संभल नहीं रहा प्रदेश,चारों तरफ अराजकता योगी जी इस्तीफा दें : अखिलेश यादव


      समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में न मजदूर सुखी है और न आम आदमी सुरक्षित है। कानून व्यवस्था से लेकर हर व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। अपराधियों की गोलियां लोगों को सरेआम भून रही हैं। मजदूर और कामगार त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। पुलिस वसूली में जुटी है। उन्होंने संभल में सपा नेता छोटे लाल दिवाकर व उनके पुत्र सुनील दिवाकर की हत्या की कड़ी निंदा की है।


       अखिलेश ने कहा, मजदूर भूखे प्यासे प्रदेश की सड़कों पर भटक कर रहे हैं। पुलिस मजदूरों पर लाठीचार्ज कर रही है । सरकार सिर्फ अपनी वाहवाही कराने को लेकर ही परेशान है। टीम-11 को प्रदेश में बसों की संख्या भी नहीं पता। उन्होंने कहा, कि प्रशासन दुर्भावनापूर्ण रवैया छोड़ नहीं पा रहा है। भूखे, प्यासे लोगों के पांवों में खून रिसने लगा है। तपती धूप में बच्चे बिलबिला रहे हैं और असहाय मां-बाप रोटी और दूध भी नहीं जुटा पा रहे हैं। 


    अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश अराजकता की भेंट चढ़ गया है। कानून व्यवस्था से लेकर हर व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। अपराधियों द्वारा लोगों को सरेआम गोलियों से भूना जा रहा हैं। मजदूर और कामगार त्राहि त्राहि कर रहे हैं। दबंगों और अपराधी तत्वों के हौसले आसमान पर हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। लाॅकडाउन में जबकि हर जगह पुलिस तैनात है उसके बाद भी अपराधी तत्व हत्या कर रहे हैं। 


       अखिलेश यादव ने आज जनपद सम्भल के चंदौसी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम शमशोई में हुए दोहरे हत्या काण्ड पर आक्रोश व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी के नेता श्री छोटेलाल दिवाकर एवं इनके पुत्र श्री सुनील दिवाकर की नृशंस हत्या की घोर निंदा की है।उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के समर्थक समाजवादी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न विगत तीन वर्षों से कर रहे हैं। लाॅकडाउन के समय राज्य में अपराधों पर कोई रोक नहीं है। निर्दोषों की हत्या भाजपा सरकार में रोज-रोज की घटना हो गयी है। भाजपा की रागद्वेश की राजनीति के कारण समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्यायें हो रही हैं। इसके पूर्व भी जौनपुर और आजमगढ़ में भी हत्यायें हुई है।


       मजदूर भूखे प्यासे प्रदेश की सड़कों पर भटक कर रहे हैं। पुलिस मजदूरों पर लाठीचार्ज कर रही है। भाजपा अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त है। जनता की जरूरतों और समस्याओं की कोई चिंता नहीं है सरकार के लोगों को। सरकार अपनी वाहवाही कराने को लेकर ही परेशान रहती है। जबकि पूरा प्रदेश और देश संकट से गुजर रहा है। अगर सत्ता में बैठे लोग व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है, तो लोगों की दुर्दषा कराने के बजाय उन्हें सरकार से हट जाना चाहिए। क्योंकि देश और देश की जनता अब भाजपा के कारनामों को और सहने के लिए तैयार नहीं है।



    अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में न तो श्रमिकों का पलायन रूक रहा है और नहीं प्रशासन अपना दुर्भावनापूर्ण रवैया छोड़ पा रहा है। भूखे, प्यासे लोगों के पांवो में खून रिसने लगा है, तपती धूप में बच्चे बिलबिला रहे हैं और असहाय माँ-बाप रोटी और दूध भी नहीं जुटा पा रहे हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति भी ठीक नहीं, आए दिन हत्याएं हो रही हैं।


