मालिनी अग्रवाल और प्रीति चौधरी को डीजी डिस्क अवार्ड

 एस0 पी0 मित्तल

राजस्थान। राजस्थान पुलिस की अतिरिक्त महानिदेशक (जेल) मालिनी अग्रवाल और अजमेर सेंट्रल जेल की अधीक्षक प्रीति चौधरी को डीजी डिस्क अवार्ड दिया गया है। इन दोनों महिला अधिकारियों ने अपने अपने विभाग में उत्कृष्ट कार्य किया है। मालिनी अग्रवाल अजमेर की रेंज आईजी रह चुकी है। लेकिन जेल के एडीजी पद पर रहते हुए अग्रवाल ने जेलों में सुधार और सुरक्षा के महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इसी प्रकार प्रीति चौधरी ने एक वर्ष के कार्यकाल में अजमेर सेंट्रल जेल के साथ साथ हाई सिक्योरिटी जेल का भी प्रभार है। हाई सिक्योरिटी जेल में प्रदेशभर के कुख्यात अपराधी होते हैं। अपराध की प्रवृत्ति को देखते हुए ही सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं एक एक कैदी पर नजर रखी जाती है।

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सरकार के दिशा निर्देशों पर की गई सख्ती की वजह से कुख्यात अपराधियों ने प्रीति चौधरी को धमकी भरे पत्र भी भेजे, लेकिन चौधरी डरी नहीं। ऐसा नहीं कि चौधरी सख्त मिजाज की पुलिस अधिकारी है। सेंट्रल जेल में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए चौधरी ने कैदियों को अनेक सुविधाएं भी दिलवाई है। खस कर महिला कैदियों का विशेष ध्यान रखा है। कैदियों को अच्छे आचरण की भी सीख दी है। बीमार कैदियों के प्रति सद्भावना दिखाई है। कैदियों की भोजन सामग्री में भी सुधार किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रीति चौधरी खुद कैदियों से संवाद करती है। चौधरी का मानना है कि अधिकांश कैदी पहले से ही मानसिक तौर पर परेशान होते हैं, ऐसे में यदि जेल के अंदर भी तनावपूर्ण माहौल हो तो फिर कैदी के लिए परेशानी होती है।

जेल में आना ही अपने आप में सजा है। अदालतें अपराधी को सुधार के लिए जेल में भेजती है। हमारा प्रयास होता है कि अपराधी के आचरण में सुधार आए। यहां यह उल्लेखनीय है कि डीजी डिस्क अवार्ड पुलिस महानिदेशक अपने कार्यकाल में देते हैं। राजीव दासोत ने हाल ही में जेल े डीजी पद से सेवानिवृत्त होने से पहले अवार्ड की घोषणा की है। यह अवार्ड जेल आईजी आलोक कुमार वशिष्ट, प्रतापगढ़ जेल के अधीक्षक प्रदीपक लखावत, आरएसी के डिप्टी कमांडेंट दिनेश शर्मा को भी दिया गया है। डीजी डिस्क अवार्ड के मिलने पर पुलिस महानिदेशक एम एल लाठर ने सभी अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।