मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक के निर्णय से 1509 करोड़ रु0 की धनराशि उ0प्र0 कोविड केयर फण्ड में जाएगी

  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक सम्पन्न। कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने के दृष्टिगत अनेक महत्वपूर्ण निर्णय। 

  • मुख्यमंत्री सहित समस्त मंत्रिगण के प्रतिमाह वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते तथा सचिवीय भत्ते का 30 प्रतिशत यू0पी0 कोविड केयर फण्ड में एक वर्ष तक दिया जाएगा। 

  • प्रदेश के 503 विधायकों एवं विधान परिषद सदस्यों के प्रतिमाह वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते तथा सचिवीय भत्ते का 30 प्रतिशत हर विधायक के वेतन आदि से कटकर कोविड केयर फण्ड में एक साल तक जाएगा। 

  • 17 करोड़ 50 लाख 50 हजार रु0 की धनराशि मंत्रियों तथा विधायकों के वेतन व भत्ते में कटौती करते हुए कोविड केयर फण्ड में जाएगी। 

  • विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के वर्ष 2020-21 में अस्थाई स्थगन का निर्णय। 


 

 

     लखनऊ 08 अप्रैल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज यहां वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्पन्न मंत्रिपरिषद की विशेष बैठक में कोरोना महामारी से निपटने के लिए राज्य सरकार को पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने के दृष्टिगत अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 

     मंत्रिपरिषद के विचारार्थ आज 04 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। प्रथम प्रस्ताव के क्रम में मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री जी सहित समस्त मंत्रिगण के प्रतिमाह वेतन (40 हजार रुपए) निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (50 हजार रुपए) तथा सचिवीय भत्ता (20 हजार रुपए) इस प्रकार कुल 01 लाख 10 हजार रुपए प्रतिमाह  का 30 प्रतिशत यू0पी0 कोविड केयर फण्ड में दिया जाएगा। मंत्रिमण्डल के 56 सदस्य हैं। इनके एक वर्ष के वेतन का 30 प्रतिशत अर्थात 02 करोड़ 21 लाख 76 हजार रुपए कोविड केयर फण्ड में जाएंगे। 

     एक अन्य प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश के 503 विधायकों एवं विधान परिषद सदस्यों के प्रतिमाह वेतन (25 हजार रुपए) निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (50 हजार रुपए) तथा सचिवीय भत्ता (20 हजार रुपए) कुल 95 हजार रुपए प्रतिमाह का 30 प्रतिशत हर विधायक के वेतन आदि से कटकर कोविड केयर फण्ड में एक साल तक जाएगा। यह धनराशि कुल 15 करोड़ 28 लाख 74 हजार रुपए वार्षिक होगी। इस प्रकार 17 करोड़ 50 लाख 50 हजार रुपए की धनराशि मंत्रियों तथा विधायकों के वेतन व भत्ते में कटौती करते हुए कोविड केयर फण्ड में जाएगी। 

     मंत्रिपरिषद ने विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के वर्ष 2020-21 में अस्थाई स्थगन का निर्णय लिया है। इस निर्णय से 1509 करोड़ रुपए की धनराशि उत्तर प्रदेश कोविड केयर फण्ड में जाएगी। मुख्यमंत्री जी ने विधान सभा के बजट सत्र में विधायक निधि को 03 करोड़ रुपए किए जाने की घोषणा की थी। 03 करोड़ रुपए की धनराशि को स्वीकार करते हुए उ0प्र0 कोविड केयर फण्ड में 1509 करोड़ रुपए दिए जाएंगे, जिसे आवश्यकतानुसार कोरोना महामारी से निपटने में व्यय किया जाएगा।

 

उ0प्र0 मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) अधिनियम-1981 (यथासंशोधित) की धारा-3 की उप धारा(1) में संशोधन करने का निर्णय-

 

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध) अधिनियम-1981 (यथासंशोधित) की धारा-3 की उप धारा(1) में संशोधन करने का निर्णय लिया है। निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्रीगण, मंत्रिगण, राज्यमंत्रीगण (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्यमंत्रीगण को वर्तमान में मिल रहे वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता तथा सचिवीय भत्ता (कुल 1,10,000 रुपए प्रतिमाह) में से माह अप्रैल, 2020 से माह मार्च, 2021 तक की अवधि के लिए 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।चूंकि वर्तमान में राज्य विधान मण्डल सत्र में नहीं है, इसलिए संशोधन हेतु मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध)(संशोधन) अध्यादेश-2020 के प्रख्यापन का निर्णय लिया है। निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री जी, प्रत्येक मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री अपनी पदावधि में आद्योपान्त 40 हजार रुपए प्रतिमाह के वेतन के हकदार होंगे। मुख्यमंत्री जी, प्रत्येक मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री माह अप्रैल, 2020 से माह मार्च, 2021 तक प्रतिमाह संदेय वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते तथा सचिवीय भत्ते के मात्र 70 प्रतिशत के लिए हकदार होंगे।

