यदि आज कांग्रेस सत्ता की सरकार होती - श्याम कुमार 

 


         आज यह सोचकर दिल कांप उठता है कि यदि वर्ष 2014 में कांग्रेस फिर सत्ता में आ गई होती और देश में मनमोहन सिंह की महाभ्रश्ट लुटेरी सरकार का शासन पुनः स्थापित हो गया होता तो कोरोना महामारी का देश पर अचानक जो प्रलय मचाने वाला भयंकर हमला हुआ है, उस स्थिति में हमारे देश की क्या दुर्दशा हुई होती ! दस वर्ष तक कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने सिद्ध कर दिया था कि पद पर बने रहने के एवज में वह किसी भी सीमा तक गिर सकते हैं। उन्होंने ‘कठपुतली प्रधानमंत्री’ बनकर देश की सत्ता पर सोनिया गांधी व नेहरू वंश के अन्य लोगों को पूरी तरह काबिज हो जाने दिया था। अब तो इस बात के तमाम प्रामाणिक विवरण सामने आ चुके हैं कि उस समय देश की सत्ता का वास्तविक संचालन प्रधानमंत्री-आवास से नहीं, बल्कि सोनिया गांधी के आवास से उनके, उनके परिवार एवं उनकी देशविनाशक फर्जी सेकुलर मंडली द्वारा किया जाता था।  


 
     जिस प्रकार प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने घोषणा की थी कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है, उसी प्रकार वर्तमान कोरोना-काल में सोनिया गांधी को खुश करने के लिए मनमोहन सिंह ने घोषणा कर दी होती कि इलाज का पहला अधिकारी मुसलमानों का है तथा उसी क्रम में औशधियों पर भी मुसलमानों का ही पहला अधिकारी रिजर्व कर दिया जाता। हिंदुओं को जीने-मरने के लिए भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता। वैसे भी जब से कांग्रेस पर नेहरू वंश का कब्जा हुआ है, उसका एकसूत्री कार्यक्रम औरंगजेब की नीति का अनुसरण करते हुए हिंदुओं का विनाश करना रहा है। जवाहरलाल नेहरू के फर्जी सेकुलरवाद एवं मुसलिम-तुश्टीकरण की नीति को उनके वंशजों ने पूरी जोर शोर से कार्यान्वित किया। यदि वर्ष  2014 में नेहरू के वंशजों का सत्ता पर पुनः कब्जा हो गया होता तो बहुत संभावना थी कि परोक्ष रूप से इसलाम को ही देश का राजधर्म बना दिया जाता तथा हिंदुओं पर तरह-तरह से तमाम प्रतिबंध लगा दिए गए होते। नेहरू वंश के हिंदूविरोधी चरित्र एवं नीति के प्रमाण भरे पड़े हैं। मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की सरकार ने सर्वाेच्च न्यायालय में लिखित रूप में घोशित किया था कि राम वास्तव में नहीं हुए, बल्कि काल्पनिक पात्र थे। इतना ही नहीं, उस सरकार ने भारत व श्रीलंका के बीच भगवान राम द्वारा निर्मित कराए गए रामसेतु को तोड़ने का आदेश दे दिया था। उसी दौरान कर्नाटक की तत्कालीन सरकार ने वहां मंदिरों पर  विशेष टैक्स लगाकर उस आय से मसजिदों एवं मदरसों को मदद की योजना लागू की थी। केरल में मुसलिमबहुल इलाके को इसलामी मल्लपुरम जिला बनाया जा चुका है।


  
      मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की सरकार का पहला कार्यक्रम मुसलिम-तुश्टीकरण एवं हिंदुओं का दमन था तो दूसरा कार्यक्रम देश को लूटना था। धरती,आकाश और पाताल, तीनों जगह लाखों करोड़ के घोटालों की भरमार हो गई थी। महंगाई ने विष्व-कीर्तिमान बना डाला था तथा महंगाई की चक्की में देश की जनता बुरी तरह पिस रही थी। नेहरू वंश झूठ बोलने में सदैव उस्ताद रहा है। यदि इस समय केंद्र में नेहरू वंश के नेतृत्व वाली कांग्रेस का शासन होता तो कोरोना महामारी उसके लिए वरदान सिद्ध हो जाती। उसे अपनी हिंदूविरोधी नीति एवं चरित्र को साकार करने एवं भ्रश्टाचार द्वारादेश  को लूटने का स्वर्ण अवसर मिल जाता। वह ऐसे तमाम प्रयास करती, जिनसे हिंदुओं की जनसंख्या में कमी होती। आष्चर्य नहीं कि उन प्रयासों से हिंदुओं की आबादी घटकर आधी हो जाती। चूंकि देष में मुसलिम आबादी तेजी से बढ़ रही है, इसलिए अगले दस-बीस साल में भारत इसलामी राश्ट्र बन जाता। सोनिया गांधी कैथोलिक ईसाई हैं तथा कैथोलिक ईसाइयों पर रोम के सर्वाेच्च ईसाई धर्मगुरू पोप का आदेष लागू होता है। बताया जाता है कि पोप इस बात से बहुत नाराज हैं कि मोदी सरकार के समय में पहले की तरह साम, दाम, दंड, भेद, इन चारों उपायों का अनुसरण कर भारत में हिंदुओं को खुलकर ईसाई नहीं बनाया जा रहा है। 



