covid-19, राम मंदिर निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त


  अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने कहा कि राम मंदिर  निर्माण कार्य में अभी केवल भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू हुआ है. कोरोना के चलते अभी सोशल दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. जिस गति से मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ होना चाहिए था, वह नहीं हो सका है.



      अयोध्या, राम नगरी अयोध्या में राम जन्म भूमि परिसर में इस समय हलचल तेज है. एक दिन पहले श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने रामलला के दरबार में 28 वर्षों बाद माथा टेका. साथ ही रामलला परिसर में चल रहे समतलीकरण के कार्य का निरीक्षण भी बारीकी के साथ किया. लॉकडाउन के दौर में सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए रामलला के परिसर में जमीन के समतलीकरण का कार्य अब तेजी के साथ किया जा रहा है.

लॉकडाउन के कारण समतलीकरण में लगी  3 जेसीबी, एक क्रेन और महज 10 मजदूर 
 

      माना जा रहा है कि अभी मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य शुरू होने में काफी समय लगना है. दरअसल 67 एकड़ की जमीन कई जगह बड़ी खाई है और जमीन ऊबड़-खाबड़ है. माना जा रहा है कि कम से कम 50 मजदूरों के साथ पूरी ताकत झोंकी जाए तो 2 महीने में समतलीकरण हो पाएगा. लेकिन सूत्रों के हवाले से पता चला है कि राम जन्म भूमि के परिसर में 3 जेसीबी, एक क्रेन और महज 10 मजदूर परिसर में जमीन के समतलीकरण का कार्य कर रहे हैं. इस लिहाज से समतलीकरण के कार्य में ही महीनों लगने की उम्मीद है. वहीं पता चला है कि समतलीकरण के बाद 40 फीट गहरा प्लेटफॉर्म बनाकर ही मंदिर निर्माण शुरू होगा. इस दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है. महंत नृत्य गोपाल दास के इस बयान के बाद हलचल मच गई. सूत्रों के हवाले से पता चला कि राम जन्म भूमि के परिसर में 3 जेसीबी, एक क्रेन और 10 से ज्यादा मजदूर रामलला के परिसर में जमीन के समतलीकरण का कार्य कर रहे हैं. रामलला के परिसर में लगी लोहे की बैरिकेडिंग को काटकर हटाया जा रहा है. इस दौरान कई अहम प्राचीन पत्थर और मंदिर से जुड़ी हुई चीजें मिली हैं.


जमीन के समतलीकरण का कार्य ही मंदिर निर्माण की शुरुआत

        रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के अनुसार जमीन समतलीकरण के बाद अब जल्दी मंदिर निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा लेकिन अभी जमीन समतलीकरण में टाइम लगेगा. राम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि मंदिर बनाने के पहले जमीन का समतलीकरण होना चाहिए. जेसीबी मशीन से जमीन को बराबर करने का काम किया जा रहा है. जमीन का समतलीकरण भी एक तरीके से मंदिर निर्माण की प्रक्रिया है.

    जमीन के समतलीकरण के दरमियान 28 वर्षों बाद श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने रामलला का दर्शन किया. रामलला के परिसर में चल रहे कार्य का भी निरीक्षण किया है. राम जन्मभूमि पर समतलीकरण का कार्य ट्रस्ट के अध्यक्ष के देखभाल में चल रहा है. जल्द ही मंदिर निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. हालांकि जमीन का समतलीकरण भी मंदिर निर्माण की तरफ बढ़ाया गया कदम ही कहा जा सकता है क्योंकि जब तक जमीन का समतलीकरण नहीं होगा. जमीन बराबर नहीं होगी तब तक मंदिर निर्माण शुरू नहीं होगा.उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण की जो प्रारंभिक प्रक्रिया है, जमीन के समतल कर का विस्तार के साथ काम किया जा रहा है. उसके बाद जिस मॉडल का राम मंदिर निर्माण होना है, उस मॉडल पर कार्य शुरू किया जाएगा.

दावा- करीब 2000 वर्ष पुराने हैं निकल रहे पत्थर

    अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने कहा कि मंदिर निर्माण कार्य में अभी केवल भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू हुआ है. कोरोना के चलते अभी सोशल दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. जिस गति से मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ होना चाहिए था, वह नहीं हो सका है. कोर्ट के फैसले के बाद ट्रस्ट का गठन होने के साथ ही कोरोना महामारी फैल गई. इस दरमियान केवल भगवान राम लला को नए स्थाई भवन में शिफ्ट करने के बाद जमीन को बराबर करने का काम किया जा रहा है. इसके बाद शिला पूजन और मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ होगा रामलला के परिषर में जो खुदाई चल रही है. उसमें कसौटी के पत्थर और चक्र यह सब दिखाते हैं कि वहां पर कभी पहले मंदिर हुआ करता था. कसौटी के पत्थर यह सिद्ध करते हैं कि जो मंदिर था, उसे महाराज विक्रमादित्य ने ही बनवाया था. यह पत्थर करीब 2000 वर्ष पुराने हैं, जो जमीन की मिट्टी में दबे थे और समतलीकरण के दरमियान मिल रहे हैं.