सरकार को देश-विदेश के निवेशकों से निरन्तर प्राप्त हो रहे प्रस्ताव: मुख्य सचिव 

  • प्रदेश सरकार की नीतियों के फलस्वरूप प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश हेतु देश-विदेश के निवेशकों से निरन्तर प्राप्त हो रहे प्रस्ताव।

  • निवेश परियोजनाओं को और अधिक त्वरित गति से धरातल पर लाये जाने हेतु विकसित नवीन एवं प्रभावी

  • एम.ओ.यू.अनुश्रवण तंत्र का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये।

  • एम.ओ.यू. अनुश्रवण तंत्र के अन्तर्गत राज्य में परियोजना के जीवन-चक्र की अवधि में निवेश परियोजना अनुश्रवण तंत्र का संस्थागतकरण कराया जाए।

  • निवेशकों तथा शासन के अन्य समस्त हितधारकों को एकल (सिंगल) इंटरैक्टिव प्लेटफाॅर्म उपलब्ध कराया जाए।

  • निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए प्रभावी लक्ष्यीकरण के लिए निवेशकों की सुविधा आवश्यकताओं को चिन्हित कर यथाशीघ्र उनका समाधान कराया जाए।

  • एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल के माध्यम से विभागों के साथ आॅनलाइन संचार व संवाद हेतु निवेशकों को एक विकल्प उपलब्ध कराकर उनकी समस्याओं का उचित समाधान कराया जाए।

  • अनुश्रवण हेतु शासन के किसी भी विभाग के साथ हस्ताक्षरित समस्त नवीन एम.ओ.यू. की प्रविष्टि एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल पर अनिवार्य रूप से की जाये।

  • प्रत्येक दो माह पर समस्त एमओयूज की समीक्षा विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में की जाये।

  • मुख्य सचिव ने प्रस्तावित निवेश के प्रभावी अनुश्रवण हेतु प्रत्येक स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिये।

  • एमओयू वार नामित नोडल अधिकारी निवेश प्रस्ताव की दिन-प्रतिदिन की प्रगति को ट्रैक करने के साथ-साथ एमओयू हस्ताक्षरकर्ता के संपर्क बिन्दु के रूप में कार्य करें।

  • मुख्य सचिव ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त, समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव तथा समस्त मण्डलायुक्तों को परिपत्र निर्गत कर दिये निर्देश।   


             
लखनऊ,  मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों के फलस्वरूप प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश हेतु देश-विदेश के निवेशकों से निरन्तर प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं। निवेश परियोजनाओं के अनुश्रवण तथा सुविधाजनक व निर्बाध रूप से त्वरित क्रियान्वयन हेतु प्रौद्योगिकी के सदुपयोग से युक्त सुगम संस्थागत तंत्र के माध्यम से प्रदेश में स्थापित की जा रही निवेश परियोजनाओं के जीवन-चक्र का अधिक प्रभावी अनुश्रवण किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके दृष्टिगत निवेश परियोजनाओं को और अधिक त्वरित गति से धरातल पर लाये जाने हेतु एक नवीन एवं प्रभावी एम.ओ.य ़अनुश्रवण तंत्र विकसित किया गया है, जिसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाये।


    मुख्य सचिव ने यह निर्देश अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त, समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव तथा समस्त मण्डलायुक्तों को परिपत्र निर्गत कर दिये हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों व निवेशकों तथा उत्तर प्रदेश शासन के मध्य उद्योग बन्धु को एक सेतु अथवा इंटरफेस की भांति कार्य करने तथा सम्बन्धित विभागों की भी और अधिक सक्रियता से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। ये विभाग अपने विषय-ज्ञान के साथ-साथ राज्य में निवेशकों के लिये समग्र दृष्टिकोण का उपयोग करते हुये महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं।


  मुख्य सचिव ने कहा कि एम.ओ.यू. अनुश्रवण तंत्र के अन्तर्गत राज्य में परियोजना के जीवन-चक्र की अवधि में निवेश परियोजना अनुश्रवण तंत्र का संस्थागतकरण कराया जाए। उन्होंने कहा एम.ओ.यू. क्रियान्वयन के लिए प्रक्रिया का मानकीकरण कराया जाए। उन्होंने कहा कि निवेशकों तथा शासन के अन्य समस्त हितधारकों को एकल (सिंगल) इंटरैक्टिव प्लेटफाॅर्म उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए प्रभावी लक्ष्यीकरण के लिए निवेशकों की सुविधा आवश्यकताओं को चिन्हित कर यथाशीघ्र उनका समाधान कराया जाए। उन्होंने कहा कि एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल के माध्यम से विभागों के साथ आॅनलाइन संचार व संवाद हेतु निवेशकों को एक विकल्प उपलब्ध कराकर उनकी समस्याओं का उचित समाधान कराया जाए।


