कोविड-19 के दृष्टिगत ग्रामीण क्षेत्रों में कन्वर्जेन्स विभागों द्वारा रोजगार सृजन के प्रयास सुनिश्चित किये जायें: मुख्य सचिव 

कोविड-19 के दृष्टिगत ग्रामीण क्षेत्रों में कन्वर्जेन्स विभागों द्वारा मनरेगा के अन्तर्गत अधिकाधिक रोजगार सृजन के प्रयास सुनिश्चित किये जायें,मुख्य सचिव द्वारा मनरेगा अभिसरण के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में कराये जा रहे कार्यों की समीक्षा। 

 

     लखनऊ 07 जुलाई, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री राजेन्द्र कुमार तिवारी ने निर्देश दिये हैं कि कोविड-19 के दृष्टिगत ग्रामीण क्षेत्रों में कन्वर्जेन्स विभागों यथा-लघु सिंचाई, वन, सिंचाई, लोक निर्माण, कृषि, उद्यान, मत्स्य, रेशम पंचायतीराज एवं आईडब्ल्यूएमपी विभागों द्वारा मनरेगा के अन्तर्गत अधिकाधिक रोजगार सृजन के प्रयास सुनिश्चित किये जायें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा गोवंश आश्रय स्थलों में पशुओं हेतु तालाब निर्माण, घास रोपण (नेपियर, वेटिवर), मेड़ बन्धी का कार्य कराया जाये। उन्होंने पशुपालन विभाग को गोवंश आश्रय स्थलों मंे पशुओं हेतु तालाब निर्माण, चारागाह विकास, भूमि समतलीकरण, पशु शेड (बकरी आश्रय, पोल्ट्री आश्रय, सुकर आश्रय) की व्यवस्था हेतु कार्य कराने हेतु भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के साथ निराश्रित गो-वंश आश्रय स्थलों हेतु पराली सम्बन्धित परियोजनाओं को भी मनरेगा के अन्तर्गत शामिल किया जाये। 

मुख्य सचिव ने यह निर्देश मनरेगा अभिसरण के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में कराये जा रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में रेशम के उत्पादन को बढ़ाते हुये रेशम के आयात में कमी लायी जाये। रेशम विभाग द्वारा अधिकाधिक परियोजनाओं को शामिल करते हुये रेशम के उत्पादन हेतु अर्जुन एवं शहतूत के पौधों का रोपण किया जाये तथा चाइना से आने वाले रेशम के विकल्प सृजित किये जायें। उन्होंने कहा कि उद्यान व वन विभाग द्वारा नमामि गंगे के अंतर्गत गंगा नर्सरी के कार्य को भी प्रस्ताव में शामिल किया जाये तथा उद्यान विभाग द्वारा मुख्यमंत्री फलोद्यान योजना के अन्तर्गत अधिकाधिक व्यक्तिगत लाभार्थियों का चयन किया जाये। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिये कि लक्ष्य प्राप्ति हेतु चिन्हित परियोजनाओं को शीघ्र प्रारम्भ कराया जाये।  

बैठक में लघु सिंचाई विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि प्रदेश में कुल 5500 चेक डैम है, जिनमें बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 2750 चेकडैम के सापेक्ष 780 चेकडैमों को मनरेगा योजनान्तर्गत चिन्हित किया गया है। इस पर मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि सभी चेकडैमों में वर्षा के पश्चात सिल्ट सफाई का कार्य कराया जाये। सिंचाई विभाग द्वारा नहरों की पटरियों का सुदृढ़ीकरण कराया जाये तथा सुदृढ़ीकरण हेतु चिन्हित पटरियों की लम्बाई का चिन्हांकन भी कर लिया जाये। कृषि विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन के अन्तर्गत वाटर शेड संबंधी कार्यों हेतु मेड़ बंधी का कार्य कराये जाने के निर्देश निर्गत कर दिये गये हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक वृक्षधन, मुख्यमंत्री फलोद्यान, मुख्यमंत्री सामुदायिक वानिकी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में कोविड-19 के दृष्टिगत ग्रामीण क्षेत्रों में कन्वर्जेन्स विभागों यथा-लघु सिंचाई, वन, सिंचाई, लोक निर्माण, कृषि, उद्यान, मत्स्य, रेशम पंचायतीराज एवं आईडब्ल्यूएमपी विभागों हेतु 4050.00 करोड़ धनराशि श्रमांश में व्यय किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज श्री मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि श्री देवेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव उद्यान श्री बी0एल0मीना, प्रमुख सचिव नमामि गंगे श्री अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव दुग्ध विकास श्री भुवनेश कुमार, सचिव लोक निर्माण श्री रंजन कुमार, विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त श्री जुहेर बिन सगीर, अपर आयुक्त मनरेगा श्री योगेश कुमार सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।