    प्राप्त सूचना के अनुसार वर्तमान में मुख्यमंत्री जी, प्रत्येक मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री को वेतन/भत्ते आदि के रूप में 1,64,000 रुपए प्रतिमाह प्राप्त होते हैं, जिसमें वेतन 40 हजार रुपए, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 50 हजार रुपए तथा सचिवीय भत्ता 20 हजार रुपए भी सम्मिलित है।ज्ञातव्य है कि विगत कुछ माह से पूरे देश में कोरोना महामारी (कोविड-19) के संकट का सामना केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भी अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, ताकि इस महामारी से लड़ने हेतु सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाओं/उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके तथा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के व्यक्तियों को समुचित आर्थिक सहायता/दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी जा सके, जिससे उन्हें सामान्य जीवनयापन में कठिनाई न हो। यह सुनिश्चित किए जाने हेतु राज्य सरकार के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध होना अत्यन्त आवश्यक है। इसके दृष्टिगत मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय लिया गया है।

 

उ0प्र0 राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन) अधिनियम-1980 में संशोधन करने का निर्णय-

 

     मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन) अधिनियम-1980 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल के सदस्यगण को वर्तमान में अनुमन्य वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ते तथा सचिवीय भत्ते में माह अप्रैल, 2020 से माह मार्च, 2021 तक की अवधि के लिए 30 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन) (संशोधन) अध्यादेश-2020 प्रख्यापित किया जाएगा। 

    संशोधन के उपरान्त धारा-3(1) में अनुमन्य वेतन की धनराशि 25 हजार रुपए में 7500 रुपए, धारा-4 में अनुमन्य निर्वाचन क्षेत्र भत्ते की धनराशि 50 हजार रुपए में 15 हजार रुपए तथा धारा-15 के अन्तर्गत अनुमन्य सचिवीय भत्ते 20 हजार रुपए से 06 हजार रुपए प्रतिमास अर्थात कुल 28 हजार 500 रुपए की कटौती एक वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। कटौती के पश्चात् उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल के सदस्यगण को वेतन व मासिक भत्तों के रूप में अनुमन्य 01 लाख 25 हजार रुपए की धनराशि माह अप्रैल, 2020 से मार्च, 2021 तक की अवधि हेतु घटकर 96 हजार 500 रुपए प्रतिमाह हो जाएगी। 

ज्ञातव्य है कि विगत कुछ माह से पूरे देश में कोरोना महामारी (कोविड-19) के संकट का सामना केन्द्र सरकार/राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भी अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, ताकि इस महामारी से लड़ने हेतु सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाओं/उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके तथा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के व्यक्तियों को समुचित आर्थिक सहायता/दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करायी जा सके, जिससे उन्हें सामान्य जीवनयापन में कठिनाई न हो। यह सुनिश्चित किए जाने हेतु राज्य सरकार के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध होना अत्यन्त आवश्यक है।

      कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल के सदस्यगण को वर्तमान में अनुमन्य वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता एवं सचिवीय भत्ता में माह अप्रैल, 2020 से माह मार्च, 2021 तक की अवधि हेतु 30 प्रतिशत की कटौती करने व इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन) अधिनियम-1980 में संशोधन हेतु उत्तर प्रदेश राज्य विधान मण्डल (सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन) (संशोधन) अध्यादेश-2020 के प्रख्यापन का निर्णय लिया गया है। 

 

‘विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि’ योजना के वर्ष 2020-21 में अस्थाई स्थगन का निर्णय-

 

      मंत्रिपरिषद ने ‘विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि’ योजना के वर्ष 2020-21 में अस्थाई स्थगन का निर्णय लिया है। 

