अखिलेश यादव लगातार मुख्यमंत्री योगी के फैसलों पर उठा रहे हैं सवाल



    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना संकट और कानूनव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति से भाजपा सरकार निबटने में पूरीतरह असफल हो चुकी है। उसके नियंत्रण में न तो प्रशासन है और नहीं अधिकारी। हर ओर मनमानी और लापरवाही है। अफसर बेतुके आदेश कर रहे है। मुख्यमंत्री जी अपनी असहाय स्थिति महसूस करते हुए भी कुर्सी पकड़े हुए है जबकि प्रदेश की बदहाली के लिए उन्हें तत्काल इस्तीफा देकर प्रस्थान कर जाना चाहिए।


       राज्य सरकार में निर्णय के स्तर पर कितनी गैरजिम्मेदारी और आपाधापी चल रही है इसका एक उदाहरण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के महानिदेशक महोदय का यह बयान है कि मोबाइल से भी संक्रमण फैलता है। अगर ऐसा है तो आइसोलेशन वार्ड के साथ पूरे देश में मोबाइल को बैन कर देना चाहिए। यही तो अकेले में बाहरी सम्पर्क का सहारा बनता है। अस्पतालों में जैसी दुव्र्यवस्था की खबरें आ रही है उसका सच जनता तक न पहुंचे इसलिए यह पाबंदी लगाई जा रही है ऐसे ही पीलीभीत में डीएम साहब ने ईद पर मस्जिदों में लोगों के जुटने और ईद की नमाज की छूट दे दी फिर आदेश वापस लिया। यह कैसी दुविधा की स्थिति है।


     सच तो यह है कि भाजपा सरकार खुद ही अनिर्णय और असमंजस के हाल में है। भाजपा सरकार के उल्टे-सीधे निर्णयों के नतीजे जनता को भोगने पड़ते हैं।उत्तर प्रदेश के क्वाॅरंटीन सेन्टरों में बदइंतजामी से मरीजो का मरना जारी है।


  कोरोनावायरस से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में सियासत थमने का नाम नहीं ले रही, यहां एक के बाद एक मुद्दे पर राजनीति शुरू हो गई है। अब राज्य की की ओर से शनिवार को  योगी सरकार जारी किए गए एक फैसले पर विपक्ष की समाजवादी पार्टी ने आपत्ति जताई है। योगी सरकार ने शनिवार को अपने एक आदेश में कहा कि कोरोनावायरस के एल-2 और एल-3 अस्पतालों के आइसोलेशन वॉर्ड में अब मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इन वॉर्ड्स में मरीज अपने पास मोबाइल नहीं रख सकते. इसके पीछे की वजह बताई गई है कि मोबाइल से संक्रमण फैलता है।


    अखिलेश ने एक ट्वीट कर कहा, अगर मोबाइल से संक्रमण फैलता है तो आइसोलेशन वार्ड के साथ पूरे देश में इसे बैन कर देना चाहिए। यही तो अकेले में मानसिक सहारा बनता है, वस्तुतः अस्पतालों की दुर्व्यवस्था व दुर्दशा का सच जनता तक न पहुंचे, इसीलिए ये पाबंदी है। ज़रूरत मोबाइल की पाबंदी की नहीं बल्कि सैनेटाइज़ करने की है।