विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना, 18 घंटे बाद पंचनामा, 48 घंटे बाद पोस्टमार्टम

 18 घंटे बाद पंचनामा, 48 घंटे बाद पोस्टमार्टम, थानेदार निलंबित,मुख्य आरोपी पर 50 हजार का इनाम घोषित।

बदायूं – 50 वर्षीय की आंगनवाड़ी सहायिका से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी महंत पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं,उघैती थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच पुलिस के साथ स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी शुरू कर दी है।

जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने एक वीडियो जारी कर मामले में अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा दिया है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच में पाया गया है कि स्थानीय थाना पुलिस द्वारा शिकायत आने के बाद ढिलाई और लापरवाही बरती गई है। इसलिए थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। अब तक 2 गिरफ्तारियां हो चुकी है, तीसरे के लिए प्रयास जारी है। पीड़ित परिवार को मिलकर भरोसा दिया गया है कि प्रशासन उनके साथ है। आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई करेंगे। मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाएंगे और कोशिश रहेगी दोषियों को तत्काल सजा हो।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उघैती थाना क्षेत्र में 3 जनवरी को अपने मायके में मंदिर में पूजा करने गई 50 वर्षीय आंगनवाड़ी सहायिका की सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी।पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि हुई है। मृतका के प्राइवेट पार्ट में रॉड जैसी कोई चीज डालने की बात सामने आई है। एक पैर भी टूटा हुआ था।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 यशपाल सिंह ने बताया कि मृतका के हाथ, पैर और कूल्हे पर चोट के निशान हैं। एक पैर में फैक्चर है और प्राइवेट पार्ट में गहरी चोटों के निशान हैं।अधिक रक्तस्त्राव की वजह से पीड़िता की मौत हुई है।मृतका के प्राइवेट पार्ट में रॉड जैसी कोई चीज डालने की बात सामने आई है।कितना सच है ये पूछने पर सीएमओ ने कहा,ये जांच का विषय है। मृतका के प्राइवेट पार्ट में गहरी चोटें और काफी खरोंचें आई हैं। जांच के लिए कुछ और सैम्पल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।*

तीन जनवरी की शाम करीब पांच छह बजे 50 वर्षीय आंगनवाड़ी सहायिका अपने मायके में एक मंदिर में पूजा करने गयीं थीं।मृतका के बेटे का आरोप है कि रात के 11-12 बजे के करीब मंदिर के महंत सत्यनारायण उनके चेला वेदराम, ड्राइवर जसपाल उनकी माँ को मृत अवस्था में घर छोड़कर चले गए।परिजनों के मुताबिक पुलिस को तुरंत सूचना दे दी गई थी इसके बावजूद पुलिस सोमवार 4 जनवरी दोपहर बाद पहुंची। यानि लगभग 18 घण्टे बाद शव का पंचनामा हो सका। वहीं शव का पोस्टमार्टम 5 जनवरी को हुआ।

सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में 5 जनवरी को मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इस मामले में 3 नाजमद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें दबिश दे रही हैं।- अविनाश चन्द्र, एडीजी, बरेली जोन, यूपी पुलिस

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार (धारा 376 के तहत) और हत्या (धारा 302) के तहत मामला दर्ज किया गया है।मामले के तूल पकड़ने के बाद 6 जनवरी को मृतका के गांव पहुंचे बरेली जोन के एडीजी अविनाश चन्द्र ने मीडिया से कहा, “मृतका के परिजनों से मुलाकात की है। केस से जुड़े कई बिंदुओं पर बात हुई है। इस केस के लिए 4 टीमें गठित की गई हैं। मंदिर के महंत पर 50,000 इनाम घोषित हुआ है।

ये वही बदायूं जिला है जो साल 2014 में 2 नाबालिग चचेरी बहनों की संदिग्ध हालत में मौत के बाद सुर्खियों में छाया हुआ था।जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर उघैती थाना है। पिछले साल देशभर में सुर्खियां में बना हाथरस जिले से करीब 150 किलोमीटर की दूरी है।हाथरस में एक दलित युवती से सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी।हाथरस कांड से अपने हाथ जला चुकी यूपी सरकार ने बदायूं केस में उदासीनता और लापरवाही बरतने के मामले में उघैती थाना प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया है और आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका-NSA) के तहत कार्रवाई की बात कही है।

लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मी को संस्पेड करना काफी नहीं है। ऐसे पुलिसकर्मियों पर 166 AC के तहत केस दर्ज करना चाहिए। क्योंकि जांच और पोस्टमॉर्टम में देरी से कई अहम साक्ष्य मिट जाते हैं, जिसके बाद पुलिस चार्जसीट तो फाइल करती है लेकिन कोर्ट में आरोपी को सजा दिलाने में मुश्किल आती है।

महिला मुद्दों पर निःशुल्क कानूनी सलाह देने करने वाली एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स (आली) संस्था की कार्यकारी निदेशक एवं वकील रेनू मिश्रा ने पोस्टमार्टम में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक शोषण से जुड़े मामलों में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मी को सिर्फ संस्पेड करना काफी नहीं है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना —
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी तक ने एक महिला की कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या किए जाने के मामले में सरकार पर निशाना साधा है।अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा कि बदायूँ में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद हैवानियत और दरिंदगी का जो वीभत्स रूप पोस्टमार्टम में सामने आया है वो दिल दहलाने वाला है। भाजपा सरकार अपराधियों को बचाने की कोशिश न करे और मृतका व उसके परिवार को पूर्ण न्याय मिले। भाजपा सरकार का कुशासन अपराधियों की ढाल न बने। तो वहीं प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़ा कर दिया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया कि हाथरस में, सरकारी अमले ने शुरुआत में फरियादी की नहीं सुनी, सरकार ने अफसरों को बचाया और आवाज को दबाया, बदायूं में, थानेदार ने फरियादी की नहीं सुनी, घटनास्थल का मुआयना तक नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि ‘उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना अति-दुखद व अति-निंदनीय है। बीएसपी की मांग है कि राज्य सरकार इस घटना को गंभीरता से ले और दोषियों को सख्त सजा दिलाना भी सुनिश्चित करे। ताकि ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।’

निर्भया केस के बाद बने कानून के तहत उक्त पुलिककर्मी पर 166AC के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि रेप से जुड़े मामलों में पोस्टमार्टम अहम साक्ष्य होंते हैं। देरी करने पर कई बार साक्ष्य मिट जाते हैं। जिससे रिपोर्ट तो दर्ज हो जाती है लेकिन कोर्ट में सजा देने में समस्या आती है।