बार्डर पर अब  टेंशन खत्म, भारत से सहमति बनी

         
         बीजिंग (मानवी मीडिया),  लद्दाख सीमा विवाद पर टेंशन कम होने व सेनाओं की वापसी के फैसले के अगले ही दिन चीन की तरफ से आधिकारिक बयान सामने आया है। चीन ने दावा किया है कि हालात सामान्य बनाने के मकसद से 6 जून को दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच जो 'सकारात्मक बातचीत' हुई थी, उसके आधार पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि 'हाल में चीन और भारत के बीच कूटनीतिक और सैन्य माध्यम से सीमा पर स्थिति के बारे में प्रभावी बातचीत हुई और सकारात्मक सहमति बनी।' 


    प्रवक्ता ने कहा, 'सीमा पर स्थिति सहज बनाने के लिए दोनों देश आपस में बनी सहमति के आधार पर कदम उठा रहे हैं।' नई दिल्ली में सैन्य सूत्रों ने कहा है कि दोनों सेनाएं गलवान घाटी में गश्त प्वाइंट 14 और 15 के आसपास तथा हॉट स्प्रिंग क्षेत्र से हट रही हैं, साथ ही कहा गया है कि चीनी सेना दोनों क्षेत्र में 1.5 किलोमीटर तक पीछे हट गयी है। पेंगॉन्ग सो में हिंसक झड़प के बाद पांच मई से ही भारत और चीन की सेना के बीच गतिरोध चल रहा है। इसी प्रकार हांगकांग मसले पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ब्रिटिश विदेश मंत्री डोमिनिक राब के साथ फोन पर बातचीत की। बातचीत में वांग यी ने कहा कि हांगकांग के मामले चीन के आंतरिक मामले हैं, जिनमें विदेशी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है।


    हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखना चीन के प्रमुख हितों से जुड़ा हुआ है और एक प्रमुख सैद्धांतिक मुद्दा है जिस पर कायम रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हांगकांग की राष्ट्रीय सुरक्षा के वास्तविक नुकसान और गंभीर खतरों का सामना करने की स्थिति में चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा(एनपीसी) ने निर्णायक रूप से कानून स्थापित कर हांगकांग में लागू किया, जिससे हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की स्पष्ट और दीर्घकालिक कमियों को जल्द से जल्द भरने में मदद मिलेगी। यह बिलकुल उचित, वैध और जरूरी है।