राम मंदिर मॉडल बदलने का प्रस्ताव,संतो ने किया विरोध

  -  वी0 एन0  दास




         अयोध्या, रामजन्म भूमि परिसर में बनने वाले राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को बदलने को लेकर पारित प्रस्ताव के खिलाफ मंदिर आंदोलन से जुड़े संत सामने आ गए हैं। अयोध्या के कुछ संतों ने राम मंदिर के मॉडल को बदल कर नए मॉडल पर मंदिर के निर्माण को लेकर प्रस्ताव पारित किया है।



        वीएचपी के मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख संतों का कहना है कि जो इस तरह की मांग उठा रहे हैं, वे नहीं चाहते कि रामलला का भव्य मंदिर दो-तीन साल में बन कर तैयार हो जाए। ये लोग ऐसी मांग करके मंदिर निर्माण के कार्य को 30 साल तक रोकना चाहते हैं। संतों ने कहा कि मंदिर आंदोलन से जुड़े तमाम राम भक्त अब नहीं रहे, तीन साल में मंदिर बन जाएगा, तो बाकी बचे संत भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन कर लेंगे। मंदिर आंदोलन में राम मंदिर का जो मॉडल करोड़ों लोगों के दिल में बसा है, मंदिर उसी मॉडल पर बनेगा। जो इसे बदलने की मांग कर रहे हैं, वे खुद भव्य राम मंदिर अपने जीवनकाल नहीं देख सकेंगे।


मंदिर के लिए सारी जिंदगी लगा दी-
    अयोध्या संत समित के अध्यक्ष और राम मंदिर आंदोलन में सारी जिंदगी लगाने का दावा करने वाले संत कन्हैया दास का कहना है कि मंदिर का 60 फीसदी काम हो चुका है। अब श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्स्ट ईमानदारी से इसके तकनीकी निर्माण को जल्द शुरू करने के लिए काम कर रहा है। संतों को उसमें बाधा न पहुंचा कर सहयोग करना चाहिए, जिससे जल्द भव्य राम मंदिर बन जाए। मंदिर में रामलला को देखने के लिए लोग आतुर हैं।

मॉडल बदलने की मांग मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने की-
      महंत कन्हैया दास ने कहा कि इस तरह की मांग वे लोग कर रहे हैं, जो नहीं चाहते की मंदिर जल्द बने। इससे तो 30 साल तक मंदिर का निर्माण नहीं हो सकेगा। इस तरह की मांग करने वाले वे लोग है, जो सदैव राम मंदिर आंदोलन में बाधाएं पैदा कर रहे थे। अब वीएचपी आंदोलन से जुड़ेगा। राम विलास वेदांती भी उनसे जुड़ कर अपना हलकापन दिखा रहे हैं। संतों की एक ही मांग होनी चाहिए, प्रस्तावित मॉडल पर राम मंदिर जल्द बने।

       वहीं राम बल्लभाकुंज मंदिर के महंत राज कुमार दास का कहना है कि जो यह मांग कर रहें हैं वे खुद मंदिर नही देख पाएंगे। क्योंकि तब मंदिर बनने में 30 साल लग जाएंगे। उन्होंने कहा जो लोग मंदिर के नए मॉडल की बात कर रहे हैं। अयोध्या में उनका कोई सामाजिक धरातल नहीं है। ट्रस्ट बन गया है, उसमें जगह न मिलना ही इनकी पीड़ा है। महंत ने कहा कि ट्रस्ट अपना काम ईमानदारी से कर रहा है। मंदिर में बाधा पहुंचाने की साजिश रचने वाले खुद अपनी जगहंसाई करवा रहे हैं।



संतों का कहना है कि जो इस तरह की मांग उठा रहे हैं, वे नहीं चाहते कि रामलला का भव्य मंदिर दो-तीन साल में बन कर तैयार हो जाए। ये लोग ऐसी मांग करके मंदिर निर्माण के कार्य को 30 साल तक रोकना चाहते हैं। संतों ने कहा कि तीन साल में मंदिर बन जाएगा, तो बाकी बचे संत भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन कर लेंगे।



ट्रस्ट में शामिल शीर्ष संतों का निर्णय ही मान्य-
       श्री रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और अयोध्या के निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही ट्रस्ट का गठन किया गया है। इसमें देश के तमाम शीर्ष संत भी शामिल है। ट्र्स्ट की बैठक में प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल के अनुरूप ही मंदिर निर्माण करने पर मुहर लग चुकी है। विरोध करने वाले हर काल और जगह पर मिलते हैं। प्रभु राम के कार्यकाल में भी उन्हें रावण जैसे विरोधी का सामना करना पड़ा।

       राम मंदिर के निर्माण मे भी विरोधी अपना दांव खेलेंगे। ट्रस्ट उनको सुनते हुए अपने निर्णयों के मुताबिक काम करता रहेगा। वैसी मेरी सभी से अपील है कि राम जी के काम को पूरा करवाने मे सहयोग करें, इसमें बाधाएं न खड़ी करें। उन्होने कहा कि ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और डॉक्टर अनिल मिश्र को काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। वे सभी ट्रस्टियों से ताल मेल करके और राय लेकर काम कर रहे हैं।