कुर्सी के लिए कुछ भी करेगा

 रीवा पुलिस की माननी के सात बार पाव छूकर प्रभारी ने बचाई अपनी कुर्शी-


      एमपी. रीवा बीते कुछ माह में जिस प्रकार से प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस पाल्टी की स्थिति है, शायद उसी प्रकार से रीवा पुलिस की भी स्थिति हो गई है, बीते 5 दिनों के दौरान जारी हुई थाना प्रभारियों की लिस्ट को देखकर कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है, अब तो हालत यह हो चली है, की किसी भी दिन कोई आरक्षक या मुंशी अपने आकाओं के पाश जाएगा और अधिकारियों को एक फोन कराएगा कुछ देर में थाना प्रभारी के रूप में उसका आर्डर हो जाएगा, शायद इतनी बत्तर स्थिति तो हमने रीवा पुलिस की कभी नही देखी नही इतना प्रेसर, हालत यह है कि पदस्थापना के पैमाने को भी ताक में रख दिया गया, और सीनियरों को जेएसआई या फिर चौकी  में पदस्थ कर दिया गया जबकि जूनियरों को वकायदा उसी थाने का सरताज बना दिया गया, अब इसे उन खाखी धारी होनहारो की कलावाजी कहे या अधिकारियों की लचरता, या अपनी कुर्शी बचाने के लिए स्तर हीन कार्य, कारण चाहे जो भी लेकिन इन जारी हुई सूचियों ने पूरे जिले में एक बड़ा चर्चा का विषय खड़ा कर दिया है, और अन्य निरीक्षक, उप निरीक्षकों का मनोबल तोड़ दिया है, हालत यह है कि अब बर्दी धारी काम छोड़कर सफेद पोश आकाओं को तलाशने में कल से ही जुट गए है, एक एसआई ने तो 20 दिन पहले ही बता दिया था कि हम किस थाने के प्रभारी बनने वाले है, और कल जारी हुई सूची में बन भी गए, इसका मतलब मनमानी का दौर और अधिकारियों की लाचरता पूरे चरम पर है। अब जल्द ही देखना है, की किस आरक्षक या मुंशी को थाना प्रभारी आकाओं के फोन पर बनाया जाता है, शायद यही कारण है, की इस जिले में ऊपर से लेकर नीचे तक के कोई भी पुलिस अधिकारी आना नही चाहते।


कुर्सी के लिए कुछ भी करेगा-


जिहा यह सच है, पिछली सूची में एक सज्जन को थाना प्रभारी बनाया गया, लेकिन एक विधायक जी उनसे इतने नाराज थे कि उन्हें हटाने पर आड़ गए जैसे ही प्रभारी महोदय को यह बात पता चली तो वो तत्काल उक्त विधायक जी के पाश पहुच गए और खाखी की गरिमा को ताक पर रखकर बिना टोपी उतारे सार्वजनिक स्थान पर भीड़ के बीच उनके 7 बार चरण वन्दन किए फिर क्या मोगैम्बो खुस हुआ और प्रभारी बने रहने का आशीर्वाद लेकर वापस चले आए। इतना ही नही वहां मौजूदा लोगो ने इस बात को सार्वजनिक कर दिया,