उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार तय, भक्त हैरान




 योगी ने दिया मोदी को बड़ा झटका, उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार तय, अंधभक्त हैरान,योगी के लिए बड़ा झटका, मोदी बनाएँगे मायावती को मुख्यमंत्री।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।योगी आदित्यनाथ पांच बार गोरखपुर से सांसद रह चुके हैं।पांच जून 1972 को जन्मे योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही थीं। योगी आदित्यनाथ की ख़ासियत जनता से सीधा संवाद और संपर्क है,लोग उनमें महंत दिग्विजयनाथ के तेवर और महंत अवैद्यनाथ का सामाजिक सेवा कार्य का जोग देखते हैं।वह कहते हैं कि गोरखनाथ मंदिर के सामाजिक कार्यों का जनता पर काफ़ी असर है।

भाजपा में रहते हुए भी उनका हर चुनाव में भाजपा नेताओं से टकराव होता रहा है। वह अपने लोगों की सूची नेतृत्व के सामने रख देते और उन्हें टिकट देने की मांग करते, कई बार उन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ बाग़ी उम्मीदवारों को खड़ा किया और उनके प्रचार में उतरकर पार्टी के सामने संकट खड़ा कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा हैरान-भक्त परेशान। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक की चाले ऐसी चली जा रही हैं कि राजनीतिक पंडित का ज्ञान भी चकरा जा रहा है, कब कौन किसके साथ कहां पहुंच जाता है और कौन किसको कैसे समर्थन दे देता है इस बात को ब्रह्मा भी शायद नहीं जान पाते होंगे, आज आपको उत्तर प्रदेश में बदल रहे समीकरणों की एक ऐसी सियासी चाल के बारे में बताएंगे जिसे सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे और आप कहेंगे यह कैसे हो सकता है,तो आज आपको हम यह बताएंगे कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या पर्दे के पीछे बदलाव हो रहा है और यह कैसे हो रहा है।

दरअसल बात यह है कि उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश की सभी राजनीतिक पार्टियां अब तक प्रदेश में कूदना शुरू कर दिया है,और कोई भी पार्टी यह नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में उसका कबजा ना हों, इस वक्त सत्ता में मौजूद भाजपा के अंदर खींचतान चल रही है, उत्तर प्रदेश की प्रमुख पार्टियों में एक पार्टी बसपा अपने अस्तित्व खोती जा रही है, समाजवादी पार्टी एक बार फिर से अपने 2012 वाले फॉर्म पर लौटने का प्रयास कर रही है।वहीं कांग्रेस चुन-चुन कर अपनी सीटों को जीतने में लगी हुई है।छोटे दल भी अपनी राजनीतिक समीकरण को टटोलना में लागे है, मगर इन सबके बीच बसपा और भाजपा एक ऐसा समीकरण बना रहे हैं जिससे उत्तर प्रदेश क्या देश के राजनीतिज्ञों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जा सकती है।

पर्दे के पीछे का मामला यह है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में बसपा भाजपा को समर्थन दे रही है, जिसके बाद भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष जिताने में अपने आप को कामयाब बता रहीं है।

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2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का यह एक ट्रायल पंचायत के चुनाव में चल रहा है और इस ट्रायल के सफलता और असफलता के स्तर पर ही 22 की रणनीति का पिटारा खोला जाएगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बसपा जो भाजपा का विरोध करती है ट्विटर पर उसके जीते हुए प्रत्याशी और समर्थक भाजपा को कैसे सपोर्ट कर सकते हैं। बिना आलाकमान के इजाजत के फिलहाल यह तो वर्तमान स्थिति है।

अब आइए बताते हैं भविष्य में क्या राज क्या छुपा हुआ है—–

सूत्र बताते हैं कि 2022 के चुनाव में बसपा और भाजपा की सीटों को मिलाकर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, भाजपा के सूत्र यह भी बताते हैं कि अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो मायावती, भाजपा को ही समर्थन देंगी। राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि मायावती को भाजपा मुख्यमंत्री बना सकती है और योगी को साइडलाइन कर सकती है। इससे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि वह दलित हितेषी है। फिलहाल भाजपा में चल रही कला और मायावती का भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से करीब आना यह तो जरूर संकेत दे रहा है कि उत्तर प्रदेश के 2022 के चुनाव में कभी भी किसी का समीकरण कहीं भी फिट हो सकता है और अपने पार्टी के अंदर अपने प्रतिद्वंदी को खत्म करने के लिए किसी को भी कुर्सी पर बैठाया जा सकता है, फिलहाल इस सवाल का जवाब आने वाले भविष्य के गर्भ में ही मिलेगा।

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जनवरी 2007 में एक युवक की हत्या के बाद हि 0यु 0वा 0कार्यकर्ताओं द्वारा सैयद मुराद अली शाह की मज़ार में आग लगाने की घटना के बाद हालात बिगड़ गए और प्रशासन को कर्फ़्यू लगाना पड़ा। रोक के बावजूद योगी द्वारा सभा करने और उत्तेजक भाषण देने के कारण उन्हें 28 जनवरी 2007 को गिरफ़्तार कर लिया गया था।उनको गिरफ़्तार करने वाले डीएम और एसपी को दो दिन बाद ही मुलायम सरकार ने सस्पेंड कर दिया।योगी की गिरफ़्तारी के बाद कई ज़िलों में हिंसा, तोड़फोड़, आगज़नी की घटनाएं हुईं, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई।पहली बार पुलिस ने हिंदू युवा वाहिनी पर थोड़ी सख़्ती की, जिसका बयान करते हुए वह लोकसभा में रो पड़े थे।