देश का मजदूर भाजपा सरकार से आक्रोशित:अखिलेश यादव ने मांगा इस्तीफा


         देशभर में जारी लॉकडाउन की वजह से प्रवासी मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर नेताओं को आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि भाजपा सरकार के रवैये से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देशभर के मजदूर आक्रोशित हैं। 


      अखिलेश ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, भाजपा सरकार के अदूरदर्शी फैसलों के चलते गरीब और बेबस श्रमिकों की जिंदगी नर्क हो गई है। मथुरा में कोसीकलॉ से फरह तक हाईवे पर जमा श्रमिकों को जब सात घंटे तक खाना-पानी नहीं मिला, बसों की व्यवस्था नहीं हुई तो उनके आक्रोश व्यक्त करने पर पुलिस ने उनपर जमकर लाठियां बरसाई। इस कारण भाजपा से देश भर का मजदूर आक्रोशित है।


        सपा मुखिया ने कहा, लॉकडाउन के चलते समाजवादी पार्टी ने सरकार को तमाम तरह के सुझाव दिए और लगातार जमीनी सच्चाई उजागर की, लेकिन मुख्यमंत्री की टीम इलेवन अहंकार में डूबी रही। अब हालात नियंत्रण के बाहर अराजकता तक पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार से आग्रह है कि वह संवेदनशील होने का परिचय दे। जो लोग सैकड़ों मील चलकर जहां भी पहुंचे हैं, अब वहीं से आगे उन्हें घर भिजवाने की तुरन्त व्यवस्था की जाए। पुलिस एक सीमा से आगे जनसैलाब का सामना नहीं कर सकती है।


         सपा मुखिया ने कहा, मुख्यमंत्री की टीम इलेवन की बैठकों का नतीजा आज तक अमल में नहीं आया। कोरोना पीड़ितों की संख्या में लगातार वृद्धि तो होती जा रही है। टीम इलेवन के कारण पूरा प्रशासन पस्त हो गया है। सरकारी मशीनरी निष्क्रिय है। उन्होंने कहा कि श्रमिक कामगार की किसी भी हादसे में मौत पर प्रत्येक के परिजन को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद तत्काल दें।


       समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के कारनामों से मानवता शर्मसार हो रही है। समझ में नहीं आता कि कोई सरकार कैसे इतनी अमानवीय हो सकती है। औरैया सड़क हादसे में झारखण्ड के मृत श्रमिकों और घायलों को एक साथ खुले ट्रक से रवाना किया गया। एक मृतक का पिता खेत मजदूर है वह अपने बेटे का शव लेने के लिए 19 हजार रूपए खर्चकर आने को मजबूर हुआ।



      भाजपा सरकार के रवैये से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश भर के मजदूर आक्रोशित है। इससे सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है। लाॅकडाउन के चलते समाजवादी पार्टी ने सरकार को तमाम तरह के सुझाव दिए और लगातार जमीनी सच्चाई उजागर की, लेकिन मुख्यमंत्री जी की टीम इलेवन अहंकार में डूबी रही। अब हालात नियंत्रण के बाहर अराजकता तक पहुंच गये है। आखिर इस संकट की जिम्मेदारी किसकी है?


          प्रदेश की सीमाओं को अचानक बंद करने के आदेश से स्थिति और गम्भीर हो चली है। प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में प्रवासी मजदूर भूख प्यास से व्याकुल और चीख पुकार करते हुए पुलिस वालों से प्रदेश की सीमा में प्रवेश पाने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। जो लोग बीच प्रदेश में फंसे है उनके साथ पुलिस दुव्र्यवहार कर रही है।


          भाजपा सरकार के अदूरदर्शी फैसलों के चलते गरीब और बेबस श्रमिकों की जिंदगी नर्क हो गई है। मथुरा में कोसीकलाॅ से फरह तक हाईवे पर जमा श्रमिकों को जब 7 घंटे तक खाना पानी नहीं मिला, बसों की व्यवस्था नहीं हुई तो उनके आक्रोश व्यक्त करने पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई। सहारनपुर और झांसी में भी कामगारों का सब्र टूट गया। लाठियों की यह चोट गरीब जनता कभी नहीं भूलेगी।