प्रदेश में विधान सभा तथा विधान परिषद के सदस्यों की मांग पर उनके निर्वाचन क्षेत्रों की स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति तथा संतुलित विकास के उद्देश्य से वर्ष 1998-99 में ‘विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि’ योजना प्रारम्भ की गई थी। ‘विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि’ योजना को और प्रभावी बनाए जाने के उद्देश्य से इसमें नवीन व्यवस्थाओं को लागू किए जाने के सम्बन्ध में समय-समय पर उपबन्ध जोड़े जाते रहे हैं।

     योजना के अन्तर्गत वर्ष 2004 में ‘विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि’ के अन्तर्गत वर्ष 1998 में अनुमन्य की गई धनराशि 75 लाख रुपए को बढ़ाकर 01 करोड़ रुपए किया गया। वर्ष 2007 में इस धनराशि को 01 करोड़ रुपए को बढ़ाकर 01 करोड़ 25 लाख रुपए किया गया तथा वर्ष 2012 में इस धनराशि को 01 करोड़ 25 लाख रुपए से बढ़ाकर 01 करोड़ 50 लाख रुपए किया गया।

     वर्ष 2017 में भारत सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश में माल एवं सेवा कर अधिनियम-2017 (जी0एस0टी0) लागू किए जाने तथा विगत 06 वर्षों में विकास कार्यों से सम्बन्धित सामग्री एवं मजदूरी में अत्यधिक वृद्धि एवं विधान मण्डल के सदस्यों की मांग के दृष्टिगत मुख्यमंत्री जी द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा की दिनांक 27 मार्च, 2018 को बैठक में लिए गए निर्णय के क्रम में वर्ष 2018 में विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि के अन्तर्गत विधान मण्डल के सदस्य को उनके क्षेत्र के विकास हेतु विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि की धनराशि को बढ़ाकर 02 करोड़ 40 लाख रुपए कर दिया गया। इस उपलब्ध धनराशि 02 करोड़ 40 लाख रुपए में से सदस्य की अनुशंसा पर सम्बन्धित मुख्य विकास अधिकारी प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान 02 करोड़ रुपए तक के ही कार्यों को स्वीकृत कराते हैं। अवशेष 40 लाख रुपए की धनराशि से निर्माण कार्यों पर लगने वाले कर (जी0एस0टी0) की प्रतिपूर्ति प्रत्येक तिमाही में की जाती है।

     वर्तमान में कोविड-19 जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक महामारी घोषित किया गया है, के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा अन्य आवश्यक उपभोग सामग्री के क्रय हेतु आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से ‘उ0प्र0 कोविड केयर फण्ड’ की स्थापना की गई है तथा इसी क्रम उ0प्र0 कोविड केयर फण्ड नियमावली-2020 बनायी गई है।

     कोविड-19 से चिकित्सा क्षेत्र में उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों के सम्यक प्रबन्धन हेतु बड़ी धनराशि की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त प्रदेश को इस विषय पर भविष्य के लिए भी चिकित्सा के क्षेत्र में प्रभावी अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण तथा इससे सम्बन्धित अनुसंधान कार्याें/विश्व स्तरीय विशेषज्ञ संस्था की स्थापना आदि पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके दृष्टिगत विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि को वित्तीय वर्ष 2020-21 में अस्थाई रूप से स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।

 

उ0प्र0 आकस्मिकता निधि की वर्तमान सीमा 600 करोड़ रु0 में 600 करोड़ रु0 की वृद्धि करते हुए इसे 1200 करोड़ रु0 करने का प्रस्ताव मंजूर-

 

      मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश आकस्मिकता निधि की वर्तमान सीमा 600 करोड़ रुपए में 600 करोड़ रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 1200 करोड़ रुपए किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। वर्तमान में वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रकोप अपने चरम पर है। ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए विभिन्न स्तरों पर आवश्यक उपकरणों के क्रय तथा प्रभावित व्यक्तियों हेतु क्वारेन्टाइन कैम्प, खाद्य पदार्थ, चिकित्सीय सुविधा तथा अन्य कारकों के निवारण हेतु धनराशि की कमी होने अथवा बजट व्यवस्था न हो पाने की स्थिति में राज्य आकस्मिकता निधि से तात्कालिक रूप से धनराशि उपलब्ध कराया जाना अपरिहार्य होगा।इसके दृष्टिगत उत्तर प्रदेश आकस्मिकता निधि की वर्तमान सीमा 600 करोड़ रुपए में 600 करोड़ रुपए की वृद्धि करते हुए इसे 1200 करोड़ रुपए किए जाने का निर्णय लिया गया है। निधि में वृद्धि हेतु मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के प्रख्यापन का निर्णय लिया है।