’किसान अपमान निधि- सुनील सिंह

       लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने सरकार के किसानों के जेब में बहुत कुछ भर जाना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उल्टा किसान को जेब से देना पड़ रहा है पैसा’ किसान अपमान निधि में किसानों को कोरना आपदा के दौरान दो ₹2000 की राशि दिए जाने को किसानों का बहुत बड़ा अपमान बताया है सरकार के पास तो उद्योगपतियों को देने के लिए कई करोड़ों की योजना है किंतु किसानों के लिए अपमान के लिए दो ₹2000 देना बताया है किसान अन्नदाता है जो सारे देश का पेट भरता है आज वह सरकार की नीतियों की वजह से कर्ज और शूद में जकड़ा हुआ है किसानों के लिए दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है खेती करना गंभीर होती जा रही है।किसानों की समस्या को निपटाने के लिए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है।


        किसानों की पीडा का आभास करते हुए लोकदल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा की  उत्तर प्रदेश की सरकार  गाँव गाँव जाकर किसानों की समस्याओं का निराकरण कराने में अपना सक्रिय योगदान दे।  महामारी के प्रकोप के कारण किए गये लाक डाउन से बहुत से किसान अपनी  फसल नहीं काट सके हैं।फलस्वरूप किसानों के समक्ष भुखमरी की स्थिति है। उन्होंने कहा कि फसल की लागत सही तय हो तो मिल जाएगा लाभ किसानों को फसल का लागत मूल्य तो मिलता नहीं उल्टा लागत से कम दरों में सरकार ने खरीदारी करके किसानों के साथ धोखा किया है। लगभग दो माह से प्रदेश के किसानों को वर्षा, ओलावृष्टि जैसी दैवीय आपदाओं से किसानों का चैन समाप्त हो चुका है और जो थोड़ी फसल बची भी थी उसे किसान लाक डाउन के कारण अपने घर नहीं ला सका।बहुत से लघु और सीमान्त किसानों के लिए दो जून की रोटी के लाले पडे हैं।


      प्रदेश की भाजपा या पूर्व की समाजवादी सरकार और राजनीतिक पार्टियां किसानों के हित की बात करते दिख जाते हैं, मगर सच्चाई यही है कि आज भी प्रदेश का आम किसान दो जून की रोटी से आगे नहीं सोच सकता, प्रदेश भर में किसानों की आत्महत्या बदस्तूर जारी है. तो ऐसे में जरुरत है कि प्रदेश का शासन उस दिशा में काम करे जिससे किसानों की स्थिति में स्थाई रूप से सुधार हो और प्रदेश के किसान को अपने गरीबी से परेशान हो आत्महत्या करने की जरुरत ना पड़े. किसान समाज सबसे पहले अपनी फसल का लााभकारी मूल्य चाहता है लेकिन यह वायदा निभाने में नरेन्द्र मोदी सरकार विफल साबित हुई है। किसान देश का सबसे बड़ा मेहनतकश समाज है। इनको थोड़ी सी सरकारी मदद् देने की बीजेपी सरकार की सोच अनुचित ही नहीं बल्कि अहंकारी है।


      किसान समाज सबसे पहले अपनी फसल का लााभकारी मूल्य चाहता है और जिस वायदे को पूरी करने में पर बीजेपी की सरकार विफल साबित हुई जो कि खुली वादा खिलाफी भी है। सिंह ने सरकार से माँग करते हुए कहा है कि प्रदेश की दैवीय आपदा और महामारी के परिणामस्वरूप किसानों की आर्थिक दुर्दशा को देखते हुए उनके बिजली के बिलों के साथ साथ समस्त सरकारी देयों को माफ करने के आदेश सरकार द्वारा सभी विभागीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को भेजे जाये ताकि किसानों को राहत मिल सके।