा था। जिसमें प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी के पिता आनंद सिंह बिष्ट के स्वास्थ्य खराब होने की सूचनाएं तैर रही थीं। खैर रोज की तरह समयानुसार मीटिंग के लिए मुख्यमंत्री हॉल में आए, लेकिन आज साफ झलक रहा था कि वो अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है।


   अमूमन मुख्यमंत्री मीटिंग के दौरान चेहरे पर लगे मास्क को नीचे रखते हैं लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ। इससे चेहरे का भाव भले कुछ हद तक छिप जा रहा था,पर आंखों की उदासी,उनकी नमीं बता रही थीं कि सब कुछ ठीक नही। बावजूद इसके राजधर्म का पालन पहली प्राथमिकता पर रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समयानुसार मीटिंग शुरू की। टीम 11 के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री विचार-विमर्श और कोरोना को लेकर प्रदेश की हालात पर चर्चा करते और अधिकारियों को निर्देश भी देते रहे। 


     इसी बीच करीब 10 बजकर 44 मिनट के आसपास मीटिंग में उस व्यक्ति का आना हुआ, जिसे कम ही किसी मीटिंग में आते देखा गया है। बात मुख्यमंत्री के सबसे करीबी शख्स यानी बल्लू राय की हो रही है। बल्लू के चेहरे पर दुख का भाव झलक रहा था। बल्लू ने एक पर्ची मुख्यमंत्री को दी। इसे पढ़कर मुख्यमंत्री जी ने किसी से बात कराने का निर्देश बल्लू को दिया। बल्लू ने फोन लगाया और मुख्यमंत्री जी बात करने लगे।


    बात महज एक मिनट की रही होगी और मुख्यमंत्री ने फोन पर कहा कि वह मीटिंग के बाद फिर बात करेंगे। बल्लू चले गये मुख्यमंत्री कुछ सेकंड के लिए शांत हो गए। लेकिन फिर उन्होंने मीटिंग में अधिकारियों से सवाल-जवाब करना शुरू कर दिया। मीटिंग ठीक वैसे ही चलती रही जैसे रोजाना चलती है। 


    इस बीच सबने देखा कि मुख्यमंत्री योगी की आंखें नम हो चुकी हैं। शायद उधर से उन्हें पिता के निधन का समाचार मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने प्रदेश की जनता की सेवा सर्वोपरि रखी और कोविड से लड़ने की रणनीति बनाने की मीटिंग करते रहे। सभी को पता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री होने से पहले वो एक संन्यासी हैं, गोरक्षपीठाधीश्वर हैं। हिंदुस्तान की आवाज ग्रुप, लेकिन पिता के निधन का समाचार मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली ठीक वैसे ही चलती रही। एक तरफ जहां आंखों में नमी उनके दुख की सबूत था तो दूसरी तरफ 23 करोड़ जनता की सुरक्षा की चिंता का फर्ज। अपने पिता के निधन के बावजूद उन्होंने राजधर्म को प्राथमिकता दी। उसे निभाया। योगी आदित्यनाथ पहले भी सबसे ऊपर राजधर्म और यूपी की 23 करोड़ जनता का हित देखने को सर्वोपरि मानते रहे हैं। पिता की मृत्यु भी उन्हें अपने इस पथ से विचलित नहीं कर सकी।


         


                         अंतिम संस्कार में शामिल न होने के साथ-साथ दिया बड़ा संदेश-


      मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता है। जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता और महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीया मां, पूर्वाश्रम  से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग तिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊंगा।


  आदित्यनाथ ने अपने पिता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता है।जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनताके हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता और महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीया मां, पूर्वाश्रम  से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग तिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं।लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊंगा।



                         सत्ता पाना आसान है, मुश्किल है किसी का योगी होना-


    उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री होने से पहले योगी आदित्यनाथ एक संन्यासी हैं। गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं। बैठक में पिता के निधन का समाचार मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली ठीक वैसे ही चलती रही। एक तरफ जहां आंखों में नमी उनके दुख का सबूत था तो दूसरी तरफ 23 करोड़ जनता की सुरक्षा की चिंता। अपने पिता के निधन के बावजूद उन्होंने राजधर्म को प्राथमिकता दी। मैं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री को कोटि कोटि प्रणाम निवेदित करता हूं। अपने पूरे जीवन में ऐसा व्यक्ति नहीं देखा। सत्ता आने पर अच्छे-अच्छे लोगों का मन डगमगा जाता है किंतु यह साधु अपने कर्तव्य से कभी नहीं डिगा। इस महामारी में उत्तरप्रदेश जैसे राज्य को नियंत्रित करना कितना मुश्किल है हम सब जानते हैं। आज पिता की मृत्यु में भी योगीजी अपनों को कम भीड़ करने के लिए आग्रह कर रहे हैं। प्रणाम आपको मेरा। ईश्वर उस दिव्य आत्मा को शांति दें जिनके कुल में आपका जन्म हुआ। उत्तरप्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथजी टीम 11 के साथ मीटिंग कर रहे हैं। रोज करते हैं, आश्चर्य कैसा! नहीं, आज आश्चर्य होना चाहिए क्योंकि ये योगीजी के लिए सामान्य दिन नहीं है। उनके पिता श्री आनंद सिंह बिष्ट गोलोकवासी हो चुके हैं। एम्स से उनकी पार्थिव देह को उत्तराखंड स्थित पैतृक निवास ले जाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में भी एक बेटा बैठकर प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहा है। संत होना या गृहस्थ जीवन छोड़ना अलग बात है, अभी विषय एकाग्रचितत्ता और    कर्तव्यपरायणता का है। प्रणाम है आपको। अभी रामायण के जरिये मर्यादापुरुषोत्तम प्रभुश्रीराम के राजधर्म के बारे में सुना होगा। आज उत्तर प्रदेश में योगी के राजधर्म को देखने को मिल रहा है। नीचे योगी जी की तस्वीर है जिसमें वह भावुक दिखाई दे रहे हैं। यह वो समय था जब योगीजी कोरोना के मद्देनजर प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हित में बैठक रहे थे। तभी सूचना मिली कि पिताजी नहीं रहे। योगीजी भावुक जरूर हुए, पर मीटिंग जारी रखी। मीटिंग से निकलने के बाद देश में लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए पिता के अंतिम संस्कार में न जाने का निर्णय सुनाया। यह वही योगीजी हैं जो पांच लाख मजदूरों को रोडवेज की बसों से उनके घर तक पहुंचाते हैं। कोटा में फंसे सात हजार छात्र-छात्राओं को भी सकुशल उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम करते हैं। बेशक त्रेता युग में भगवान श्रीराम को सुना था कलयुग में योगी आदित्यनाथ को सुन रहा हूं, यह एक से ही संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यशश्वी हों.... ।