टिड्डी दल का खतरा टला, प्रशासन आपदा से निपटने को तैयार- जिलाधिकारी


टिड्डी दल दल का खतरा टला फिर भी जिला प्रशासन की किसी भी आपदा से निपटने हेतु तैयार- जिलाधिकारी


      अयोध्या, जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि जनपद में किसी भी क्षेत्र में टिड्डी दल का कोई प्रकोप नहीं है फिर भी टिड्डी दल को नियंत्रित करने के साथ किसान बंधुओं को कोई नुकसान न हो इसकी सभी तैयारियां पूर्व में ही कर ली गई थी। यदि टिड्डी दल द्वारा जनपद में प्रवेश किया जाता है तो हर क्षेत्र में उस को नियंत्रित करने हेतु व्यापक प्रबंध किए गए थे। इस कार्य के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल बनाया गया था।


       जनपद में 29 मई को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में इस संबंध में एक बैठक कृषि, कृषि रक्षा, उद्यान, गन्ना, चीनी मिल व वैज्ञानिक के साथ हो चुकी है। जिसमें बड़े पैमाने पर की गई तैयारी का खाका प्रस्तुत किया गया था।


     जिलाधिकारी ने बताया कि 9 बड़े वाटर स्प्रेयर एवं 01 फागिंग मशीन अग्निशमन विभाग के पास, 42 ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर चीनी मिल रोजा गांव, 12 ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर चीनी मिल मसौधा, पांच ऑटोमेटिक स्प्रेयर एवं एक फॉर्मिंग मशीन नगर निगम, दो ऑटोमेटिक स्प्रेयर एवं एक फागिंग मशीन नगर निकाय भदरसा, 5 आटोमेटिक स्प्रेयर 8 छोटे स्प्रेयर नगर पालिका रूदौली, 6 आटोमेटिक स्प्रेयर व 2 फागिंग मशीन नगर निकाय बीकापुर, 01 टेªक्टर माउन्टेन स्प्रेयर एवं 02 आटोमेटिक स्प्रेयर नगर निकाय गोसाईगंज, 10 टेªक्टर माउन्टेन स्प्रेयर उद्यान विभाग के अतिरिक्त किसान बन्धु के पास फसल सुरक्षा हेतु छोटे स्प्रेयर काफी संख्या में उपलब्ध है।



      जिलाधिकारी ने आगे बताया कि टिड्डी दल के आपदा हेतु 05 हजार लीटर दवा छिड़काव हेतु रिर्जव में रखी है तथा कीटनाशक विके्रताओ के पास 10 से 12 हजार लीटर, रौजागाॅव चीनी मिल के पास, 03 सौ लीटर, मसौधा के पास, 09 सौ लीटर कीटनाशक दवाए उपलब्ध है।


     उपरोक्त के अतिरिक्त 835 न्याय पंचायत, 1257 राजस्व गाॅव की निगरानी हेतु कृषि विभाग के 155 कर्मचारियो की तैनाती कर दी गई है निकट भविष्य में यदि टिड्डी दल का आगमन होता है तो जनपद में सभी व्यवस्थाएॅ पूर्ण है किसी भी किसान को घबराने व परेशान होने की आवश्यकता नही है। किसी भी आपदा की स्थिति में परम्परागत तरीको का उपयोग किसान बन्धु द्वारा करने की अपील कर ली गई है। प्रत्येक तहसील के नोडल उप जिलाधिकारी तथा विकास खण्ड के नोडल खण्ड विकास अधिकारी को बनाया गया है।


       कृषि मंत्री ने अवगत कराया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के निर्देशों के अनुसार जिलाधिकारी धनराशि का व्यय कर सकते हैं। प्रदेश स्तर पर टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए जिला मुख्यालयों पर नोडल अधिकारी, टास्क फोर्स और कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।अग्निशमन विभाग की गाड़ियों समेत विभिन्न माध्यमों से टिड्डी दलों की रोकथाम के निर्देश दिये हैं। बैठक में टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों के माध्यम से कृषकों तक पहुंचाने के लिए कहा गया। टिड्डियों के आक्रमण पर ढोल, नगाडों, टीन के डिब्बों, थालियों आदि को बजाते हुए शोर मचाएं। साथ ही ट्रैक्टर माउन्टेड स्प्रेयर्स, पावर स्प्रेयर्स, नगर निगम/नगर निकाय के छिड़काव यंत्रों, अग्निशमन विभाग की गाड़ियों से रसायनों का छिड़काव किया जाए, ताकि टिड्डी दल को उनके प्रवास के ठिकानों पर ही नियंत्रित/समाप्त किया जा सके।


                                                  ----- महाराष्ट्र में टिड्डी दलों का तांडव -----


    तेज हवाओं के साथ पाकिस्तान से भारत पहुंचे टिड्डी दलों ने पंजाब, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में तबाही मचाने के बाद अब महाराष्ट्र का रुख किया है। मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से होते हुए टिड्डी दलों ने नागपुर के काटोल,सावनेर, अमरावती के वरुड, मोर्शी और चांदूर बाजार के खेतों को अपनी चपेट में लिया है।



     देखने मे भले ही ये टिड्डीदल छोटे हैं लेकिन हजारों दलों और करोड़ों की संख्या में झुंड बनाकर यह जिस इलाके पर हमला करते हैं, उस इलाके की फसलों को बर्बाद कर डालते हैं। इससे इलाके में भुखमरी के हालात पैदा होने की संभावना है। टिड्डी दल फसलों पर बैठते ही फसल चट कर जाते हैं। जिस पेड़ पर ये बैठे, उसके सारे पत्ते तक हजम कर जाते हैं। किसी भी हरियाली वाली जगह पर इनके बैठते ही वहां की हरियाली खत्म हो जाती है।


      फिलहाल, इन्हें भगाने के लिए कीटनाशक दवाइयों के साथ थाली, कनस्तर, ढोल-नगाड़े के अलावा अग्निशमन विभाग की तेज रफ्तार पानी वाली गाड़ियों का उपयोग कारगर पाया गया है। नागपुर के काटोल के किसानों ने बताया कि उनके लिए यह संकट बिल्कुल नया है। करोड़ों की तादाद में टिड्डियों से आसमान ढक-सा जाता है। फसल पर बैठते ही चट करने वाली इनकी हरकत किसानों को बेहद बड़ी परेशानी में ला सकती है।

काटोल पर हुआ था टिड्डियों का हमला:-


      नागपुर के काटोल की मुख्य फसल संतरा और मौसंबी है, जिस पर टिड्डियों ने हमला बोला लेकिन किसानों और जनप्रतिनिधियों की सावधानी के चलते बड़ा नुकसान होने से टल गया। स्थानीय जिला परिषद सदस्य सलिल देशमुख ने तत्काल कृषि अधिकारी और जिलाधिकारी को सूचना दी और अग्निशमन विभाग को सूचित किया जिससे इन टिड्डियों से नुकसान को रोकने में सफलता मिल सकी। फिलहाल किसानों के हुए नुकसान का आकलन प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

टिड्डियों से निपटने के लिए एनडीआरएफ भेजें:-


     टिड्डियों से परेशान किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि इसे सिर्फ कीट-पतंगों का हमला न समझा जाए बल्कि सरकार इसे राष्ट्रीय आपदा मानकर इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए एनडीआरफ को भेजे। ताकि किसानों के भूखों मरने की नौबत न पैदा हो।