लोक निर्माण विभाग में 5 करोड़ रु0 या उससे अधिक लागत के कार्याें में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में प्रचलित ‘स्टैण्डर्ड बिडिंग डाॅक्यूमेंट प्रोक्योरमेंट आॅफ सिविल वक्र्स’ को अंगीकृत करने का निर्णय

                                                     -----मंत्रिपरिषद के निर्णय-----


     मंत्रिपरिषद ने राज्य के लोक निर्माण विभाग में 5 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत के कार्याें में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ), भारत सरकार में प्रचलित ‘स्टैण्डर्ड बिडिंग डाॅक्यूमेंट प्रोक्योरमेंट आॅफ सिविल वक्र्स’ को अंगीकृत करने का निर्णय लिया है। 

 

    इस अंगीकरण के फलस्वरूप निर्माण कार्याें में प्रयुक्त सामग्री की दरों में परिवर्तन होने पर मूल्य-समायोजन की अनुमन्यता हेतु वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के सामान्य वित्तीय नियम-2017 के नियम-225 के प्रस्तर (टप्प्प्)(ं) में उल्लिखित प्राविधान लागू हो सकेंगे। 

 

    इन प्राविधानों के अनुसार मूल्य-समायोजन ऐसे कार्याें में अनुमन्य किया जाना प्रस्तावित है, जिनमें कार्य पूर्ण होने की समयावधि 18 माह से अधिक निर्धारित है। वर्तमान प्राविधानानुसार मूल्य-समायोजन ऐसे निर्माण कार्याें में देय होता है, जिनमें अनुबन्ध की शर्ताें के अनुसार कार्य के पूर्ण होने की अवधि 12 माह से अधिक निर्धारित होती है। मूल्य-समायोजन हेतु समय-सीमा 12 माह से अधिक को बढ़ाकर 18 माह से अधिक करने पर, निर्माण सामग्री की दरों में वृद्धि होने से विभाग को बढ़ी हुई दरों पर भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इससे सरकारी धन की बचत होगी। 

 

    इस निर्णय से निर्माण कार्याें के आगणन को बार-बार पुनरीक्षित करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे सरकारी धन एवं समय की बचत होगी। अनुबन्धात्मक कार्य समयान्तर्गत पूर्ण हो सकेंगे। शासकीय धनराशि की बचत होने से अन्य कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को गति दी जा सकेगी।