जिलाधिकारी ने पेश की मानवता की मिसाल


            (दीपक का अपना कोई मका नही होता,जहां भी रहेगा रोशनी बिखेरेगा।। )


        प्रतापगढ़,  जिलाधिकारी डा0 रूपेश कुमार क्वारेन्टाइन सेन्टर के निरीक्षण उपरान्त लौट रहे थे,तभी उनकी नजर सड़क किनारे जा रहे 03 लोगो पर पड़ी। जिलाधिकारी ने तत्काल अपनी गाड़ी ले जाकर उनके पास रोकी जो रायबरेली से जौनपुर हाइवे पर पैदल जा रहे थे, जो पसीने से लथ-पथ एवं भूखे प्यासे थे।


         जिलाधिकारी ने गाड़ी रोककर मजदूरों से उनका हाल-चाल पूछा, मजदूरों द्वारा बताया गया कि वह राज मिस्त्री है और जौनपुर से मुजफ्फरनगर जा रहे है। जिलाधिकारी ने उनको जनपद में रहकर काम करने का प्रस्ताव दिया किन्तु उनके द्वारा बताया गया कि उनके घर वाले परेशान है, इसलिये उन्हें घर जाना अवशयक है। इस पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर को तीनों राज मिस्त्रियों को खाना खिलाकर उन्हें अपने वाहन से क्वारेन्टाइन सेन्टर पहुॅचाने का निर्देश दिया,साथ यह भी निर्देशित किया कि मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करा लिया जाये तदोपरान्त इन्हें उनके गृह जनपद भेजने की व्यवस्था की जाये। जिलाधिकारी डॉ0 रुपेश कुमार ने कोविड-19 के प्रकोप में  मानवता की मिसाल पेश की है।


      जिलाधिकारी डॉ0 रुपेश कुमार ने सभी उप जिलाधिकारियों व अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर अवलोकन करें की उनकी परिधि में कहीं कोई असहाय व्यक्ति या मजदूर परेशान तो नहीं घूम रहा है ऐसे लोगों को तत्काल राहत सामग्री पहुंचाने के साथ ही उन्हें क्वारेन्टाइन सेन्टर में आश्रय दिलाएं तथा आवश्कता अनुरूप उन्हें गंतव्य तक पहुंचने का प्रयास भी किया जाए।जिलाधिकारी डॉ0 रुपेश कुमार ने लोगों से अपील की कि जनपद में कहीं भी कोई व्यक्ति यदि सड़क किनारे पैदल जाता दिखाई पड़े तो उसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन को दें। प्रशासन द्वारा उसे राहत मुहैया कराते हुए  उसकी जांचोंपरांत उसे उसके गंतव्य तक पहुंचाने में यथासंभव मदद की जाएगी।


 



      जिलाधिकारी ने निष्पक्ष दस्तक संवाददाता को विश्वास दिलाते हुए कहा की इस आपदा ने हमें बताया है कि यह भारत देश आशाओं के बल से बलवान है। सेवा इसके आचरण का नैसर्गिक तत्व है। संकल्प इसके विजय का बीजमंत्र है। एकजुटता इसके चरित्र की जीवटता है। इसकी मिट्टी में जीत का जज्बा घुला हुआ है। इसकी सभ्यता अपराजेय है, इसकी सांस्कृतिक अट्टालिकाएं अभेद्द हैं। कोविड-19 को हराने के लिए हम भले ‘शारीरिक दूरी’ बना रहे हैं, लेकिन संवेदनाओं की पृष्ठभूमि में हम सवा सौ करोड़ देशवासी एक-दूसरे का हाथ पकड़े चट्टान बनकर खड़े हैं। यह देश कभी हारा नहीं है। इसबार भी नहीं हारेगा।


  जिलाधिकरी ने बताया की यह एक ऐसा दौर जब ‘शारीरिक दूरी’ आग्रह का विषय बन गया है,। कठिन दौर में ऐसा कम होता है जब नेतृत्व का जनता पर और जनता का नेतृत्व पर इतना अगाध विश्वास हो। सतर्कता,संयम,सेवा,समर्पण और अडिग संकल्प का भाव जो लगभग 45 लाख  प्रतापगढ़ जनपथ वासियो में  जिस ढंग से दिखा है, वह एक मिसाल है।


         जिलाधिकारी ने अवगत कराया की कोविड-19 के प्रकोप से ठहर सी गयी दुनिया के बीच यह जाहिर हुआ है कि भारत आशाओं की अनुभूति को हर पल जिंदा रखने वाला देश है। यह इस देश की सकारात्मक ऊर्जा है कि यहां के लोग कठिनाइयों से अवसाद में जाने की बजाय नए रास्तों पर आगे बढ़ने का अवसर तलाश लेते हैं। संयम,सेवा, समर्पण, सहयोग, संतुष्टि और संकल्प का विलक्षण संयोग देश ने इस कठिन दौर में दिखाया है। लॉकडाउन की कठिनाइयों में नवाचार के नए-नए प्रयोग दिख रहे हैं। निश्चित ही यह सेवा और समर्पण के लिए मजबूत मन से संकल्पित होने का दौर है।


       विश्व स्वास्थ्य संगठन को कोविड-19 के विरुद्ध भारत के कदमों में उबरने की आस दिख रही है। दुनिया के श्रेष्ठतम चिकित्सा प्रणाली वाले इटली और अमेरिका की स्थिति देखने के बाद यह वैश्विक संगठनों के लिए चकित करने वाली बात है कि भारत इस वायरस पर तुलनात्मक रूप से कैसे नियंत्रण कर सका है.....?