सच से डरी भाजपा सरकार, पत्रकारों का करती है उत्पीणन- अखिलेश यादव


     भाजपा पर हमलावर रुख अपनाते हुए अखिलेश यादव ने कहा है कि समाज को सशक्त, जागरूक और लोकतांत्रिक बनाने में पत्रकारिता की अहम भूमिका होती है। हर परिस्थिति में निर्भीकता तथा निष्पक्षता के साथ ईमानदारी से सत्य के पक्ष में आवाज उठाने का काम पत्रकार ही करते हैं। इसीलिए लोगों का भरोसा समाचार पत्रों पर भी रहता है। लेकिन भाजपा सच से डरती है क्योंकि वह हर मोर्चे पर झूठ की राजनीति करने में विश्वास रखती है। समाचार पत्र और स्वतंत्र पत्रकार इसीलिए उसकी आंखों में खटकते हैं।


      भाजपा के सत्ताधीशों की शह पर इन दिनों पत्रकारों के खिलाफ केस दर्ज कराने के कई मामले हुए है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की आवाज को दबाने-कुचलने के इन प्रयासों की निंदा करनी चाहिए। देश के एक वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ एक भाजपाई प्रवक्ता ने दिल्ली में गत 4 जून 2020 को एफआईआर दर्ज करा कर अलोकतांत्रिक एवं असहिष्णु राजनीति का परिचय ही दिया है।


      भाजपा प्रवक्ता ने विनोद दुआ पर फेक न्यूज मार्केटिंग में लिप्त होने, तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने, असंसदीय भाषा के प्रयोग और स्वयं प्रधानमंत्री जी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणियां करने की शिकायत की है। एफआईआर में कहा गया है कि विनोद दुआ अपना एक ‘विनोद दुआ शो‘ यूट्यूब चैनल चलाते हैं इसमें कई विषय शत प्रतिशत झूठे होते है। दिल्ली में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन को हिंसक और साम्प्रदायिक रंग दिया गया। प्रधानमंत्री जी के विरूद्ध बहुत आपत्तिजनक बातें की गईं।


     श्री दुआ के खिलाफ भाजपा के प्रवक्ता नवीन कुमार ने जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें आईपीसी की धाराएं- 290/505/505(2) लगाई गई हैं। पत्रकार अपने विचार रखने में स्वतंत्र होते हैं। भाजपा की मंशा है कि सभी लोग केवल उसका प्रशस्तिगान करें, सरकार की कमियों की बात करने वालों के प्रति वह शत्रुभाव रखती है।


     बीते 24 महीनों में सोशल मीडिया पर लिखी कथित आपत्तिजनक सामग्री के बहाने उत्तर प्रदेश सरकार 16 लोगों को जेल भेज चुकी है। प्रदेश के मिर्जापुर के एक सरकारी स्कूल में मिड डे मील में बच्चों को रोटी नमक देने की खबर छापने पर पवन जायसवाल, सीतापुर के रवीन्द्र सक्सेना को क्वाॅरंटाइन सेन्टर की बदइंतजामी दिखाने पर तथा सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री जी की छवि धूमिल करने के आरोप में प्रशांत कनौजिया पर केस दर्ज हुए है। ‘द वायर‘  के संस्थापक सम्पादक वरदराजन पर आरोप लगा कि उन्होंने तब्लीगी जमात के बचाव में मुख्यमंत्री जी को गलत ढंग से उद्घृत किया था।


      अभी पिछले दिनों ही फतेहपुर में कोरोना को लेकर सरकारी अव्यवस्था दिखाने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमें दर्ज करा दिए गए हैं। जिलाधिकारी के इस रवैये से पत्रकारों में खासा रोष है। जिले में लाॅकडाउन के दौरान गरीबों के लिए चलाई जाने वाली कम्युनिटी किचन बंद होने की खबर ट्विटर पर चलाने वाले पत्रकार अजय भदौरिया व अन्य के खिलाफ महामारी अधिनियम सहित भा.द.सं. 505, 385, 188, 270 व 269 धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेक मिश्र के खिलाफ धारा 120 बी में भी केस दर्ज हैं।


      पत्रकार संघ और एसोसिएशन के बैनर तले पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ जनपद फतेहपुर के पत्रकारों ने जल सत्याग्रह किया। जिला मुख्यालय के पत्रकारों ने हुसेनगंज के भृगुधाम के बलखंडी गंगाघाट पर प्रेम शंकर अवस्थी, अजय भदौरिया, विवेक मिश्र के नेतृत्व में सुबह दस बजे से बाहर बजे तक पानी के अंदर रहकर विरोध प्रदर्शन किया। बिंदकी व जाफरगंज के पत्रकारों ने अरूण द्विवेदी, श्याम तिवारी की अगुवाई में बक्सर के गंगाघाट पर, चैडगरा के पत्रकारों ने गंगा नदी के गुनीर गंगाघाट पर, जहानाबाद में डाॅ0 जौहर रजा व संतोष तिवारी की अगुवाई में रिंद नदी में तथा अमौली के पत्रकारों ने विमलेश त्रिवेदी के नेतृत्व में रूस्तमपुर घाट पर यमुना नदी में जल सत्याग्रह कर जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों के उत्पीड़न का विरोध किया।



      इसी प्रकार बहुआ के पत्रकारों ने शाहिद व प्रदीप सिंह की अगुवाई में कोर्राक कनक जमुना नदी में, गाजीपुर के पत्रकारों ने प्रथम चंद्र की अगुवाई में यमुना नदी के औरासी घाट पर, असोधर के पत्रकारों ने यमुना नदी में, गौरव सिंह व फूल चंद्र के नेतृत्व में महाकुंड घाट पर, खागा मुख्यालय व किशुनपुर के पत्रकारों ने यमुना नदी में, खखरेरू के पत्रकारों ने अशोक सिंह के नेतृत्व में यमुना के कोटघाट पर, रानीपुर यमुना घाट पर ज्ञान सिंह व विवेक सिंह के नेतृत्व में तथा प्रेमनगर के पत्रकारों ने मंडवा गंगाघाट पर जल सत्याग्रह कर विरोध प्रदर्शन किया।


      फतेहपुर जनपद में हथगाम और छिउलहा के पत्रकारों ने कोतला गंगा घाट पर, डेढ़ दर्जन स्थानों पर नदी में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। इस सामूहिक प्रदर्शन की काफी चर्चा रही। बकेवर में पत्रकारों ने जिला प्रशासन को चेताया कि अगर पत्रकारों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर रवीन्द्र त्रिपाठी, ललित मिश्रा, शैलेंद्र विश्वकर्मा, संतोष शुक्ला, रोहित त्रिवेदी, महेन्द्र सिंह, राजीव निषाद, रंजन शुक्ला, अमरदीप त्रिपाठी, दीपू, गौरव मिश्र, ताहिर सिद्दीकी आदि पत्रकारों ने भी जिला प्रशासन के रवैये की निंदा की और कहा कि चैथे स्तम्भ पर और हमला बर्दाश्त नहीं होगा।