लाॅकडाउन मे फंसे लोग आत्महत्या को मजबूर -अखिलेश यादव


       समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना भाजपा सरकार को गंवारा नहीं। उसको इसमें अपना सिंहासन डोलने का खतरा लगने लगता है। लोकतांत्रिक मर्यादाओं और मान्यताओं की तिलांजलि दी जा रही है। विपक्ष से तो क्या मुख्यमंत्री जी को अपने विधायक से भी डर लगने लगा है?


      आखिर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने से परहेज क्यों? इसमें विधायक कोरोना संकट के समाधान के बारे में चर्चा करते, उपाय बताते जिससे सरकार को मदद मिलती। चंद अधिकारियों के बूते इस भयंकर समस्या का सामना नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री जी दावे चाहे जितने करें कोरोना संक्रमरण के हालात सुधर नहीं रहें है।


     आगरा-कानपुर-लखनऊ के बाद मेरठ में लगभग पांच दर्जन लोगों का कोरोना संक्रमित होना भयावह स्थिति की ओर इशारा करता है। बिजनौर के डाॅक्टर की मेरठ में कोरोना के कारण मृत्यु दुःखद है। आगरा में कोरोना मरीजों का बुरा हाल है। सरकारी अस्पताल में भर्ती बिना मोबाइल वाले बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे कहां है ये स्वास्थ्य विभाग नहीं बता पा रहा है। दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मरीजों के परिवारीजन सीएम के आगरा माॅडल की कीमत कब तक चुकाएंगे आगरा वासी....!


      लाॅकडाउन में भोजन के लिए बेबस महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग क्वारंटाइन सेंटर से बाहर आते हैं तो उन पर पुलिस लाठीचार्ज करती है, यह प्रशासनिक संवेदनशून्यता की हद है। विभिन्न राज्यों में फंसे लाखों कामगारों का कोई भविष्य नहीं है। समाजवादी सरकार में श्रमकल्याण की योजनाएं लागू की गई थी। उनके अलावा भाजपा राज के तीन वर्षों में कुछ भी नहीं है।


    विदेशों से लोगों को जहाजों से फ्री में लाया जा रहा है जबकि भाजपा राज में हकीकत कुछ और ही दास्तां बयां कर रही है। श्रमिक दिखा रहे हैं कि टिकट लेने पर ही उन्हें रेल यात्रा की सुविधा मिली है। अब झूठ छुपाने को तरह-तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं। लाॅकडाउन की वजह से सूरत में फंसे उत्तर प्रदेश के एक मजदूर मनोज सिंह ने आत्महत्या कर ली। गाजियाबाद से पैदल अम्बेडकर नगर घर जा रहा युवक अपनी जान गंवा बैठा। आर्थिक तंगहाली के चलते और कितनी जाने जाएंगी....?


 


 


      भाजपा राज में उत्तर प्रदेश बर्बाद हो चला है। किसान तबाह है, आत्महत्या कर रहा है। उसकी फसल की लूट हो रही है। गन्ना किसान को बकाया नहीं मिला। बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कामधंधे बंद है और शिक्षा संस्थानों में ताले लगे हैं। देशभर में मजदूरों को लग रहा है कि उन्हें भाजपा सरकार ने अपना बंधक बना लिया हैं। भाजपा सरकार स्वयं जनता के लिए परेशानी का कारण बन गई है। समाजवादी पार्टी लोकतंत्र के साथ भाजपा को खिलवाड़ नहीं करने देगी।


      अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अपनी नकारात्मक सोच छोड़ नहीं पा रही है। महाराष्ट्र से पैदल चलकर कानपुर तक का लंबा सफर तय करने वाले युवकों के लिए जिला प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया। न तो बाहर से आए श्रमिकों की सही ढंग से जांच हो रही है, न उनके रहने-खाने का कोई इंतजाम है। भारतीय सेना ने कोरोना के खिलाफ कार्यरत डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ तथा पुलिस बल के सम्मान में अपने विमानों और हेलीकाप्टरों से पुष्प वर्षा कर अभिनंदनीय काम किया है। इस संकट में कोरोना योद्धाओं का मनोबल बढ़ाए रखना और उनके काम की सराहना करना हम सबका कर्तव्य है।


     अखिलेश यादव ने कहा कि तीन बार लॉकडाउन और नतीजा शून्य। कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है। संक्रमित लोगों की संख्या के सही आंकड़े भी नहीं मिल रहे हैं। रात को रिपोर्ट निगेटिव, सुबह पॉजिटिव। अभी राज्य में 20 से अधिक संक्रमित जिलों में वेल्टीलेटर तक नहीं है। इसमें लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 


       पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने  कहा कि 25 मार्च से घरों में कैद अल्पवेतन भोगियों, रोज कमाने खाने वालों, नौजवानों और किसानों को भविष्य की दुश्वारियां सोचकर ही पसीना छूट रहा है। सरकारी खजाने की हालत बिगड़ी हुई है। शराब के दुष्प्रभावों की चिंता किए बगैर सरकार उसकी बिक्री से राहत पाने की उम्मीद कर रही है। सत्तारूढ़ दल को इस संकट में भी अगले चुनाव की चिंता सता रही है। इसीलिए उसने विपक्ष का सहयोग लेने का कोई सही प्रयास नहीं किया है। विधानसभा का विशेष सत्र भी वह बुला नहीं रही है।