मजदूरों की मदद के बजाए राजनीति कर रही भाजपा :अखिलेश यादव


        समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह भाजपा सरकार की नौटंकी नहीं तो क्या है कि वह बहाने पर बहाने बनाकर श्रमिकों के घर पहुंचने में अवरोधक बन रही है।
 सरकार को खुद इस बात का फिटनेस सर्टिफिकेट देना चाहिए कि क्या वह इस बदहाली में देश-प्रदेश का शासन-प्रशासन चलाने लायक है? देश-विदेश में भारत की छवि का ढिंढ़ोरा पीटने वाले कहां है?


उत्तर प्रदेश में अब प्रवासी मजदूरों को लेकर सियासत जोर पकड़ती दिखाई दे रही है। कांग्रेस और राज्य की योगी सरकार मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए बस के इंतजाम को लेकर पिछले दो दिनों से भिड़े हुए हैं, अब समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने भी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी कोरोना संकट में फंसे मजदूरों की बेचैनी को भी अपने राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर रही है।अखिलेश यादव  ने एक ट्वीट में कहा कि ‘अव्यवस्था के इस दौर में भी बीजेपी कमज़ोर लोगों पर अत्याचार करने से नहीं चूक रही है। ग़रीबों-मज़दूरों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है और उन्हें घर तक न पहुंचाने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढ रही है। अति निंदनीय, ये भाजपाई राजनीति नहीं षड्यंत्रकारी बाज़नीति है।'





सपा अध्यक्ष ने एक बयान में कहा, 'प्रदेश में दिन-रात मजदूरों की दुर्दशा की दर्दनाक कहानी सुनकर दिल दहल जाता है. रोज ही वे दुर्घटनाओं के शिकार होकर जानें गंवा रहे हैं। इस सबसे उदासीन भाजपा सरकार ने सभी मानवीय मूल्यों को रौंद दिया है। उन्होंने कहा, 'समझ में नहीं आता कि जब सरकारी, निजी और स्कूलों की पचासों हजार बसें खड़े-खड़े धूल खा रही हैं तो प्रदेश की सरकार मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए इन बसों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही है? सरकार की हठधर्मिता बहुत भारी पड़ रही है।'


अखिलेश यादव  ने किसी का नाम लिए बिना कहा, 'जो मदद को हाथ बढ़ते हैं, उनको झटक देने का अमानवीय बर्ताव बीजेपी का आचरण बन गया है।'


     सपा सुप्रीमो ने कहा कि यह बीजेपी सरकार की नौटंकी नहीं तो क्या है कि वह बहाने बनाकर श्रमिकों के घर पहुंचने में बाधा बन रही है। भूखे-प्यासे मजदूर, महिलाएं, बच्चे भयंकर गर्मी में नारकीय यातना भोग रहे हैं।उन्होंने कहा कि ‘बीजेपी सरकार को असल में खुद इस बात का फिटनेस सर्टिफिकेट देना चाहिए कि क्या वो इस बदहाली में देश-प्रदेश का शासन-प्रशासन चलाने लायक हैं? देश-विदेश में भारत की छवि का ढिंढोरा पीटने वाले कहां हैं?'



     अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार मजदूरों की घर पहुंचने की व्याकुलता को भी अपने राजनीतिक स्वार्थ साधन के लिए इस्तेमाल करने में संकोच नहीं कर रही है। जब सरकारी, प्राइवेट और स्कूलों की पचासों हजार बसें खड़े-खड़े धूल खा रही हैं तो प्रदेश की सरकार श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए इन बसों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही है? सरकार की हठधर्मिता बहुत भारी पड़ रही है। जो मदद को हाथ बढ़ते हैं उनको झटक देने का अमानवीय बर्ताव भाजपा का आचरण बन गया है।









    अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार कोरोना संकट के साथ मजदूरों की घर पहुंचने की व्याकुलता को भी अपने राजनीतिक स्वार्थसाधन के लिए इस्तेमाल करने में संकोच नहीं कर रही है। प्रदेश में दिन रात चल रहे श्रमिकों की दुर्दशा की दर्दनाक कहानी सुनकर दिल दहल जाता है। रोज ही वे दुर्घटनाओं के शिकार होकर जानें गंवा रहे हैं। इस सबसे उदासीन भाजपा सरकार ने सभी मानवीय मूल्यों को रौंद दिया है।


     समझ में नहीं आता कि जब सरकारी, प्राईवेट और स्कूलों की पचासों हजार बसें खड़े-खड़े धूल खा रही हैं तो प्रदेश की सरकार श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए इन बसों का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रही है? सरकार की हठधर्मिता बहुत भारी पड़ रही है। जो मदद को हाथ बढ़ते हैं उनको झटक देने का अमानवीय बर्ताव भाजपा का आचरण बन गया है।


