30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस


   -डा0 मुरलीधर सिंह 



        हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर मैं सभी पत्रकार सहयोगियो को हार्दिक बधाई देता हूॅ। वास्तव में हिन्दी पत्रकारिता दिवस अपने देश में पत्रकारिता/प्रेस दिवस, भारतीय प्रेस परिषद दिवस आदि अनेक दिवस है तथा मनाये जाते है। केन्द्रीय एवं राज्य सरकार की लगभग 31 साल की सेवाओ मे मैं अनुभव किया कि पत्रकार के रूप में प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया आदि के पत्रकार भारतीय संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुक्षेद-19) के तहत पत्रकारिता कर रहे है भारत में पत्रकारिता के स्थापना का श्रेय देवश्री नारद ऋषि को जाता है तथा सप्त ऋषि के अलावा अन्य महर्षिगण भी पत्रकार एवं लेखक के रूप में याद किये जाते है जिसमें महर्षि बाल्मीकि, वेदव्यास आदि के अलावा इलेक्ट्रानिक चैनल के रूप में प्रदर्षित करने वाले महाराज धृतराष्ट्र के सचिव श्री संजय  का नाम लिया जाता है।


       आप सभी पत्रकार साथी हमारे विद्धान है इसको अन्यथा न ले आप सभी लोग विद्धान है इसलिए इस पर ज्यादा प्रकाश न डालते हुए आधुनिक पत्रकारिता के रूप में पंडित जुगल किशोर शुकुल जी को याद करता हूॅ एवं नमन करता हूॅ। ग्रेट व्रीटेन में पत्रकारिता की शुरूवात 1686 ई0वी0 में शुरू हो गई थी और उन्ही प्रक्रियाओ को अपनाते हुए भारत में पत्रकारिता का स्वरूप विकसित हुआ जिसमें आज प्रेस और पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1867, समाचार-पत्र पंजीयन (केन्द्रीय) नियमावली 1956, वर्किंग जर्नलिस्ट एवं न्यूज पेपर कर्मचारी विविध अधिनियम 1955, केवल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट 1995, सूचना प्रद्योगिकी अधिनियम 2000, अधिवक्ता अधिनियम 1961, आदि के तहत पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रियता है परन्तु सभी का मूल आधार हमारा भारतीय संविधान है (1950) है जिसके तहत हम अपनी मान सम्मान बढ़ाते है तथा दूसरे को भी सम्मानित करते है।


      अयोध्या मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की धरती है जहाॅ भगवान राम ने जीवन को मर्यादित ढ़ंग से जीने का पे्ररणा दिया वही भगवान श्री कृष्ण ने हमे शरीर से हटकर आत्मिक उत्थान का संदेश दिया वही भगवान गौतम बुद्ध ने हमे पूर्वाग्रह एवं आग्रह रहित होकर सम्यक मार्ग पर चलने का सन्देश दिया है इन्हें लाइट आफ वल्र्ड/एशिया कहा जाता है। जो आज के सन्दर्भ में आवश्यक है यह कार्य सोशल मीडिया द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कोई अभी व्यापक विधान नही है पर सम्यक आचरण व्यवहार की आवश्यकता है मेरा मानना है कि सरकार, शासन-प्रशासन  संविधान एवं कानूनो की परिधि में पत्रकारो के मान सम्मान के लिए कटिबद्ध है तथा किसी भी सम्यक पत्रकार का अपमान नही होगा यह मेरा दृढ़ संकल्प है।


        बाते बहुत लम्बी है इसलिए मैं भगवान श्री कृष्ण के श्रीमत भगवत गीता के दूसरे अध्याय के 56वे श्लोक का उदाहरण पेश करता हूॅ। दुःखेष्वनुद्विग्रमनाः सुखेषु विगतस्पृहः। वीतरागभयकोधः स्थितधीर्मुनिरूच्यते।। अर्थात जो तीनो तापो के होने पर भी मन में विचलित नही होता हे अथवा सुख में प्रसन्न नही होता और जो आषक्ति, भय तथा कोध्र से मुक्त होता है वह स्थिर मनवाला मुनि/पत्रकार/लेखक/विचारक/चिन्तक कहलाता है।सभी को इस अवसर पर बधाइ्र देते हुए अह्वान करता हूॅ कि आप पत्रकारो को गठित वेतन आयोगो का लाभ मिले एवं वेहतर जीवन में सूचना के साथ-साथ व्यापक सम्मान मिले।