     लाॅकडाउन-4.0 के इस बद से बदतर हालात में भी मुख्यमंत्री जी अगर सब नियंत्रण में है का दावा कर रहे हैं तो उन्हें कायदे से अब बिना देर किए त्यागपत्र दे देना चाहिए। ताकि कोई सक्षम उत्तराधिकारी प्रदेश को संकट से उबार सके। लोग खाने के पैकेट के लिए जूझ रहे हैं।


      उत्तर प्रदेश में भाजपाराज में गरीब होना जुर्म हो गया है। सरकार के एक मंत्रीजी को मजदूरों को चोर डकैत बताते शर्म नहीं आई। जो श्रमिक प्रदेश की सीमा में आ गए हैं उनकी विवशता पर रहम करें। उन्हें घर पहुंचाने के नाम पर अपमानित न करे। उनके साथ मानवता दिखाते हुए राजधर्म का पालन करे। श्रमिक बुरी तरह चकरायें हुए हैं कि बसों की व्यवस्था कब, कहाँ और किसकी है। इस चक्कर में श्रमिकों की शामत आ गयी है। टीम-इलेवन को राज्य की सरकारी और प्राईवेट बसों की संख्या भी ठीक से पता नहीं है जबकि उत्तर प्रदेश में ही लगभग एक लाख बसें है, इनका उपयोग क्यों नहीं किया गया.....?



      मजबूर श्रमिकों की पिटाई बंद होनी चाहिए। मुजफ्फरनगर में भोपा थाना क्षेत्र के एक दारोगा ने मजदूरों की साइकिलें छीन कर बेंच दी। गरीबों को बंटने वाला अनाज मध्य प्रदेश की मंडी में बेचे जाने की खबर है। जरूरत मंदों के हकों पर डाका डालने वाली भाजपा सरकार के कई काले किस्से सामने आ रहे हैं। क्या गरीबों के साथ पेश आने का यही संघी और भाजपाई तरीका है....?


      प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी से लगता है कि महाराष्ट्र से ट्रक में बैठकर आए मजदूरों से मोहनलागंज, लखनऊ में पहले पुलिस वालों ने 50 हजार रूपये मांगे फिर 15 हजार पर तोड़ कर लिया। आगरा एक्सप्रेस-वे स्थित टोल प्लाजा पर पुलिस कर्मी आराम फरमाते रहे। ट्रक, टैंकर, डाला सब गुजरते रहे। दुर्घटनाओं में श्रमिक मर रहे है?। पंचायत में विवाद पर हत्याएं हो रही है। भाजपा सरकार की मनमानी, अव्यवहारिक और अदूरदर्शी नीतियों के चलते पूरा प्रदेश संकटग्रस्त हो गया है।


     भाजपा राज में गरीब होना जुर्म हुआ


सपा अध्यक्ष ने कहा कि  भाजपा राज में गरीब होना जुर्म हो गया है। सरकार के एक मंत्री को मजदूरों को चोर-डकैत बताते शर्म नहीं आई। जो श्रमिक प्रदेश की सीमा में आ गए हैं, उनकी विवशता पर रहम करें। उन्हें घर पहुंचाने के नाम पर अपमानित न करे। उनके साथ मानवता दिखाते हुए राजधर्म का पालन करें। बसों की व्यवस्था कब, कहां और किसकी है । इस चक्कर में श्रमिकों की शामत आ गई है । टीम-इलेवन को राज्य की सरकारी और प्राइवेट बसों की संख्या भी ठीक से पता नहीं है जबकि उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख बसें हैं। पता नहीं इनका उपयोग क्यों नहीं किया गया।


      आगरा एक्सप्रेस-वे स्थित टोल प्लाजा पर पुलिस कर्मी आराम फरमाते रहे। ट्रक, टैंकर, डाला सब गुजरते रहे। दुर्घटनाओं में श्रमिक मर रहे है?। पंचायत में विवाद पर हत्याएं हो रही है। भाजपा सरकार की मनमानी, अव्यवहारिक और अदूरदर्शी नीतियों के चलते पूरा प्रदेश संकटग्रस्त हो गया है।