     भाजपा सरकार से आग्रह है कि वह संवेदनशील होने का परिचय दे। जो लोग सैकड़ों मील चलकर जहां भी पहुंचे हैं, अब वहीं से आगे उन्हें घर भिजवाने की तुरन्त व्यवस्था की जाए। पुलिस एक सीमा से आगे जनसैलाब का सामना नहीं कर सकते हैं। दर्द होता है जब मासूम बच्चों को भी बिना दूध, बिस्कुट और खाने के अपने मां-बाप के साथ पैदल यात्रा करते दिखाई देते हैं। सरकारी अराजकता ने प्रदेश में हजारों बच्चों का बचपन छीना है और उन्हें भी पलायन की त्रासदी का अंग बना दिया है।


     सरकार की इससे ज्यादा अक्षमता का प्रमाण क्या मिल सकता है कि समय से निर्णय नहीं कर सकी। लाखों श्रमिक पैदल मारे-मारे पैदल चलने को मजबूर हुए। उनमें से सैकड़ों तो रास्ते में ही मर गये। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाचार श्रमिकों को अपने ही गृह राज्य में उत्पीड़न और अपमानित होना पड़ रहा है।



     मुख्यमंत्री जी की टीम इलेवन की बैठकों का नतीजा आज तक अमल में नहीं आया। कोरोना पीड़ितों की संख्या में लगातार वृद्धि तो होती जा रही है। टीम इलेवन के कारण पूरा प्रशासन पस्त हो गया है। सरकारी मशीनरी निष्क्रिय है। पुलिस करे तो क्या करे, उन्हें कुछ सूझता नहीं है।


     समाजवादी पार्टी की मांग है कि श्रमिक कामगार की किसी भी हादसे में मौत पर प्रत्येक के परिजन को दस लाख रूपयें की आर्थिक मदद तत्काल दें। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि मजदूरों को गंतव्य स्थल तक सम्मानपूवर्क एवं सुविधा से पहुंचायें, और उनके जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।



     प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में लॉकडाउन की वजह से लोगों को हो रही परेशानियों के लिए सरकार पर हमला बोला है। अखिलेश ने कहा है लॉकडाउन 4.0 में भी लोगों की हालत खराब है। कहीं बच्चे बिलख रहे हैं तो कहीं गौशाला में लोग रोके जा रहे हैं। फिर भी सरकार कहती है सब नियंत्रण में है। इसे व्यवस्था कहने वालों को त्यागपत्र दे देना चाहिए। 


  अखिलेश ने मांगा इस्तीफा :-


        प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य में मजदूरों की बदहाली के लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उससे इस्तीफा मांगा है। अखिलेश ने ट्वीट किया है कि लॉकडआउन 4.0 में भी इस बदतर हालात में सरकार सोच रही है कि सब कुछ नियंत्रण में है। वह कहते हैं कि सरकार इसी को व्यवस्था कहती है तो उसे त्यापत्रत्र दे देना चाहिए। लोगों को गौशालाओं में रोका जा रहा है। कहीं सीमाओं पर बच्चे बिलख रहे हैं। क्या इसी नए रंग रुप की बात हुई थी। 


     मजदूरों के साथ हो रहे हैं हादसे :-


     गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई जिलोंं से मजूदरों के मारे जाने की लगातार खबरे आ रही हैं। जिनमें से हाल में औरैया जिले में शनिवार तड़के एक ट्रक और एक डीसीएम मेटाडोर (ट्रक से छोटा वाहन) की टक्कर में 25 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 36 अन्य मजदूर घायल हो गए। दोनों वाहनों में प्रवासी मजदूर थे और दुर्घटना तब हुई जब सड़क किनारे खड़ी मेटाडोर को पीछे से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी। पुलिस ने बताया कि गंभीर रूप से घायल 14 मजदूरों को इटावा जिले के सैफई स्थित पीजीआई में भर्ती कराया गया है। इन दोनों वाहनों में ज्यादातर मजदूर पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के थे।