PPE किट पहनकर अस्पताल में जाते थे, कोरोना मरीजों के शव से चुराते थे गहने, गिरफ्तार

   अहमदाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने दो चोरों को गिरफ्तार किया है जो सिविल अस्पताल में पीपीई किट (PPE kit) पहनकर जाते थे और कोरोना (Coronavirus) से मरने वाले मरीजों के शवों से गहने चोरी कर लेते थे।
 
गुजरात के अहमदाबाद में कोरोना वायरस मरीजों की मौत के बाद शव से गहने चुराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने दो लोगों को इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी पीपीई किट पहनकर अस्पताल में दाखिल होते थे और शवों से गहने चुरा लेते थे।


अमराईवाडी के कांग्रेस पार्षद जगदीश राठौड़ ने सिविल अस्पताल के अधीक्षक एसएस प्रभाकर को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी एक रिश्तेदार महिला की अस्पताल में कोरोना से मौत हो गई थी। सूचना के बाद महिला के पति शिवपूजन अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने पाया कि उनकी पत्नी के शव से गहने गायब थे।


शिवपूजन ने अस्पताल प्रशासन से शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पार्षद के पत्र के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। इधर पुलिस को महिला के पति ने शिकायत की। शाहीबाग पुलिस इंस्पेक्टर एके पटेल ने बताया कि सूचना के बाद वे लोग पड़ताल करने हॉस्पिटल पहुंचे।


हॉस्पिटल के सीसीटीवी कैमरे चेक किए गए। सीसीटीवी कैमरे की चेकिंग में कुछ पता नहीं चल सका क्योंकि सभी लोगों ने पीपीई किट पहना था और जिसके कारण किसी को पहचान नहीं हो पा रही थी। इंस्पेक्टर ने बताया कि उन लोगों ने हॉस्पिटल का रजिस्टर चेक किया। 8 मई को महिला अस्पताल में भर्ती कराई गई थी। पुलिस ने उस दिन से लेकर महिला की मौत तक के दिन का रजिस्टर चेक करके स्टाफ की ड्यूटी देखी।


ड्यूटी पर तैनात रहे सारे स्टाफ से पूछताछ की गई। पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा। पड़ताल के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी में दो लोगों को शवों को सैनिटाइज करते हुए देखा। पूछताछ में पता चला कि दोनों अस्पताल के स्टाफ नहीं थे।


पुलिस ने पड़ताल के बाद शक के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए अमित शर्मा और उसके एक साथी राज पटेल ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। पुलिस ने बताया कि दोनों अस्पताल में पीपीई किट पहनकर दाखिल होते थे और चोरी करते थे।


सामने आया है कि ये लोग कोरोना से मरने वाले मरीजों के शरीर से गहने उतार लेते थे। क्योंकि शवों को पूरी तरह से सील करके परिजनों को सौंपा जाता था इसलिए परिजनों को पता नहीं चल पाता था। वहीं मरीज की मौत से परेशान घरवाले भी इस ओर ध्यान नहीं दे पाते थे।