       महाराष्ट्र के पालघर क्षेत्र में पिछले दशको से वहां की आदिवासियों को बड़े पैमाने पर धर्मांतरित कर ईसाई बनाने का शड्यंत्र चल रहा है। वहां यह प्रचारित किया गया है कि आदिवासी लोग रावण की संतान हैं और राम उनके शत्रु थे तथा विजयदषमी पर रावण-दहन को रोका जाता है। पालघर में दो साधुओं एवं उनके वाहन चालक की हिंदू-विरोधियों द्वारा जो दिल दहला देने वाली निर्मम हत्या की गई, उस सम्बंध में संतों के तीव्र आक्रोष को देखते हुए महाराष्ट्र में कांग्रेस एवं षरद पवार की पार्टी के सहयोग से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घोशणा की थी कि  निष्पक्ष जांच कर किसी हत्यारे को बख्षा नहीं जाएगा। किंतु अब पता लगा है कि कांग्रेस के दबाव में उद्धव ठाकरे की सरकार मामले की लीपापोती का प्रयास कर रही है। जो जानकारी सामने आई है, इस प्रकार है:- 



         ‘पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या में जिन ईसाई लोगों को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी जमानत के प्रयास होने लगे हैं। यह प्रयास सोनिया गांधी की खास ईसाई षिराज बलसारा कर रही है। उसके पति का नाम प्रदीप प्रभु है। वह नाम से हिंदू लगता है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की वह महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रदीप प्रभु पहले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोषल साइंस में पढ़ाता था और उसका असली नाम पीटर डेमिलो है। उसने प्रदीप प्रभु नाम हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए रखा है। उक्त व्यक्ति कितना शक्तिशाली है, यह इसी से पता लगता है कि कांग्रेस-शासित यूपीए सरकार में सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली ‘नेषनल एडवाइजरी कमेटी’ का सदस्य था, जिसने हिंदुओं का नरसंहार करने वाला काला कानून ‘कम्यूनल वायलेंस बिल’ सोनिया गांधी के कहने पर बनाया था।  कांग्रेस-शासित यूपीए काल के कई कानूनों के ड्राफ्ट इसी के बनाए हुए हैं। आईएएस/आईएफएस के कोर्स में इसके लेक्चर्स अनिवार्य थे और साथ में यूपीए सरकार के दस-वर्शीय कार्यकाल में यह भारत सरकार की कई समितियों का सदस्य भी था। कुलमिलाकर सोनिया ने अपने विष्वस्त लोगों को भारत की सभी संवैधानिक संस्थाओं में स्थापित कर दिया था। सोनिया गांधी के षासनकाल में यह प्रदीप प्रभु उर्फ ईसाई पीटर डेमिलो, एनजीओ चलाने वालों में सबसे सषक्त व्यक्ति था। आज जब पूरे भारत का हिंदू पालघर में साधुओं के हत्यारों की असलियत जानने में लगा हुआ है, तब यह उनके हत्यारों को बचाने में जुटा है। यह पूरा एक तंत्र है, जो धर्मांतरण कराने वाले ईसाई गिरोह और क्रिप्टो ईसाइयों से जुड़ता हुआ सीधे दिल्ली में सोनिया गांधी तक पहुंचता है। इस प्रकार पालघर हत्याकांड में संतों की हत्या के खून में रंगे हाथ सोनिया गांधी तक पहुंचते हैं। पालघर में जहां संतों की हत्या हुई, वहां 75 प्रतिषत धर्मांतरित ईसाइयों व कांग्रेस के सहयोगी वामपंथियों का डेरा है। मामले को रफादफा करने के लिए सोनिया गांधी उद्धव ठाकरे पर दबाव बना रही हैं और उद्धव सोनिया के सामने घुटने टेकने को विवष हैं।’