उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन एक श्रृंखला का निर्माण किए जाने का प्रयास है हमारा:मुख्यमंत्री
   

 

      मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन के 3,135.34 करोड़ रु0 लागत के 28 नये पारेषण उपकेन्द्रों का ऑनलाइन लोकार्पण/शिलान्यास कियाऊर्जा विकास का कारक है।लोकार्पित/शिलान्यास हुए ट्रांसमिशन उपकेन्द्रों के माध्यम से प्रदेश में विद्युत की आपूर्ति और भी बेहतर हो सकेगी।वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान भी उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन द्वारा विद्युत पारेषण उपकेन्द्रों की एक श्रृंखला का निर्माण किया जाना सराहनीय प्रयास।राज्य सरकार ‘सबको बिजली-हरदम बिजली’ के लक्ष्य पर गम्भीरता से कार्य रही है।सम-विषम परिस्थितियों में भी राज्य सरकार ने विकास को केन्द्र बिन्दु में रखा।उ0प्र0 पहला ऐसा राज्य है जो लाॅकडाउन के बाद भी लोकार्पण एवं शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों को आयोजित कर रहा है। राज्य सरकार ने 01 करोड़ 24 लाख से अधिक परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन देकर उनके घरों में उजाला लाने का काम किया। लगभग 01 लाख 75 हजार मजरों का विद्युतीकरण।  

      लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन के 3,135.34 करोड़ रुपये लागत के 28 नये पारेषण उपकेन्द्रों का ऑनलाइन लोकार्पण/शिलान्यास किया। लोकार्पित किये गये पारेषण उपकेन्द्रों में 01 उपकेन्द्र 400 के0वी0, 07 उपकेन्द्र 220 के0वी0 तथा 11 पारेषण उपकेन्द्र 132 के0वी0 क्षमता के हैं, जिनकी लागत 1881.78 करोड़ रुपये है। यह उपकेन्द्र जनपद बस्ती, गोरखपुर, चित्रकूट, महोबा, बलरामपुर, उन्नाव, लखनऊ, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रयागराज, बलिया, फिरोजाबाद, कानपुर, मथुरा, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद एवं मुजफ्फरनगर में स्थापित किये गये हैं।


      इसी प्रकार शिलान्यास किये गये उपकेन्द्रों में 01 पारेषण उपकेन्द्र 400 के0वी0, 03 उपकेन्द्र 220 के0वी0 तथा 05 उपकेन्द्र 132 के0वी0 क्षमता के हैं, जिनकी लागत लागत 1253.56 करोड़ रुपये हैं। यह उपकेन्द्र जनपद मऊ, शामली, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, जौनपुर, बदायूं तथा गौतमबुद्धनगर में निर्मित होंगे।


     कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऊर्जा विकास का कारक है। प्रदेश की सर्वांगीण प्रगति के लिए सुदृढ़ आधारभूत क्षेत्र का विकास आवश्यक है। इसमें ऊर्जा सेक्टर का विशिष्ट स्थान है। वर्तमान सरकार शुरुआत से ही ऊर्जा क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दे रही है। ऊर्जा विभाग द्वारा विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि लोकार्पित/शिलान्यास हुए ट्रांसमिशन उपकेन्द्रों के माध्यम से प्रदेश में विद्युत की आपूर्ति और भी बेहतर हो सकेगी।  


      मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान भी उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन द्वारा विद्युत पारेषण उपकेन्द्रों की एक श्रृंखला का निर्माण किया जाना एक सराहनीय प्रयास है। प्रदेश के ऊर्जा विभाग नेे पिछले 03 वर्षाें में बेहतर कार्य संस्कृति को अपनाकर लोगों को निर्बाध बिजली देने का कार्य किया है।


     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज प्रदेश के पारेषण तंत्र  की भार-वहन क्षमता लगभग 24,000 मेगावाॅट है, जो विगत 03 वर्षाें में लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि का परिचायक है। इसी प्रकार प्रदेश के पारेषण तंत्र की प्रदेश के बाहर से विद्युत आयात की क्षमता आज लगभग 13,900 मेगावाॅट है जो विगत 03 वर्षाें में लगभग 59 प्रतिशत की वृद्धि का परिचायक है।


     प्रदेश सरकार का प्रयास है कि पावर फाॅर आॅल में हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप प्रत्येक घर तक 24 घण्टे बिजली की आपूर्ति कर सके। इसे लेकर राज्य सरकार ‘सबको बिजली-हरदम बिजली’ के लक्ष्य पर गम्भीरता से कार्य रही है।


     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जिला मुख्यालयों में 23 से 24 घण्टे, तहसील मुख्यालयों तथा बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 20-21 घण्टे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 17-18 घण्टे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। 01 करोड़ 24 लाख से अधिक परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन देकर उनके घरों में उजाला लाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि विद्युत कनेक्शन देने के साथ ही लगभग 01 लाख 75 हजार मजरों का विद्युतीकरण का कार्य भी किया गया।



    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सम-विषम परिस्थितियों में भी राज्य सरकार ने विकास को केन्द्र बिन्दु में रखा है। उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जो लाॅकडाउन के बाद भी कई प्रकार के लोकार्पण एवं शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।


      इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री कान्त शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऊर्जा विभाग ‘सबको बिजली, पर्याप्त बिजली, निर्बाध बिजली’ उपलब्ध करा रहा है। पारेषण क्षेत्र में किये गये कार्याें के परिणामस्वरूप प्रदेश के पारेषण क्षेत्र में लगभग सभी महत्वपूर्ण सूचकांकों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। 03 वर्ष पूर्व प्रदेश के पारेषण तंत्र द्वारा जहां मात्र 18061 मेगावाॅट का अधिकतम भार वहन किया जा सकता था, वहीं वर्ष 2019 में प्रदेश के पारेषण तंत्र द्वारा लगभग 21,632 मेगावाॅट के अधिकतम भार-वहन किया गया है। आगामी 05 वर्षाें में प्रदेश का पारेषण तंत्र लगभग 30,000 मेगावाॅट का भार वहन करने हेतु सक्षम होगा, जिसके लिए 164 नग उपकेन्द्रों एवं तत्सम्बन्धी लाइनों का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है।


      ऊर्जा मंत्री ने बताया कि विगत 03 वर्षाें में कुल 8881.63 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न विभव 765 के0वी0, 400 के0वी0, 220 के0वी0 एवं 132 के0वी0 के 86 उपकेन्द्रों एवं तत्सम्बन्धी लाइनों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन कार्याें के फलस्वरूप 03 वर्ष पूर्व परिवर्तकीय क्षमता 89,012 एम0वी0ए0 से बढ़कर 1,22,130 एम0वी0ए0 हो गयी है, जो कि परिवर्तकीय क्षमता में लगभग 37.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अतिरिक्त 03 वर्षाें में लगभग 12,000 कि0मी0 की पारेषण लाइनों का निर्माण कराया गया है।
इस अवसर पर ऊर्जा राज्यमंत्री रमाशंकर सिंह पटेल, मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव ऊर्जा अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस0पी0 गोयल, उ0प्र0 पावर काॅरपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक एम0 देवराज, उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन के प्रबन्ध निदेश सेंथिल पांडियन सी0, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।