      मुख्य सचिव ने बताया कि एम.ओ.यू. टैªकिंग एवं अनुश्रवण तंत्र के प्रबन्धन की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने हेतु उद्योग बन्धु द्वारा एक आॅनलाइन एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल विकसित किया गया है, जिसको राज्य के सिंगल विण्डो पोर्टल-निवेश मित्र (ीजजचेरूध्ध्दपअमेीउपजतंण्नचण्दपबण्पद) में एकीकृत व संरेखित किया गया है। एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल के तकनीकी प्रबन्धन हेतु ‘‘उद्योग बन्धु’’ नोडल संस्था होगी। उन्होंने निर्देश दिये कि शासन के किसी भी विभाग के साथ हस्ताक्षरित समस्त नवीन एम.ओ.यू. की प्रविष्टि एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल पर अनिवार्य रूप से की जाये। यह भी निर्देश दिये कि नोडल अधिकारियों एम.ओ.यूज. के क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति तथा निवेशक के समक्ष आने वाली समस्याओं अथवा प्रकरणों से सम्बन्धित सूचना को समीक्षा बैठकों में तथा एम.ओ.यू. ट्रैकिंग पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल पर विभिन्न मापदण्डों के आधार पर तैयार आख्याएं प्रत्येक माह मुख्य सचिव स्तर पर आयोजित होने वाली प्रोजेक्ट माॅनिटरिंग ग्रुप की बैठकों में प्रस्तुत की जाए। एम.ओ.यू. टैªकिंग पोर्टल का उपयोग प्रदेश के समस्त मण्डलायुक्त भी निर्दिष्ट लाॅगिन के माध्यम से कर सकते हैं।


     मुख्य सचिव ने कहा कि निवेशकों के साथ हस्ताक्षरित होने वाले समस्त एम.ओ.यू. को उनके क्षेत्र एवं सेक्टर के अनुसार सम्बन्धित विभागों को आवंटित किया जाए। सम्बन्धित विभाग इन एम.ओ.यूज के क्रियान्वयन हेतु नोडल विभाग के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन विभागों के एम.ओ.यूज में प्रस्तावित निवेश की संचयी एवं कुल धनराशि रुपये 01 लाख करोड़ हो अथवा एम.ओ.यूज की संख्या 200 से अधिक हो उन विभागों में एम.ओ.यूज के क्रियान्वयन के लिए एक प्रोजेक्ट माॅनिटरिंग यूनिट की स्थापना की जाए एवं जिन विभागों में सम्बन्धित एम.ओ.यूज की संख्या प्रस्तावित निवेश की धनराशि रुपये 01 लाख करोड़ से कम हो, उन विभागों में सम्बन्धित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव (प्रशासनिक प्रमुख) की अध्यक्षता में एम.ओ.यू. अनुश्रवण प्रकोष्ठ (पी.एम.यू.) स्थापित कराये जाएं। पी.एम.यू. द्वारा प्रत्येक माह में कम से कम एक बैठक अवश्य करनी होगी। यह भी निर्देश दिये कि एम.ओ.यू के नोडल विभाग द्वारा प्रत्येक एम.ओ.यू हेतु निवेश को सुगम बनाने हेतु एक विभागीय नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए।


     


     मुख्य सचिव ने निर्देश दिये हैं कि 500 करोड़ रुपये से कम के प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के सापेक्ष एम0ओ0यू0 विभाग द्वारा प्रत्येक परियोजना हेतु कम से कम मण्डल स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाये। 500 करोड़ रुपये से 2000 करोड़ रुपये तक के प्रत्येक एमओयू के सापेक्ष एमओयू विभाग द्वारा प्रत्येक परियोजना हेतु विशेष सचिव/निदेशक स्तर के अधिकारियों को नामित किया जाये। इसके अतिरिक्त 2000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्येक एमओयू हेतु सम्बन्धित एमओयू विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर के अधिकारी नोडल अधिकारी को नामित किया जाये। विभाग अपनी आवश्यकतानुसार नामित किये गये नोडल अधिकारियों से वरिष्ठ अधिकारियों को भी नोडल अधिकारी नामित कर सकते हैं।


       मुख्य सचिव ने कहा कि एमओयू का अनुश्रवण एमओयू ट्रैकिंग पोर्टल के माध्यम से किया जाये। कृषि एवं सम्बन्धित क्षेत्रों के 2000 करोड़ रुपये से अधिक के एमओयूज की मासिक समीक्षा बैठक कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में सम्बन्धित विभाग द्वारा आयोजित करायी जाये। कृषि एवं सम्न्धित क्षेत्रों को छोड़कर अन्य समस्त क्षेत्रों के 2000 करोड़ रुपये से अधिक के एमओयूज की मासिक समीक्षा बैठक अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता मंे सम्बन्धित विभाग द्वारा आयोजित की जायें। इसी प्रकार 500 करोड़ रुपये से 2000 करोड़ रुपये तक के एमओयूज की मासिक समीक्षा बैठक सम्बन्धित एमओयू विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव की अध्यक्षता में आयोजित की जायें। 500 करोड़ रुपये से कम के एमओयूज की मासिक समीक्षा बैठक सम्बन्धित मण्डल, जहां परियोजना प्रस्तावित हों, के मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में मण्डलीय अपर/संयुक्त निदेशक उद्योग द्वारा आयोजित करायी जायें। प्रत्येक दो माह पर समस्त एमओयूज की समीक्षा विभागीय अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में की जाये।


     राजेन्द्र कुमार तिवारी ने एमओयू वार नामित नोडल अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि वह निवेश प्रस्ताव की दिन-प्रतिदिन की प्रगति को ट्रैक करने के साथ-साथ एमओयू हस्ताक्षरकर्ता के संपर्क बिन्दु के रूप में कार्य करें। नोडल अधिकारियों का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह समीक्षा बैठक में एमओयू के क्रियान्वनय की अद्याविधिक स्थिति से अवगत करायें तथा समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देशों के साथ माह की पांच तारीख तक पोर्टल पर अपडेट करना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिये निवेश को आकर्षित करने तथा प्राप्त हुये निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में निवेशकों को सभी संभव सहयोग देने के उद्देश्य से दिये गये निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाये।