गन्ना विभाग ही उड़ा रहा गन्ना क्रय नीति की धज्जियां

      गन्ना विभाग ही उड़ा रहा गन्ना क्रय नीति की धज्जियां,रौजागांव चीनी मिल में स्थानीय किसानों को नही मिल पा रही पर्चियां,गन्ना किसान है बेहाल।


        -  जगदम्बा श्रीवास्तव 


       भेलसर(अयोध्या)रोजागांव चीनी मिल गेट के किसान पर्ची के लिए दर दर भटक रहे हैं चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हुए लगभग 130 दिन हो चुके हैं लेकिन कुछ किसानों को पेड़ी गन्ने की पर्ची अभी तक नहीं मिली।लगभग एक माह से आठवा पखवारे का दसवां कालम ही चल रहा है जिससे गनौली गेट के किसानों के साथ गन्ना विभाग व मिल शोषण कर रहा है।क्रय नीति के अनुसार एक पखवारा 15 दिन में समाप्त हो जाना चाहिए।लेकिन एक महीने में भी ना समाप्त होने से स्पष्ट है कि गन्ना क्रय नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
     सेंटरों व गेट के पखवारे एक समान नहीं चलाए जा रहे हैं सेंटरों के 11 वां 12 वां पखवारे चलाकर कुछ सेंटरों को फ्री करके बन्द करने जा रहे हैं लेकिन गनौली समिति के किसानों का 50 लाख कुंटल गन्ना खरीदने का लक्ष्य था आज तक 37 लाख कुंटल की लगभग खरीद 130 दिन में की गई है।13 लाख कुंटल की खरीद मात्र 15 दिन में होना है चूंकि 20 अप्रैल तक चीनी मिल बन्द हो जाएगी इस आधार पर चीनी मिल 15 दिन में 13 लाख कुंटल गन्ना किसानों द्वारा उपलब्ध कर पाना संभव नहीं है जबकि पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से परेशान है वहीं किसानों का गेंहू,सरसो वा अन्य फसलों की कटाई भी होनी है।गेट के किसानों को 4 पखवारे की पर्चियां 15 दिन से पहले देकर व मिल फ्री करके बन्द कर दी जाएगी ऐसी स्थिति में किसान अपना गन्ना कैसे बेंच पाएगा।
    भाकियू के प्रदेश सचिव दिनेश कुमार दूबे ने गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर उप गन्ना आयुक्त व जिला गन्ना अधिकारी अयोध्या व सचिव गनौली को कई बार अवगत कराते हुए कहा कि बड़े किसान व सामान्य वा छोटे कुछ किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा है और सूख रहा है बाहरी जनपदों के सेंटरों का गन्ना अधिक लिया जा रहा है।गनौली गेट के किसानों के साथ धोखा देकर दोहरी नीति अपनाई जा रही है एक सामान्य सेंटर व गेट का पखवारा नहीं चलाया जा रहा है जिन किसानों के पास पेडी अाटम पौधा गन्ना है उन किसानों को पेडी आटम की पर्चियां क्यों नहीं दी जा रही हैं जिन किसानों का गन्ना समाप्त हो गया है।उनकी पर्चियां बन्द कर दी जाए लेकिन गन्ना विभाग के अधिकारीगण ने चीनी मिल को लाभ देने के लिए किसानों की एक बात भी नहीं मानी किसान अपना गन्ना औने पौने दामों में बेचने को मजबूर है।श्री दूबे ने उक्त समस्याओं को जिला अधिकारी से लेकर आयुक्त तक उठाया तब तक डिप्टी सीसी व डीसीओ व मिल के कान में जुं तक नही रेंगी।रविवार को सीजीएम व जीएम से मिलकर काफी नोक झोंक के साथ घंटो वार्ता हुई तब 30 हजार से इंडेंट बढ़ाकर 60 से 80 हजार प्रतिदिन देने को कहा है।श्री दुबे ने सभी किसानों से अपील की है कि वो कॉरोना जैसी महामारी से बचने के लिए 1मीटर की दूरी का ध्यान रखकर अपना कृषि कार्य करेंगे।