     यह भाजपा सरकार की नौटंकी नहीं तो क्या है कि वह बहाने पर बहाने बनाकर श्रमिकों के घर पहुंचने में अवरोधक बन रही है। भूखे-प्यासे श्रमिक, महिलाएं, बच्चे भयंकर गर्मी में नारकीय यातना भोग रहे हैं। भाजपा सरकार को वस्तुतः स्वयं इस बात का फिटनेस सर्टीफिकेट देना चाहिए कि क्या वह इस बदहाली में देश-प्रदेश का शासन-प्रशासन चलाने लायक है? देश-विदेश में भारत की छवि का ढिंढ़ोरा पीटने वाले कहां है?



     भाजपा सरकार की गरीब और श्रमिक विरोधी नीतियों का ही फल है कि रोजाना ही सड़क हादसों में श्रमिकों की जानें जा रही है। औरैया काण्ड में मृतकों के साथ भाजपा सरकार के अंसेवदनशील बर्ताव को दुनिया जान चुकी है। इटावा में ट्रक की चपेट में आकर 6 किसानों की मौत हो गई। कानपुर में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटना में श्रमिक के बच्चे की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए। आजमगढ़ के अतरौलिया क्षेत्र में हाईवे पर मऊ निवासी 2 छात्रों सहित 3 लोगों की मृत्यु हो गई। मुख्यमंत्री जी की पुलिस कहां गश्त लगा रही है और आला अफसर कहां चैकसी बरत रहे है? जब अधिकारी मुख्यमंत्री जी की बात ही नहीं सुनते है तो इस राज्य का क्या होगा?
   


     अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को पुनः निर्देश दिया है कि वे भाजपा के लोगों की बदजुबानी पर ध्यान न देकर श्रमिकों, बेहाल गरीबों की आवाज को आवाज देने से न डिगें, न भटकें। सभी समाजवादी सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करें और जनता को भाजपा के कारनामों से परिचित भी कराते रहे।


       यह भाजपा सरकार की नौटंकी नहीं तो क्या है कि वह बहाने पर बहाने बनाकर श्रमिकों के घर पहुंचने में अवरोधक बन रही है। भाजपा सरकार को स्वयं इस बात का फिटनेस सर्टिफिकेट देना चाहिए कि क्या वह इस बदहाली में देश-प्रदेश का शासन-प्रशासन चलाने लायक है? देश-विदेश में भारत की छवि का ढिंढोरा पीटने वाले कहां हैं? जब अधिकारी मुख्यमंत्री की बात ही नहीं सुनते है तो इस राज्य का क्या होगा?



                                    भाजपा की श्रमिक विरोधी नीतियों से जा रही जानें -


       सपा अध्यक्ष ने कहा, भाजपा सरकार की गरीब विरोधी नीतियों का ही फल है कि रोजाना सड़क हादसों में श्रमिकों की जानें जा रही हैं। औरैया हादसे में मृतकों के साथ भाजपा सरकार के अंसेवदनशील बर्ताव को दुनिया जान चुकी है। इटावा में ट्रक की चपेट में आकर 6 किसानों की मौत हो गई। कानपुर में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हुई दुर्घटना में श्रमिक के बच्चे की मौत हो गई, 12 लोग घायल हैं। आजमगढ़ के अतरौलिया क्षेत्र में हाईवे पर मऊ निवासी 2 छात्रों सहित 3 लोगों की मृत्यु हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनकी पुलिस कहां गश्त लगा रही है, आला अफसर कहां चौकसी बरत रहे है? उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को फिर निर्देश दिएं है कि वे भाजपा नेताओं की बदजुबानी पर ध्यान न देकर श्रमिकों की आवाज को आवाज देने से न डिगें, न भटकें।


                                               भाजपा की षडयंत्रकारी बाजनीति -



         अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, अव्यवस्था के इस दौर में भी भाजपा कमजोर लोगों पर अत्याचार करने से नहीं चूक रही है। गरीबो-मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है। उन्हें घर तक न पहुंचाने के लिए तरह-तरह के बहाने ढूंढ रही है। अति निदनीय। ये भाजपाई राजनीति नहीं षडयंत्रकारी बाजनीति है।


    अखिलेश ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को फिर से निर्देश दिया है कि ‘वे बीजेपी के लोगों की बदजुबानी पर ध्यान न देकर श्रमिकों, बेहाल गरीबों की आवाज को आवाज देने से न डिगें, न भटकें, सभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और जनता को बीजेपी के कारनामों से परिचित भी कराते रहें।'