मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ओबीसी आरक्षण खत्म



मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ओबीसी आरक्षण खत्म करना ओबीसी समाज के प्रति घोर अन्याय। 2017 से अभी तक ओबीसी अभ्यर्थियों को 11000 सीटो का नुकसान।ओबीसी आरक्षण  लागू कराने के लिये लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस।
नीट परीक्षा से धीरे-धीरे आरक्षण की कटौती करके आज आरक्षण पूरी तरीके से खत्म कर दिया गया है। 2014 के बाद से तमाम शैक्षणिक संस्थान को बर्बाद किया जा रहा है। जितने भी समावेसी चीजें है उन सभी को भाजपा सरकार खत्म कर रही है। इसके साथ ही स्पष्ट तह दिया गया है कि आने वाले दिन में जो भी नीट के एग्माम में ओबीसी को आरक्षण नहीं मिलेगा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू जी ने कहा कि  अन्य पिछड़ा वर्ग (व्ठब्) आरक्षण लागू किये बिना मेडिकल एंट्रेंस की परीक्षा कराना समाज के साथ घोर अन्याय है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कॉलेजों में छम्म्ज् के तहत होने वाले दाखिले में व्ठब् समाज को आरक्षण से दूर रखा जा रहा है। मैं पूछता हूं क्या कारण है, आखिर क्यों इसे सरकार इसे लागू करने से बच रही है, क्यों व्ठब् समुदाय से इनती नफरत की जा रही है?


अजय कुमार लल्लू जी ने आगे कहा कि  ’ऑल इंडिया फैडरेशन फॉर अदर बैकवर्ड क्लासेज’ के आंकड़े बताते हैं कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मेडिकल शिक्षण संस्थानों में व्ठब् आरक्षण के लागू नहीं होने के कारण 2017 के बाद से कुल 11,000 से अधिक सीटें ओबीसी छात्रों को गंवानी पड़ी। लेकिन, सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सरकार बस अपने सिंहासन के मजे लूट रही है और अपनी जिम्मेदारियों को किनारे रख हमारे व्ठब् भाई-बहनों का हक खा रही है।

अब नीट परीक्षा में ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया गया, जो सरासर गलत है। इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में भी काफी संख्या में ऐसे मंत्री हैं, जो ओबीसी से आते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी ओबीसी के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।उनके हक को खत्म किया जा रहा है। इसके खिलाफ पूरे देश में जोरदार आंदोलन किए जाने का फैसला लिया गया है।


उन्होंने कहा कि  राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मेडिकल शिक्षण संस्थानों में व्ठब् के लिए 27 फीसदी के आरक्षण की मांग को सरकार अपनी जूती के नीचे कुचलने का काम कर रही है। ये लोग व्ठब् समाज को पूंछ  खींचने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं कर रहे हैं। सरकार को व्ठब् समुदाय पर भरोसा दिखाना चाहिए और उन्हें उनका हक देना चाहिए।अजय लल्लू ने ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाते हुये कहा  कि छम्म्ज् परीक्षा में  ओबीसी आरक्षण लागू कराने की मांग का समर्थन करती है और इस लड़ाई को काँग्रेस पुरजोर तरीके से लड़ेगी।

आंकड़ों के अनुसार, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए 27,062 सीटें आवंटित की गईं, जिसमें सामान्य वर्ग को 21,092, एससी को 4,017 और एसटी उम्मीदवारों के लिए 1,953 सीटें दी गईं. पहले के मानदंडों के अनुसार, ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत सीटें आरक्षित थीं, जो इस खंड में 7,307 सीटें आती हैं, जिसे अब हटा दिया गया है।इसी तरह, पीजी डेंटल में अखिल भारतीय स्तर पर 970 सीटें हैं, जिसमें सामान्य के लिए 756, एससी के लिए 141 और एसटी के लिए 73 शामिल हैं।ओबीसी की सीटें शून्य हैं। सामान्य कोटे में 9,208 सहित अंडर ग्रेजुएट मेडिकल उम्मीदवारों के लिए कुल 11,879 सीटों में से 1,787 सीटें एससी के लिए और 884 एसटी के लिए हैं। ओबीसी कोटा फिर से शून्य है। डेंटल छात्रों के लिए स्नातक की कुल 931 सीटों में से 724 सीटें सामान्य वर्ग के लिए, 140 एससी और 67 एसटी के लिए हैं, लेकिन ओबीसी फिर से शून्य है।