योगी आदित्यनाथ के भगवा धारण कर , साधू से सीएम बनने तक की  कहानी……


जब एक साधारण मनुष्य सन्यास धारण करते हुए योगी बनने की प्रेरणा लेता है, तो अपने कुल, खानदान, परिवारजनों आदि से नाता तोड़ते हुए सन्यासी या योगी के धर्म का पालन करता है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भगवा क्यों धारण किया और सन्यासी से राजनीति का दामन क्यों थामा? पेश है, विशेष रिपोर्ट।  आजयोगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर विशेष …. प्रभासाक्षी डॉट कॉम से साभार ..


       राजू यादव                                    


      उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव के निवासी अजय सिंह बिष्ट कैसे गोरखपुर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ बने? यह अपने आप में एक रोचक कहानी है और चर्चा का विषय भी है। योगी के गोरखपुर आने के संबंध में बताया जाता है कि विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम में गोरखपुर के उस समय के गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ का आना हुआ था। जिसमें योगी ने अपने संबोधन से महंत अवैद्यनाथ को प्रभावित किया। महंत अवैद्यनाथ ने योगी को गोरखपुर आने का आमंत्रण दिया। कुछ दिनों बाद अपने माता-पिता को बिना बताए योगी गोरखपुर जा पहुंचे। जहां उन्होंने सन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली। घर के किसी सदस्य को इस बात का पता नहीं था कि योगी आदित्यनाथ ने सन्यास धारण कर लिया।


योगी की परिवार को कैसे पता चला बेटा सन्यासी हो गया ?


     गोरखपुर आकर योगी आदित्यनाथ गुरु दीक्षा लेने के बाद मठ में एक सन्यासी का जीवन बिता रहे थे। योगी की बड़ी बहन दिल्ली में रहा करती थीं, जिन्हें खबर हुई कि योगी आदित्यनाथ (अजय सिंह बिष्ट) गोरखपुर में सन्यासी बन चुके हैं। यह खबर सुनते ही योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट गोरखपुर के उसी मठ में जा पहुंचे। बेटे को भगवा रंग में रंगा हुआ देख चकित रह गए। पिता ने योगी आदित्यनाथ को वापस घर ले जाने की बहुत कोशिश की अंत में नहीं मानने पर वह वापस पंचूर लौट गए। योगी की मां भी उनसे मिलने गोरखपुर आई लेकिन उनकी समझाइश भी बेनतीजा रही और आखिरकार मां को भी वापस लौटना पड़ा। इस पर महंत अवैद्यनाथ ने कहा था कि योगी पर कोई भी बंधन नहीं है वह जब चाहे अपने परिवार से मिलने जा सकता है।


क्या हुआ जब 4 वर्ष बाद परिवार से मिलने उत्तराखंड गए योगी ?


योगी आदित्यनाथ महंत के रूप में 4 वर्ष बाद अपने गांव पंचूर (उत्तराखंड, पौड़ी गढ़वाल) में अपने परिवार से मिलने और अपनी मां से सन्यासी के रूप में भिक्षा लेने के लिए पहुंचे। उनकी मां उन्हें देखकर बहुत रोयीं और एक बार फिर बेटे को मनाने की कोशिश की लेकिन अब अजय सिंह बिष्ट, योगी आदित्यनाथ हो चुके थे। उनका दृढ़ निश्चय तोड़ने में परिवारजन नाकाम रहे।


योगी आदित्यनाथ बने गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी 


    महंत अवैद्यनाथ ने सबसे चहेते शिष्यों में से एक योगी आदित्यनाथ को गोरखनाथ मंदिर की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाते हुए अपनी राजनीति में भी स्थान देते हुए उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। महंत अवैद्यनाथ गोरखपुर से 4 बार सांसद रह चुके थे। 1993 में महंत अवैद्यनाथ दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में अपना इलाज करवा रहे थे, इस दौरान महंत अवैद्यनाथ की हालत गंभीर होती गई, जिसकी वजह से योगी आदित्यनाथ को उन्होंने अपनी गद्दी सौंपते हुए उत्तराधिकारी बनाने का फैसला किया। जिसे योगी ने शिरोधार्य करते हुए अपने सन्यासी धर्म का कठोरता से पालन किया।


योगी आदित्यनाथ का राजनीति में पदार्पण किस तरह हुआ  ?


    1972 में उत्तराखंड में जन्मे योगी गोरखपुर नासिर सन्यासी थे बल्कि उनका राजनीति में भी पदार्पण हो चुका था। महंत अवैद्यनाथ ने अपने मठ की गद्दी देते हुए राजनीतिक सत्ता भी योगी आदित्यनाथ के हाथों में सौंप दी। युवा योगी छात्र राजनीति को भलीभांति समझते थे। राजनीति में प्रवेश करते हुए उन्होंने छात्रों के एकता और अखंडता और उनके न्याय के लिए लड़ाई प्रारंभ की। 1998 में 26 वर्ष की उम्र में योगी आदित्यनाथ ने संसद का रुख किया।


हिंदुत्व की आकर्षक छवि क्यों माने जाते हैं योगी आदित्यनाथ  ?


   राजनीति में प्रवेश करने के पश्चात योगी आदित्यनाथ की छवि एक कठोर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरनी प्रारंभ हो गई। बतौर सांसद गोरखपुर जिले को अपने नियम अनुसार चलाने और त्वरित फैसलों से योगी ने सबको चकित किया। लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद रहे योगी आदित्यनाथ ने हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बनने वहीं हिंदू महासभा के अध्यक्ष महंत दिग्विजयनाथ जैसी छवि प्राप्त करने में सफलता हासिल की। गोरखपुर के युवाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का रुतबा कायम हुआ।



हिंदू युवा वाहिनी का निर्माण करने के पीछे योगी का उद्देश्य ?


   योगी आदित्यनाथ ने अपने निजी सेना बनाते हुए हिंदू युवा वाहिनी का निर्माण किया जो गौ सेवा करने व हिंदू विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाई गई। हिंदू युवा वाहिनी ने गोरखपुर में ऐसा माहौल तैयार किया और ऐसे सामाजिक सद्भाव के काम किए जिसकी वजह से योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार सांसद रहे। उसके पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने का अवसर योगी आदित्यनाथ को प्राप्त हुआ।


यूपी में योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाए जाने की मुख्य वजह ?


एक तेजतर्रार राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छवि योगी आदित्यनाथ ने बना ली थी। योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी खासियतों में एक वह जनता से सीधा संवाद करने में विश्वास रखते हैं, जो शायद ही किसी नेता में देखी गई हो। यूपी में गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ की पैठ बन चुकी थी। अपने नीतिगत फैसलों से गोरखपुर के सांसद सभी को चकित कर देते थे। अपनी कार्यशैली से योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार को मजबूर कर दिया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद उन्हें सौंपा जाए। साल 2016 उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बनाया गया। योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट की भी यही इच्छा थी कि बेटा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बने। योगी के पिता की इच्छा पूरी हुई।


क्या हुआ जब योगी आदित्यनाथ के पिता का हुआ देहांत ?


      बीते सोमवार 20 अप्रैल 2020 को योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट ने 89 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी से निपटने हेतु बनाई जा रही व्यवस्थाओं में व्यस्तता व राज्य में जारी लॉकडाउन के हालातों की समीक्षा बैठकों को तवज्जो देते हुए पिता के अंतिम संस्कार में शामिल ना हो पाने पर दुख जताते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधर्म निभाने के कारण सूबे की जनता को ज्यादा महत्व देते हुए योगी आदित्यनाथ ने अपने पिता के अंतिम दर्शनों का सौभाग्य त्याग दिया।